जून में बारिश की कमी से बुआई प्रभावित, जुलाई में अच्छी वर्षा से बढ़ीं उम्मीदें, शिवराज सिंह बोले- अगस्त मध्य तक सुधर सकते हैं आँकड़े
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खरीफ़ फसलों की बुआई में आई कमी के बावजूद हालात में सुधार की उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि खरीफ़ फसलों की बुआई का काम अगस्त के मध्य तक चलता है, इसलिए अभी पर्याप्त समय बाकी है और मौजूदा कमी की भरपाई होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि जून में कम बारिश के कारण बुआई प्रभावित हुई थी, लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह में अच्छी वर्षा हुई है और 20 जुलाई के बाद भी अच्छी बारिश की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में खरीफ़ बुआई का रकबा बढ़ सकता है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के एक कार्यक्रम के इतर पत्रकारों से बातचीत में चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार बारिश की स्थिति और खरीफ़ बुआई की प्रगति पर लगातार नज़र बनाए हुए है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसानों को समय पर बीज, उर्वरक और अन्य आवश्यक कृषि आदान उपलब्ध कराए जाएँगे, ताकि बुआई में किसी तरह की बाधा न आए। मंत्री ने कहा कि सरकार का पूरा प्रयास है कि मौजूदा बुआई घाटे की भरपाई हो और किसान मौसम की अनुकूल परिस्थितियों का पूरा लाभ उठा सकें।
जून में कम बारिश से घटा रकबा, अब जुलाई से बढ़ीं उम्मीदें
सरकारी आँकड़ों के अनुसार 10 जुलाई तक देश में खरीफ़ फसलों की बुआई 531.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई है। यह सामान्य खरीफ़ क्षेत्र 1104.46 लाख हेक्टेयर का लगभग 48 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की समान अवधि में 632.69 लाख हेक्टेयर में बुआई हुई थी। इस तरह इस बार अब तक बुआई का रकबा पिछले साल की तुलना में लगभग 16 प्रतिशत कम है।
चौहान ने कहा कि जून में सामान्य से कम बारिश होने का असर बुआई पर पड़ा, लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह में अच्छी वर्षा हुई है। मौसम विभाग की ओर से 20 जुलाई के बाद भी अच्छी बारिश की संभावना जताई गई है, जिससे खरीफ़ बुआई में तेज़ी आने और रकबे में सुधार की उम्मीद है।
बारिश पर सरकार की नज़र, किसानों को समय पर मिलेंगे बीज और उर्वरक
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार वर्षा की स्थिति और बुआई अभियान की लगातार निगरानी कर रही है। किसानों को समय पर बीज, उर्वरक और अन्य ज़रूरी कृषि सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि बुआई प्रभावित न हो और उत्पादन पर प्रतिकूल असर न पड़े।
देश में 1 जून से अब तक औसत मौसमी वर्षा 227 मिलीमीटर दर्ज की गई है, जो 294.2 मिलीमीटर के दीर्घकालिक औसत (एलपीए) से 23 प्रतिशत कम है। देश के 21 मौसम उप-विभाग, जो कुल भौगोलिक क्षेत्र के लगभग 56 प्रतिशत हिस्से को कवर करते हैं, अब भी वर्षा की कमी वाले क्षेत्र बने हुए हैं। इन इलाक़ों में सामान्य से 20 प्रतिशत या उससे अधिक कम बारिश दर्ज की गई है। ऐसे में सरकार को उम्मीद है कि जुलाई के दूसरे पखवाड़े में यदि अच्छी बारिश होती है तो खरीफ़ बुआई के साथ-साथ फसलों की स्थिति में भी सुधार आएगा।