डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन जयंती: जानिए उस वैज्ञानिक की कहानी जिसने भारत को अनाज के संकट से उबारा
भारत की कृषि को नई पहचान देने वाले और देश को खाद्यान्न संकट से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाने वाले महान कृषि वैज्ञानिक डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन की जयंती पर उन्हें पूरे देश में याद किया गया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने उनकी जयंती पर उनके कृषि क्षेत्र में दिए गए योगदान को याद करते हुए कहा कि डॉ. स्वामीनाथन ने 1960 के दशक में हरित क्रांति का नेतृत्व किया। उन्होंने गेहूँ और धान की उच्च उपज देने वाली किस्मों के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे भारत खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बना और देश स्थायी रूप से खाद्यान्न संकट से बाहर निकल सका।
डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन ने भारतीय कृषि को वैज्ञानिक आधार देने के साथ किसानों के लिए नई फसल किस्मों और टिकाऊ कृषि नीतियों की दिशा में भी अहम योगदान दिया। उनके शोध और सुझावों ने भारतीय कृषि को नई दिशा दी और कृषि क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत की। आईसीएआर ने कहा कि उनका योगदान आज भी देश की कृषि नीतियों और अनुसंधान के लिए प्रेरणा बना हुआ है।
हरित क्रांति के जनक के रूप में मिली पहचान
डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन का जन्म 7 अगस्त 1925 को हुआ था। उन्हें भारत में "हरित क्रांति का जनक" कहा जाता है। उन्होंने उच्च उपज देने वाली गेहूँ और धान की किस्मों के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके प्रयासों से देश में कृषि उत्पादन बढ़ा और भारत खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ा।
कृषि अनुसंधान और किसानों के लिए दिया बड़ा योगदान
डॉ. स्वामीनाथन ने अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (आईआरआरआई) और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक के रूप में कृषि अनुसंधान को नई दिशा दी। राष्ट्रीय किसान आयोग के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने किसानों के कल्याण के लिए कई महत्त्वपूर्ण सिफ़ारिशें भी दीं। कृषि एवं खाद्य क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें वर्ष 1987 में पहला विश्व खाद्य पुरस्कार (वर्ल्ड फ़ूड प्राइज़) प्रदान किया गया।
देश-विदेश में मिला सम्मान
डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन को कृषि और समाज के लिए उनके योगदान के लिए कई सम्मान मिले। उन्हें वर्ष 2024 में मरणोपरांत भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान "भारत रत्न" प्रदान किया गया। इसके अलावा उन्हें पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया। उनकी प्रमुख पुस्तकों में "बिल्डिंग अ हंग्री-फ़्री वर्ल्ड" और "फ़्रॉम ग्रीन रिवोल्यूशन टू एवरग्रीन रिवोल्यूशन" शामिल हैं।