खरीफ सीजन से पहले चिंता, देश के बड़े जलाशयों में जल भंडारण घटा, 166 प्रमुख जलाशयों में सिर्फ 28% पानी बचा

Gaon Connection | Jun 13, 2026, 13:38 IST
मानसून की धीमी शुरुआत और जून के पहले 11 दिनों में देश के अधिकांश हिस्सों में कम बारिश का असर प्रमुख जलाशयों के जल स्तर पर दिखने लगा है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार 166 प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण कुल क्षमता के केवल 28 प्रतिशत पर है। दक्षिण भारत के कई राज्यों में स्थिति अधिक चिंताजनक बनी हुई है, हालांकि आने वाले दिनों में मानसून की सक्रियता बढ़ने से सुधार की उम्मीद है।
बारिश की कमी से बढ़ा जल संकट का खतरा

खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ किसानों और नीति निर्माताओं की निगाहें मानसून और जलाशयों के जल स्तर पर टिकी रहती हैं। अच्छी बारिश न केवल फसलों के लिए जरूरी होती है, बल्कि सिंचाई और पेयजल जरूरतों को पूरा करने में भी अहम भूमिका निभाती है। हालांकि इस बार मानसून की शुरुआती चाल अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही है।



जून के पहले 11 दिनों में देश के बड़े हिस्से में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। इसका असर अब प्रमुख जलाशयों के जल भंडारण पर भी दिखने लगा है। दक्षिण और पूर्वी भारत के कई राज्यों में जल स्तर चिंताजनक रूप से कम बना हुआ है, जिससे आने वाले दिनों में कृषि क्षेत्र की चुनौतियां बढ़ सकती हैं।



केवल एक-चौथाई जलाशय ही आधे से अधिक भरे

केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक देश के 166 प्रमुख जलाशयों में कुल 51.917 अरब घन मीटर (बीसीएम) पानी उपलब्ध है, जो उनकी 183.565 बीसीएम क्षमता का केवल 28 प्रतिशत है। आंकड़ों के अनुसार देश में केवल एक-चौथाई जलाशय ही आधे से अधिक भरे हुए हैं, जबकि कोई भी जलाशय 90 प्रतिशत क्षमता तक नहीं पहुंच पाया है। हालांकि मौजूदा भंडारण पिछले 10 वर्षों के औसत से अधिक है, लेकिन यह पिछले वर्ष की समान अवधि के स्तर से नीचे बना हुआ है।



दो-तिहाई हिस्सों में कम बारिश का असर

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार 1 से 11 जून के बीच देश के करीब दो-तिहाई हिस्सों में सामान्य से कम या बिल्कुल बारिश नहीं हुई। मानसून के 4 जून को केरल पहुंचने और कुछ क्षेत्रों में सक्रिय रहने के बावजूद वर्षा का असमान वितरण जलाशयों के भराव को प्रभावित कर रहा है।



दक्षिण भारत में स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक

दक्षिणी क्षेत्र के 47 जलाशयों में कुल जल भंडारण उनकी क्षमता के केवल 21 प्रतिशत पर है। तेलंगाना और कर्नाटक में स्थिति सबसे अधिक चिंता का विषय है, जहां जलाशयों में जल स्तर क्रमशः 15.5 प्रतिशत और 14 प्रतिशत पर सिमट गया है। वहीं आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में जल स्तर 33-34 प्रतिशत के आसपास है, जबकि केरल में यह 22 प्रतिशत दर्ज किया गया है।



पूर्वी और पश्चिमी राज्यों में भी दबाव

पूर्वी भारत के जलाशयों में जल भंडारण कुल क्षमता के 22 प्रतिशत पर है। असम को छोड़ दें तो पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार और झारखंड में जल स्तर अपेक्षाकृत कम बना हुआ है। दूसरी ओर महाराष्ट्र के जलाशयों में जल स्तर घटकर 21 प्रतिशत रह गया है, जबकि गुजरात में यह 40 प्रतिशत और गोवा में 28 प्रतिशत है।



अगले दो सप्ताह अहम

मध्य भारत के जलाशयों में स्थिति कुछ बेहतर है, जहां छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में जल भंडारण अपेक्षाकृत ऊंचा बना हुआ है। इस बीच मौसम विभाग ने पश्चिमी तट पर मानसून के फिर सक्रिय होने का अनुमान जताया है। यदि अगले दो सप्ताह में अच्छी बारिश होती है तो जलाशयों के जल स्तर में सुधार आ सकता है और खरीफ सीजन के लिए राहत मिल सकती है।

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