Rural Inflation: जुलाई में गाँवों की रसोई पर शहरों से ज़्यादा रही महंगाई की मार, खाने की कीमतों ने बढ़ाई परेशानी; इन चीजों ने बिगाड़ा बजट

Umang | Aug 13, 2026, 12:23 IST
जुलाई 2026 में देश की खुदरा महंगाई बढ़कर 4.45 प्रतिशत हो गई, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह 4.84 प्रतिशत रही। गाँवों में खाद्य महंगाई 5.79 प्रतिशत दर्ज की गई, जिससे घरेलू रसोई पर शहरों के मुकाबले ज्यादा दबाव रहा। अदरक 83.62 प्रतिशत, लहसुन 35.36 प्रतिशत और प्याज़ 22.54 प्रतिशत महंगे हुए। हालांकि आलू, टमाटर, मटर और भिंडी के दाम घटे। RBI ने आगे महंगाई में धीरे-धीरे कमी आने की उम्मीद जताई है।

महीने का राशन खरीदने निकला गांव का एक परिवार जब सब्ज़ी मंडी पहुंचता है तो उसकी नज़र सबसे पहले कीमतों पर जाती है। पहले जहाँ थोड़े पैसों में अदरक, प्याज़ और लहसुन जैसी रोज़मर्रा की चीज़ें घर आ जाती थीं, अब इन्हीं सामानों के दाम जेब का हिसाब बिगाड़ रहे हैं। नतीजा यह है कि महीने के आख़िर तक पैसे बचाने के लिए कई परिवारों को खरीदारी में कटौती, सस्ती सब्ज़ियों का विकल्प या दूसरी ज़रूरतों को कुछ दिनों के लिए टालने जैसे फ़ैसले लेने पड़ सकते हैं। जुलाई 2026 के सरकारी आंकड़े बताते हैं कि देश की खुदरा महंगाई बढ़कर 4.45 प्रतिशत हो गई, लेकिन ग्रामीण इलाक़ों में यह दबाव और ज़्यादा रहा। गाँवों में खुदरा महंगाई 4.84 प्रतिशत और खाद्य महंगाई 5.79 प्रतिशत दर्ज की गई।



महंगाई का यह असर सिर्फ़ आंकड़ों में नहीं है, बल्कि उस परिवार के रोज़मर्रा के बजट में दिखाई देता है जिसकी आमदनी सीमित है और ख़र्च का बड़ा हिस्सा खाने-पीने की चीज़ों पर जाता है। जुलाई में अदरक की कीमतों में सालाना आधार पर 83.62 प्रतिशत, लहसुन में 35.36 प्रतिशत और प्याज़ में 22.54 प्रतिशत की महंगाई दर्ज हुई। यानी रसोई में इस्तेमाल होने वाली इन आम चीज़ों ने घरेलू ख़र्च बढ़ाने का काम किया। हालांकि आलू, टमाटर, मटर और भिंडी के दाम घटने से कुछ राहत भी मिली, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई का 5.79 प्रतिशत पर रहना बताता है कि गांवों के परिवारों पर खाने-पीने की चीज़ों की कीमतों का दबाव अभी भी बड़ा है।



गाँवों की रसोई पर शहरों से ज़्यादा महंगाई की मार

जुलाई के आंकड़ों में ग्रामीण और शहरी परिवारों के ख़र्च का अंतर साफ़ दिखाई देता है। देश की संयुक्त खुदरा महंगाई 4.45 प्रतिशत रही, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में यह 4.84 प्रतिशत तक पहुंच गई। शहरों में खुदरा महंगाई 3.96 प्रतिशत रही। खाने-पीने की चीज़ों में भी गांवों का दबाव अधिक रहा।



महंगाईग्रामीणशहरीकुल
खुदरा महंगाई4.84%3.96%4.45%
खाद्य महंगाई5.79%5.05%5.52%
आवास महंगाई2.80%2.01%2.22%

ग्रामीण परिवारों के लिए खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे महीने के बजट पर पड़ता है। जब रसोई का ख़र्च बढ़ता है तो परिवार को दूसरे ख़र्चों को संभालने के लिए बचत, कपड़े, यात्रा या अन्य घरेलू ज़रूरतों में कटौती करनी पड़ सकती है। जुलाई के आंकड़े इसी बढ़ते दबाव की तस्वीर पेश करते हैं।



अदरक की महंगाई 83% पार, प्याज़-लहसुन ने भी बढ़ाया ख़र्च

रसोई के लिहाज़ से जुलाई में सबसे ज़्यादा झटका अदरक ने दिया। इसकी सालाना महंगाई दर 83.62 प्रतिशत रही, जो जून के 50.41 प्रतिशत से काफ़ी ज़्यादा है। लहसुन की महंगाई 35.36 प्रतिशत और प्याज़ की 22.54 प्रतिशत रही।



वस्तुजून 2026जुलाई 2026
अदरक50.41%83.62%
लहसुन17.93%35.36%
प्याज़4.73%22.54%

इन वस्तुओं की कीमत बढ़ने का असर उन परिवारों पर अधिक महसूस हो सकता है जिनके महीने के ख़र्च में पहले से ही बहुत ज़्यादा गुंजाइश नहीं होती। रोज़मर्रा की ख़रीदारी में छोटी-छोटी कीमतें बढ़ने पर महीने के अंत तक कुल ख़र्च का अंतर बड़ा हो जाता है।



आलू-टमाटर ने संभाला थोड़ा बजट

महंगाई की तस्वीर पूरी तरह एकतरफ़ा नहीं रही। जुलाई में कुछ सब्ज़ियों की कीमतों में गिरावट ने परिवारों को राहत भी दी। आलू की सालाना महंगाई दर माइनस 16.56 प्रतिशत रही। टमाटर की महंगाई भी जून के 31.92 प्रतिशत से गिरकर जुलाई में माइनस 4.59 प्रतिशत हो गई।



भिंडी की महंगाई 5.54 प्रतिशत से घटकर माइनस 5.52 प्रतिशत और मटर की माइनस 9.67 प्रतिशत से माइनस 5.27 प्रतिशत रही। ऐसे में जिन परिवारों ने महंगी अदरक, प्याज़ और लहसुन की जगह सस्ती सब्ज़ियों का इस्तेमाल बढ़ाया, उन्हें रसोई का ख़र्च कुछ हद तक संभालने में मदद मिल सकती है।



रसोई के बाहर भी ख़र्च बढ़ा, आगे राहत की उम्मीद

जुलाई में महंगाई का असर खाने-पीने के अलावा दूसरी सेवाओं पर भी रहा। ट्रांसपोर्ट में महंगाई 4.43 प्रतिशत, माल ढुलाई सेवाओं में 7.77 प्रतिशत और कपड़े-जूतों में 3.38 प्रतिशत रही। रेस्तरां और आवास सेवाओं में महंगाई 7.72 प्रतिशत दर्ज की गई। व्यक्तिगत देखभाल और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी वस्तुओं व सेवाओं में यह दर 14.77 प्रतिशत रही। स्वास्थ्य सेवाओं में 1.34 प्रतिशत और शिक्षा में 3.64 प्रतिशत महंगाई दर्ज हुई।



सरकार के आंकड़ों के मुताबिक़, जून में खुदरा महंगाई 4.38 प्रतिशत थी, जो जुलाई में बढ़कर 4.45 प्रतिशत हो गई। यह लगातार दूसरा महीना है जब महंगाई भारतीय रिज़र्व बैंक के 4 प्रतिशत लक्ष्य से ऊपर रही। RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई का अनुमान 5.1 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किया है और आगे इसमें कमी आने की उम्मीद जताई है।



फ़िलहाल ग्रामीण परिवारों के लिए राहत इस बात पर निर्भर करेगी कि आने वाले महीनों में खाद्य वस्तुओं की कीमतें किस दिशा में जाती हैं क्योंकि महंगाई का असली असर किसी रिपोर्ट के प्रतिशत में नहीं, बल्कि उस घर की रसोई में दिखता है जहां महीने की सीमित कमाई से पूरे परिवार का राशन और बाकी ज़रूरतें पूरी करनी होती हैं।

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