बिहार में डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा देने की तैयारी, सुधा के विस्तार से लेकर बकरी पालन तक कई नई योजनाओं की शुरुआत
बिहार सरकार डेयरी और पशुपालन क्षेत्र को मज़बूत बनाने के लिए लगातार नई पहल कर रही है। इसी दिशा में नालंदा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राज्य सरकार ने डेयरी उद्योग, पशु स्वास्थ्य और बकरी पालन से जुड़ी कई नई योजनाओं की घोषणा की। सरकार का कहना है कि इन कदमों से दूध उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
कार्यक्रम के दौरान बिहारशरीफ डेयरी परियोजना के विस्तार के तहत प्रतिदिन 20 मीट्रिक टन क्षमता वाले दही और लस्सी संयंत्र की आधारशिला रखी गई। इसके अलावा, 300 चयनित खुदरा दुग्ध विक्रेताओं को मुफ्त डीप फ्रीजर भी दिए गए, ताकि वे दूध और दुग्ध उत्पादों को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकें।
दुग्ध विक्रेताओं को मिलेगा फायदा
सरकार का मानना है कि डीप फ्रीजर मिलने से दूध और अन्य उत्पाद खराब होने की संभावना कम होगी। इससे विक्रेताओं को नुकसान कम होगा और उनकी कमाई बढ़ सकेगी। साथ ही, महिलाओं को भी डेयरी व्यवसाय से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से मज़बूत बनाने की कोशिश की जा रही है। सुधा, जो बिहार का प्रमुख डेयरी ब्रांड है, उसके उत्पादों की उपलब्धता बढ़ाने और बिक्री को मज़बूत करने पर भी सरकार का विशेष ध्यान है।
बीमार पशुओं के लिए शुरू हुई नई सेवा
कार्यक्रम में बीमार और घायल बड़े पशुओं के लिए विशेष पशु उठाव वाहन की भी शुरुआत की गई। इस वाहन में ऑटोमैटिक लिफ्ट लगी है, जिससे गाय, भैंस जैसे भारी पशुओं को बिना अधिक परेशानी के वाहन में चढ़ाकर पशु अस्पताल तक पहुँचाया जा सकेगा। फिलहाल यह सुविधा टोल-फ्री नंबर के माध्यम से राज्य के आठ प्रमंडलों में शुरू की गई है। सरकार का कहना है कि आने वाले समय में इसे पूरे बिहार के सभी जिलों तक पहुँचाया जाएगा।
दूध उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य
सम्राट चौधरी ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में राज्य में 2,000 से अधिक नई दुग्ध उत्पादन समितियाँ बनाई गई हैं। इससे प्रतिदिन करीब तीन लाख लीटर दूध उत्पादन बढ़ा है। सरकार अब राज्य में प्रतिदिन एक करोड़ लीटर दूध उत्पादन का लक्ष्य लेकर काम कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरह गुजरात का अमूल देश और विदेश में अपनी पहचान बना चुका है, उसी तरह बिहार के डेयरी ब्रांड सुधा को भी अंतरराष्ट्रीय बाज़ार तक पहुँचाने की तैयारी की जा रही है। दूध के अलावा आइसक्रीम, पेड़ा और अन्य दुग्ध उत्पादों की बिक्री बढ़ाने की भी योजना है।
हर प्रखंड में खुलेगा सुधा बिक्री केंद्र
सरकार ने राज्य के सभी प्रखंडों में सुधा के बिक्री केंद्र खोलने की दिशा में भी काम तेज़ कर दिया है। इसके लिए ज़मीन उपलब्ध करा दी गई है और जल्द ही 88 स्थानों पर लगभग 200 नए बिक्री केंद्र शुरू किए जाएंगे। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे हाट विकसित करने की योजना है, जहाँ एक ही जगह पर दूध, सब्ज़ी और मछली जैसे उत्पादों की बिक्री हो सके। सरकार का मानना है कि इससे किसानों और पशुपालकों को अपने उत्पाद बेचने के लिए बेहतर बाज़ार मिलेगा।
महिलाओं की आय बढ़ाने पर ज़ोर
सरकार बकरी पालन को भी ग्रामीण आजीविका का मज़बूत साधन बनाने की तैयारी कर रही है। ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं और जीविका समूहों के लिए बकरी पालन किसी "एटीएम" से कम नहीं है, क्योंकि ज़रूरत पड़ने पर इससे तुरंत आय प्राप्त की जा सकती है। राज्य के पहाड़ी, जनजातीय और सीमावर्ती इलाकों में बकरी पालन को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही, भविष्य में बकरी पालकों और बकरी के दूध के लिए अलग फेडरेशन बनाने की भी घोषणा की गई है, ताकि उत्पादकों को बेहतर बाज़ार और उचित मूल्य मिल सके।
शिक्षा और पशु स्वास्थ्य पर भी ध्यान
कार्यक्रम में यह भी जानकारी दी गई कि राज्य के ब्लॉक स्तर पर पशुओं की दवाइयों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए 1,000 से अधिक नए केंद्र खोले जाएंगे। वहीं, शिक्षा के क्षेत्र में भी सभी प्रखंडों में मॉडल स्कूल विकसित किए जा रहे हैं। इन स्कूलों में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए ऑनलाइन लाइव कक्षाओं की सुविधा दी जाएगी। जिन प्रखंडों में डिग्री कॉलेज नहीं हैं, वहाँ नए कॉलेज खोलने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। सरकार का कहना है कि डेयरी, पशुपालन, शिक्षा और ग्रामीण विकास से जुड़े इन प्रयासों का उद्देश्य किसानों और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने के साथ-साथ गाँवों में रोज़गार के नए अवसर तैयार करना है।