UP में पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा, वाराणसी में जल्द शुरू होगा सोवा रिग्पा और सिद्ध कोर्स
Yogi Adityanath के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार आयुष पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रदेश के आयुष कॉलेजों में 2500 साल पुरानी पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली सोवा रिग्पा (अमची) और सिद्ध पद्धति के कोर्स शुरू किए जाएंगे। इससे न सिर्फ पारंपरिक चिकित्सा को नई पहचान मिलेगी, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा भी बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
Sowa Rigpa course launch in Uttar Pradesh: लखनऊ में 30 अप्रैल को हुई घोषणा के अनुसार, Uttar Pradesh सरकार आयुष क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल करने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश के आयुष कॉलेजों में सोवा रिग्पा और सिद्ध चिकित्सा पद्धति की पढ़ाई शुरू करने की तैयारी तेज कर दी गई है। यह पहल पारंपरिक चिकित्सा को मुख्यधारा में लाने और लोगों को वैकल्पिक उपचार विकल्प उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
आयुष पद्धतियों को मिलेगा नया विस्तार
योगी सरकार का उद्देश्य आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी के साथ-साथ सोवा रिग्पा को भी मुख्यधारा में शामिल करना है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा बढ़ेगा और खासतौर पर कैंसर, जोड़ों के दर्द, मानसिक रोग और अन्य दीर्घकालिक बीमारियों के इलाज में पूरक उपचार की सुविधा मिलेगी।
कोर्स शुरू करने की तैयारी, चिकित्सकों का होगा पंजीकरण
प्रमुख सचिव आयुष रंजन कुमार के अनुसार, सोवा रिग्पा और सिद्ध पद्धति के डिग्री कोर्स शुरू करने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। इसके लिए आवश्यक पाठ्यक्रम, मानक और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है। सरकार ने इसे हरी झंडी दे दी है और जल्द ही चयनित आयुष कॉलेजों में पढ़ाई शुरू होगी। इन कोर्सों से प्रशिक्षित चिकित्सकों का पंजीकरण किया जाएगा, जिससे वे अधिकृत रूप से अपने क्लीनिक चला सकेंगे।
वाराणसी बनेगा सोवा रिग्पा का प्रमुख केंद्र
Varanasi में सोवा रिग्पा का एक प्रमुख केंद्र विकसित किया जाएगा। यह केंद्र शोध, प्रशिक्षण और उपचार का हब बनेगा, जहां जटिल बीमारियों के इलाज पर विशेष फोकस रहेगा। वाराणसी पहले से ही आयुर्वेद और आध्यात्मिक चिकित्सा का प्रमुख केंद्र रहा है, इसलिए इसे इस परियोजना के लिए चुना गया है।
रोजगार और शोध को मिलेगा बढ़ावा
इन कोर्सों की शुरुआत से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। प्रशिक्षित चिकित्सक अपने क्लीनिक खोल सकेंगे और ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचा सकेंगे। इसके साथ ही, इन पद्धतियों पर शोध को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे इनके वैज्ञानिक आधार को मजबूत किया जा सकेगा।
सोवा रिग्पा: 2500 साल पुरानी चिकित्सा पद्धति
सोवा रिग्पा हिमालयी क्षेत्रों में प्रचलित एक प्राचीन चिकित्सा प्रणाली है, जिसकी उत्पत्ति तिब्बत में मानी जाती है। यह पद्धति शरीर, मन और पर्यावरण के संतुलन पर आधारित है। इसमें जड़ी-बूटियों, खनिजों और प्राकृतिक तत्वों का उपयोग कर उपचार किया जाता है। यह विशेष रूप से गठिया, पाचन विकार, मानसिक तनाव, त्वचा रोग और कैंसर जैसी बीमारियों में उपयोगी मानी जाती है।
सिद्ध पद्धति की विशेषताएं
सिद्ध चिकित्सा प्रणाली मुख्य रूप से दक्षिण भारत में प्रचलित है। यह शरीर के तीन दोष वात, पित्त और कफ के संतुलन पर आधारित है। इसमें औषधियों के साथ-साथ जीवनशैली और आहार पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जिससे रोगों का समग्र उपचार संभव होता है। योगी सरकार की यह पहल पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को नई पहचान देने और उन्हें मुख्यधारा में शामिल करने की दिशा में बड़ा कदम है। इससे न सिर्फ स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत होंगी, बल्कि रोजगार, शोध और वैकल्पिक उपचार के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं खुलेंगी।