Cotton Import: कच्चे कपास पर आयात शुल्क को एक तय समय के लिए हटाने या कम करने की मांग, टेक्सटाइल उद्योग ने मांगी सरकारी राहत

Preeti Nahar | May 01, 2026, 10:41 IST
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भारत सरकार टेक्सटाइल उद्योग को राहत देने के लिए कपास पर आयात शुल्क हटाने या घटाने पर विचार कर रही है। बढ़ती लागत और सप्लाई संकट के बीच यह कदम उद्योग के लिए फायदेमंद हो सकता है, हालांकि किसानों पर इसके असर को लेकर चिंताएं भी बनी हुई हैं। अंतिम फैसला जल्द आने की उम्मीद है।
<p> कच्चे कपास पर आयात शुल्क को एक तय समय के लिए हटाने या कम करने की मांग</p>

Cotton Import Duty India 2026: भारत में टेक्सटाइल उद्योग को कच्चे माल की बढ़ती लागत से राहत देने के लिए सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। टेक्सटाइल मंत्रालय ने कच्चे कपास (Cotton) पर लगने वाले आयात शुल्क को कम करने या पूरी तरह हटाने का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य उद्योग की लागत कम करना, उत्पादन को बढ़ावा देना और निर्यात प्रतिस्पर्धा को मजबूत करना है।



क्या है सरकार का प्रस्ताव?

सरकार वर्तमान में कच्चे कपास पर लगने वाले आयात शुल्क (लगभग 5% से 11% तक) को घटाने या हटाने पर विचार कर रही है। यह फैसला टेक्सटाइल मंत्रालय, कृषि मंत्रालय और वित्त मंत्रालय (राजस्व विभाग) के बीच चर्चा के बाद लिया जाएगा। हालांकि यह कदम अस्थायी भी हो सकता है, खासकर तब जब उद्योग “लीन सीजन” (कम उत्पादन अवधि) से गुजर रहा हो।



क्यों जरूरी हुआ यह फैसला?

पिछले कुछ समय से कपास की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी देखी गई है, जिससे टेक्सटाइल कंपनियों की लागत बढ़ गई है। उद्योग संगठनों का कहना है कि 11% आयात शुल्क लागत को और बढ़ा रहा है, जिससे घरेलू कंपनियों पर दबाव बन रहा है। इसी कारण से बढ़ती लागत और सीमित सप्लाई के बीच टेक्सटाइल उद्योग की निर्भरता अब सरकारी कपास बिक्री पर बढ़ती जा रही है।



Apparel Export Promotion Council ने इस स्थिति को लेकर वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman को पत्र लिखकर तत्काल राहत की मांग की है। परिषद के अनुसार, वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन में बाधाओं के कारण कपास की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। खासकर उत्तर भारत में कपास की उपलब्धता घटने से स्थिति और गंभीर हो गई है। जिनिंग यूनिट्स के पास सीमित स्टॉक बचा है, जिसके चलते टेक्सटाइल मिलों को मजबूरन Cotton Corporation of Indiaद्वारा आयोजित नीलामी पर अधिक निर्भर होना पड़ रहा है। इससे कच्चे माल की लागत बढ़ रही है और उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर भी दबाव बन रहा है।



टेक्सटाइल उद्योग पर क्या होगा असर

यदि आयात शुल्क घटाया या हटाया जाता है, तो:



  1. कच्चे माल की लागत कम होगी
  2. यार्न, फैब्रिक और गारमेंट की कीमतों पर दबाव घटेगा
  3. निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी
  4. उद्योग की लाभप्रदता (profitability) सुधरेगी

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत के टेक्सटाइल निर्यात को भी मजबूती मिलेगी, जो हाल के समय में कमजोर मांग के कारण दबाव में रहा है।



किसानों के लिए चिंता भी

हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर कुछ चिंताएं भी सामने आई हैं जैसे - सस्ते आयात से घरेलू कपास की कीमतें गिर सकती हैं, किसानों को कम दाम मिल सकते हैं, कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) पर भी असर पड़ सकता है, इसलिए सरकार संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है ताकि उद्योग और किसानों दोनों के हित सुरक्षित रहें।



अन्य कच्चे माल पर भी राहत की तैयारी

सरकार सिर्फ कपास ही नहीं, बल्कि rayon-grade wood pulp (विस्कोस फाइबर के लिए कच्चा माल) पर 2.5% आयात शुल्क हटाने पर भी विचार कर रही है। इससे मैन-मेड फाइबर उद्योग को भी फायदा मिलेगा।



आगे क्या होगा?

सरकार की तरफ से जल्द ही अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो यह टेक्सटाइल सेक्टर के लिए बड़ा राहत पैकेज साबित हो सकता है। साथ ही, यह भारत को वैश्विक टेक्सटाइल बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद करेगा।

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