Digital India: 2.45 लाख से ज्यादा पंचायतों ने किया 57 हजार करोड़ रुपये का डिजिटल भुगतान, जानिए पूरा अपडेट
गाँवों में पंचायत से जुड़े कामकाज को आसान, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए सरकार अब डिजिटल व्यवस्था को और मजबूत कर रही है। पंचायतों की योजना बनाने से लेकर पैसों के प्रबंधन, खरीदारी, भुगतान और ग्राम सभा की बैठकों तक कई प्रक्रियाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा रहा है। इसका मक़सद यह है कि पंचायतों के काम का रिकॉर्ड व्यवस्थित रहे और ज़रूरी जानकारी की निगरानी भी आसानी से की जा सके।
इस दिशा में पंचायती राज मंत्रालय राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के तहत ई-पंचायत मिशन मोड परियोजना लागू कर रहा है। इसी व्यवस्था के तहत ई-ग्राम स्वराज को अलग-अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है। केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ़ ललन सिंह ने राज्यसभा में लिखित जवाब में बताया कि इन पहलों के ज़रिए पंचायतों के कामकाज में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाया जा रहा है। खास बात यह है कि अब ग्राम सभा की बैठकों का सारांश तैयार करने से लेकर पंचायतों के भुगतान तक कई काम डिजिटल तरीके से किए जा रहे हैं।
ई-ग्राम स्वराज से पंचायतों के कई काम एक ही डिजिटल व्यवस्था में
ई-ग्राम स्वराज को कई सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है, ताकि पंचायतों को अलग-अलग काम के लिए अलग व्यवस्था पर निर्भर न रहना पड़े। सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली के साथ इसके एकीकरण से पंचायतों के लिए निधि प्रबंधन, लेखांकन और विक्रेताओं तथा लाभार्थियों को डिजिटल भुगतान करना आसान हुआ है। इसी तरह सरकारी ई-मार्केटप्लेस के ज़रिए पंचायतों को ज़रूरी सामान और सेवाओं की खरीद में पारदर्शिता लाने में मदद मिलती है। बीएसएनएल के साथ एकीकरण से पंचायतें ई-ग्राम स्वराज के माध्यम से नए इंटरनेट कनेक्शन के लिए आवेदन करने और भारतनेट कनेक्शन से जुड़े बिलों का भुगतान कर सकती हैं।
पंचायतों के लिए स्थानीय स्तर पर मौसम की जानकारी भी महत्वपूर्ण होती है। इसी वजह से भारत मौसम विज्ञान विभाग से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे स्थानीय नियोजन और निर्णय लेने में मदद मिल सके। वहीं, भाषिणी के माध्यम से बहुभाषी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित भाषा अनुवाद तथा आवाज़ आधारित सुविधाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है।
‘सभासार’ से ग्राम सभा की बैठकों का रिकॉर्ड तैयार करना आसान
पंचायतों में केवल वित्तीय कामकाज ही डिजिटल नहीं किया जा रहा, बल्कि ग्राम सभा की बैठकों को भी तकनीक से जोड़ा गया है। पंचायती राज मंत्रालय ने ‘सभासार’ नाम का एआई आधारित उपकरण शुरू किया है। यह बैठक में हुई बातचीत को आवाज़ से लिखित रूप में बदलने और उसका व्यवस्थित सारांश तैयार करने में मदद करता है। इससे ग्राम सभा की बैठक में क्या चर्चा हुई, कौन-से निर्णय लिए गए और लोगों की भागीदारी कैसी रही, जैसी जानकारी को व्यवस्थित तरीके से दर्ज किया जा सकता है। तैयार कार्यवृत्त को पंचायत पदाधिकारियों के पास समीक्षा, सत्यापन और अंतिम स्वीकृति के लिए उपलब्ध कराया जाता है।
‘सभासार’ के ज़रिए निर्धारित समय में होने वाली ग्राम सभाओं की संख्या, उनके प्रकार और लोगों की भागीदारी जैसे पहलुओं की निगरानी भी की जा सकती है। यह सुविधा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए उपलब्ध कराई गई है।
98.65% ग्राम पंचायतों ने जीपीडीपी ऑनलाइन अपलोड की
वित्त वर्ष 2025-26 के आँकड़े बताते हैं कि पंचायतों में डिजिटल व्यवस्था का इस्तेमाल बड़े स्तर पर हो रहा है। देश में कुल 2,58,725 ग्राम पंचायतों और उनके समकक्ष निकायों में से 2,55,251 यानी 98.65% ने अपनी ग्राम पंचायत विकास योजना ई-ग्राम स्वराज पर अपलोड की है। वहीं, 2,45,839 ग्राम पंचायतों और समकक्ष निकायों, यानी करीब 95% ने ई-ग्राम स्वराज और सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली के एकीकृत माध्यम से करीब 57,337 करोड़ रुपये का भुगतान किया। इससे पता चलता है कि पंचायतों के वित्तीय कामकाज में डिजिटल व्यवस्था का इस्तेमाल काफी व्यापक हो चुका है।
इसके अलावा, 1,35,956 ग्राम पंचायतों और समकक्ष निकायों ने ग्राम सभा की बैठकों का स्वचालित सारांश तैयार करने के लिए ‘सभासार’ का इस्तेमाल किया। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 3,57,020 से अधिक बैठकों के कार्यवृत्त की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है।
डिजिटल पंचायतों से निगरानी और जवाबदेही को मिलेगी मजबूती
इन पहलों का बड़ा उद्देश्य पंचायतों के कामकाज को केवल ऑनलाइन करना नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और जवाबदेह बनाना है। डिजिटल रिकॉर्ड और वास्तविक समय में निगरानी से योजनाओं, खर्च और पंचायत की गतिविधियों पर नज़र रखना आसान हो सकता है। डैशबोर्ड और रिपोर्ट के ज़रिए उपलब्ध आँकड़ों का इस्तेमाल बेहतर निर्णय लेने में भी किया जा सकता है। इस व्यवस्था से मैनुअल काम और रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया कम करने के साथ पंचायतों की योजना, लेखांकन, निगरानी और काम के क्रियान्वयन को एक ही डिजिटल ढाँचे में लाने की कोशिश की जा रही है। यानी गाँव की सरकार से जुड़े काम अब धीरे-धीरे कागज़ी फाइलों से आगे बढ़कर डिजिटल रिकॉर्ड और ऑनलाइन निगरानी की ओर जा रहे हैं।
अगर इस व्यवस्था का इस्तेमाल सही तरीके से और लगातार किया जाता है, तो पंचायतों के कामकाज में पारदर्शिता बढ़ने के साथ आम लोगों के लिए यह समझना भी आसान हो सकता है कि उनके गाँव में कौन-सी योजना चल रही है, कितना पैसा खर्च हुआ और ग्राम सभा में क्या निर्णय लिए गए। यही डिजिटल पंचायत व्यवस्था का सबसे अहम मक़सद माना जा सकता है।