गाँवों की गलियों का बनेगा डिजिटल रिकॉर्ड, QR और DIGIPIN से जुड़ेगा पूरा नेटवर्क, सरकार ला रही ‘इन्ट्रा-विलेज रोड कोडिंग सिस्टम’

Gaon Connection | Jun 19, 2026, 14:54 IST
केंद्र सरकार ग्रामीण भारत में पहली बार "इन्ट्रा-विलेज रोड कोडिंग एंड ग्रेडिंग सिस्टम" लागू करने की तैयारी कर रही है। इसके तहत गाँवों की हर सड़क और गली को यूनिक कोड, क्यूआर कोड और डिजिटल पहचान दी जाएगी। इससे एम्बुलेंस, पुलिस, डाक, कुरियर और डिजिटल मैपिंग सेवाओं को गाँवों में सटीक लोकेशन तक पहुँचने में आसानी होगी तथा ग्रामीण प्रशासन अधिक प्रभावी बनेगा।

ग्रामीण भारत में पते, लोकेशन और नेविगेशन से जुड़ी वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान अब डिजिटल तकनीक के ज़रिये किया जा सकता है। केंद्र सरकार देश में पहली बार ऐसी व्यवस्था लाने की तैयारी कर रही है जिसके तहत गाँवों के भीतर की हर सड़क, गली और संपर्क मार्ग को एक यूनिक डिजिटल पहचान दी जाएगी। इससे एम्बुलेंस, पुलिस, फायर ब्रिगेड, डाक विभाग, कुरियर कंपनियों और ऑनलाइन मैपिंग सेवाओं को गाँव के किसी भी घर या स्थान तक पहुँचने में आसानी होगी।



पंचायती राज मंत्रालय ने इसके लिए "इन्ट्रा-विलेज रोड कोडिंग एंड ग्रेडिंग सिस्टम" का मसौदा तैयार किया है। प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने के बाद गाँव की प्रत्येक सड़क का एक निर्धारित नाम, यूनिक कोड, डिजिटल लोकेशन और क्यूआर (QR) कोड आधारित पहचान होगी। यह पहल ग्रामीण भारत में डिजिटल एड्रेसिंग की दिशा में एक ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकती है जिससे प्रशासन, आपदा प्रबंधन और सार्वजनिक सेवाओं की पहुँच अधिक प्रभावी बनेगी।



क्यों पड़ी नई व्यवस्था की ज़रूरत?

देशभर में सरकारी योजनाओं के तहत ग्रामीण सड़कों का बड़ा नेटवर्क विकसित किया गया है, लेकिन गाँवों के भीतर की गलियों और संपर्क मार्गों का अब तक व्यवस्थित दस्तावेज़ीकरण नहीं हो पाया है। अलग-अलग विभाग अलग-अलग नामों और स्थानीय पहचान के आधार पर रिकॉर्ड तैयार करते हैं, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा होती है। कई बार एक ही सड़क अलग-अलग सरकारी अभिलेखों में अलग-अलग नामों से दर्ज मिलती है। इसका असर योजना निर्माण, रखरखाव, निगरानी और सार्वजनिक सेवाओं की डिलीवरी पर पड़ता है। आपातकालीन परिस्थितियों में एम्बुलेंस, पुलिस या अग्निशमन सेवाओं को सही स्थान तक पहुँचने में भी समय लग जाता है।



पहली बार बनेगा गाँवों की गलियों का राष्ट्रीय डिजिटल रिकॉर्ड

अब तक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत गाँवों तक पहुँचने वाली सड़कों का रिकॉर्ड तो उपलब्ध है, लेकिन गाँव के भीतर की सड़कें किसी एकीकृत राष्ट्रीय डेटाबेस का हिस्सा नहीं हैं। नई व्यवस्था के तहत पहली बार गाँवों की पूरी सड़क व्यवस्था का डिजिटल मानचित्र तैयार किया जाएगा। इससे प्रत्येक सड़क की पहचान, स्थिति और रखरखाव संबंधी जानकारी एक ही मंच पर उपलब्ध होगी।



हर सड़क को मिलेगा यूनिक कोड

प्रस्तावित प्रणाली में प्रत्येक सड़क को उसके प्रकार, राज्य, ज़िले और गाँव के आधार पर एक विशेष अल्फ़ान्यूमेरिक कोड दिया जाएगा। यह कोड प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, स्थानीय शासन निर्देशिका (LGD), DIGIPIN और ग्राम मानचित्र प्लेटफ़ॉर्म से जुड़ा होगा। इससे देशभर में किसी भी सड़क की पहचान एक समान होगी और दो अलग-अलग सड़कों को एक जैसा कोड नहीं दिया जा सकेगा।



तीन श्रेणियों में बाँटी जाएँगी सड़कें

प्रस्ताव के अनुसार गाँवों की आंतरिक सड़कों को तीन प्रमुख श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा



  • मुख्य सड़क (Main Road): गाँव को जोड़ने वाली प्रमुख सड़क
  • क्रॉस रोड (Cross Road): मुख्य सड़क को काटने वाली सड़क
  • अन्य/संपर्क मार्ग (Other Road): मुख्य सड़क से निकलने वाली छोटी सड़कें और गलियाँ

इस वर्गीकरण से गाँव की सड़क व्यवस्था को समझना, प्रबंधित करना और डिजिटल रूप से दर्ज करना आसान होगा।



क्यूआर कोड स्कैन करते ही मिलेगी पूरी जानकारी

प्रत्येक सड़क पर स्थानीय भाषा और अंग्रेज़ी में द्विभाषी साइनबोर्ड लगाए जाएँगे। इन साइनबोर्ड पर क्यूआर कोड होगा, जिसे स्कैन करने पर सड़क की डिजिटल पहचान, लोकेशन, रखरखाव और नेविगेशन संबंधी जानकारी प्राप्त की जा सकेगी। इससे आम नागरिकों के साथ-साथ सरकारी एजेंसियों को भी वास्तविक समय में जानकारी उपलब्ध होगी।



DIGIPIN और ग्राम मानचित्र से जुड़ेगा पूरा नेटवर्क

प्रत्येक सड़क को DIGIPIN के माध्यम से सटीक भू-स्थानिक निर्देशांकों (Geospatial Coordinates) से जोड़ा जाएगा। वहीं ग्राम मानचित्र इस पूरी व्यवस्था का केंद्रीय डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म होगा। यह प्लेटफ़ॉर्म पीएम गतिशक्ति, भुवन (Bhuvan) और अन्य सरकारी डिजिटल प्रणालियों से भी एकीकृत रहेगा, जिससे विभिन्न विभागों के बीच डेटा साझा करना आसान होगा।



ग्राम पंचायतों को मिलेगी अहम ज़िम्मेदारी

सड़कों की पहचान, नामकरण और कोडिंग का प्राथमिक दायित्व ग्राम पंचायतों को दिया जाएगा। ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) के साथ हर वर्ष इनका पुनरीक्षण किया जाएगा और स्थानीय समितियाँ नए मार्गों या बदलावों का सत्यापन करेंगी। सरकार का मानना है कि स्थानीय स्तर पर सहभागिता से इस व्यवस्था की सटीकता और प्रभावशीलता बढ़ेगी।



ग्रामीण जीवन में आएगा बड़ा बदलाव

विशेषज्ञों के अनुसार इस पहल से आपातकालीन सेवाओं की पहुँच तेज़ होगी, डाक और ई-कॉमर्स कंपनियों की अंतिम छोर तक डिलीवरी आसान बनेगी तथा सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी। इसके अलावा सरकारी योजनाओं की निगरानी अधिक प्रभावी होगी और पहली बार डिजिटल मैपिंग सेवाएँ गाँवों की छोटी गलियों तक सटीक नेविगेशन उपलब्ध करा सकेंगी। दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों को भी समान डिजिटल पहचान मिलने का रास्ता खुलेगा।



सुझावों के बाद बनेगी अंतिम नीति

पंचायती राज मंत्रालय इस मसौदे पर नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, ग्राम पंचायतों, तकनीकी विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से सुझाव आमंत्रित करेगा। प्राप्त सुझावों के आधार पर अंतिम नीति तैयार की जाएगी। यदि यह पहल लागू होती है, तो भारत पहली बार गाँव की हर सड़क और गली को एक डिजिटल पहचान देगा, जिससे ग्रामीण प्रशासन, सार्वजनिक सेवाओं और डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में एक नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है।

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