खरीफ सीज़न में डिजिटल क्रॉप सर्वे का दायरा बढ़ाएगी सरकार, 45 करोड़ खेतों का होगा सर्वे; रिमोट सेंसिंग से फसलों के डेटा का सत्यापन
देश में कृषि क्षेत्र को डिजिटल बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। किसानों की फसलों का सटीक रिकॉर्ड तैयार करने, उत्पादन का समय पर आकलन करने और सरकारी योजनाओं का लाभ सही पात्रों तक पहुँचाने के उद्देश्य से डिजिटल क्रॉप सर्वे (DCS) का दायरा मौजूदा खरीफ सीज़न में काफ़ी बढ़ाया जा रहा है। सरकार का मानना है कि डिजिटल तकनीक के माध्यम से खेती से जुड़ी जानकारी अधिक पारदर्शी होगी और नीतिगत निर्णय भी वास्तविक आँकड़ों के आधार पर लिए जा सकेंगे।
इसी कड़ी में किसान आईडी (Farmer ID) बनाने का काम भी तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। अब तक 20 राज्यों में 10.15 करोड़ किसान आईडी तैयार की जा चुकी हैं। सरकार का कहना है कि भविष्य में इन्हीं डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर किसानों को फसल चयन, वैज्ञानिक खेती और सरकारी योजनाओं से जुड़ी व्यक्तिगत सलाह भी उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही, सर्वे से प्राप्त आँकड़ों का रिमोट सेंसिंग तकनीक के माध्यम से सत्यापन भी किया जाएगा, ताकि डेटा की शुद्धता सुनिश्चित हो सके।
खरीफ सीज़न में 45 करोड़ खेतों का होगा डिजिटल सर्वे
केंद्र सरकार ने पिछले रबी सीज़न में डिजिटल क्रॉप सर्वे के तहत 4.41 लाख गाँवों के 31.3 करोड़ खेतों का सर्वे किया था। अब खरीफ 2026 सीज़न में इसका दायरा बढ़ाकर 5.53 लाख गाँवों के 45 करोड़ खेतों तक ले जाने की योजना बनाई गई है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में डिजिटल क्रॉप सर्वे से फसल क्षेत्र के आधार पर लगभग वास्तविक समय में उत्पादन का आकलन संभव हुआ। इसी अनुभव को देखते हुए अब इस व्यवस्था का विस्तार अधिक राज्यों और गाँवों तक किया जा रहा है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि डिजिटल क्रॉप सर्वे से प्राप्त आँकड़ों का रिमोट सेंसिंग आधारित फसल क्षेत्र आकलन के ज़रिए मिलान किया जा रहा है, ताकि सर्वे की विश्वसनीयता और सटीकता बनी रहे।
फार्मर आईडी बनाने का लक्ष्य 87% पूरा
डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत मार्च 2027 तक 11.62 करोड़ किसान आईडी बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें से अब तक 10.15 करोड़ किसान आईडी तैयार हो चुकी हैं, यानी लगभग 87 प्रतिशत लक्ष्य पूरा किया जा चुका है। सरकारी जानकारी के अनुसार, यह लक्ष्य प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) के लाभार्थियों की संख्या के आधार पर तय किया गया था, जबकि वास्तविक किसानों की संख्या इससे अधिक हो सकती है।
तेलंगाना ने अपने निर्धारित लक्ष्य से लगभग 25 प्रतिशत अधिक किसान आईडी तैयार की हैं। राज्य में 39.77 लाख के लक्ष्य के मुकाबले 49.69 लाख किसान आईडी बनाई जा चुकी हैं। इसी तरह मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक ने भी अपने-अपने निर्धारित लक्ष्य से अधिक किसान आईडी तैयार कर ली हैं।
कुछ राज्यों में काम जारी, MSP खरीद और कृषि सलाह में भी होगा उपयोग
पश्चिम बंगाल में केंद्र सरकार और राज्य के बीच समझौता (MoU) होने के बाद किसान आईडी बनाने का कार्य शुरू हो गया है, जबकि झारखंड में यह प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है। जम्मू-कश्मीर, गोवा और सिक्किम में भूमि अभिलेखों को व्यवस्थित किया जा रहा है, ताकि किसान आईडी बनाने का काम शुरू किया जा सके।
सरकार ने यह भी बताया कि जिन राज्यों में भूमि रिकॉर्ड की औपचारिक व्यवस्था उपलब्ध नहीं है, जैसे अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और असम के कुछ हिस्से, वहाँ उपग्रह आधारित वैकल्पिक व्यवस्था विकसित की गई है। मेघालय के एक ज़िले में भूमि मानचित्रण और किसान आईडी तैयार करने के लिए पायलट परियोजना भी चलाई जा रही है। इसके अलावा कुछ राज्य बटाईदारों, किरायेदार किसानों और मंदिर की भूमि पर खेती करने वाले कृषकों को भी किसान आईडी व्यवस्था में शामिल करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार कर रहे हैं। कृषि मंत्रालय की एग्री स्टैक परियोजना को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार में गोल्ड अवॉर्ड भी मिला है।
सरकार के अनुसार, किसान आईडी से तैयार होने वाले डिजिटल डेटा का उपयोग न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसल खरीद व्यवस्था में भी किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में 27 लाख किसानों के सत्यापित आँकड़ों के आधार पर धान खरीद में लगभग ₹5,000 करोड़ की बचत हुई है। वहीं पिछले रबी सीज़न के डिजिटल क्रॉप सर्वे के आँकड़ों का उपयोग उत्तर प्रदेश में गेहूँ खरीद और ओडिशा में धान खरीद के दौरान भी किया गया।