ICAR की वैज्ञानिक डॉ. मोनिका पुनिया का 35 वर्ष की आयु में निधन, जानें कैसे उन्होंने जलवायु-अनुकूल दलहन फसलों पर किया उल्लेखनीय शोध

Umang | Aug 07, 2026, 12:01 IST
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मोनिका पुनिया के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने शुष्क क्षेत्रों के लिए जलवायु-अनुकूल दलहन फसलों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। डॉ. पुनिया का शोध परिवर्तनशील जलवायु में दलहनी फसलों को अधिक सहनशील बनाने पर केंद्रित था। उन्होंने रेगिस्तानी इलाकों के लिए बेहतर उत्पादन देने वाली दलहन किस्में विकसित कीं।
आईसीएआर की युवा वैज्ञानिक डॉ. मोनिका पुनिया नहीं रहीं

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने आईसीएआर–भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान (आईआईपीआर), क्षेत्रीय केंद्र, बीकानेर की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मोनिका पुनिया के असामयिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। वर्ष 1991 में जन्मी डॉ. पुनिया का 5 अगस्त 2026 को निधन हो गया। आईसीएआर ने कहा कि उन्होंने शुष्क क्षेत्रों के लिए जलवायु-अनुकूल दलहन फसलों के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया और कृषि अनुसंधान के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को सदैव सम्मान के साथ याद किया जाएगा।



डॉ. मोनिका पुनिया वर्ष 2020 से आईसीएआर से जुड़ी थीं और जेनेटिक्स एवं पादप प्रजनन (Genetics and Plant Breeding) के क्षेत्र में कार्यरत थीं। उनका शोध मुख्य रूप से शुष्क क्षेत्रों में उगाई जाने वाली दलहनी फसलों को जलवायु परिवर्तन, सूखा, गर्मी तथा विभिन्न जैविक एवं अजैविक तनावों के प्रति अधिक सहनशील बनाने पर केंद्रित था। उनके निधन को कृषि अनुसंधान जगत के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है।



शुष्क क्षेत्रों की दलहनी फसलों के सुधार में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

डॉ. पुनिया की विशेषज्ञता शुष्क क्षेत्रों की दलहनी फसलों के प्रजनन (Breeding for Arid Pulses) में थी। उन्होंने रेगिस्तानी और कम वर्षा वाले इलाक़ों के लिए ऐसी दलहन किस्मों के विकास पर कार्य किया, जो कठिन जलवायु परिस्थितियों में भी बेहतर उत्पादन दे सकें। उनकी उपलब्धियों में विभिन्न वृद्धि गुणों वाली उत्कृष्ट मोठ (Moth Bean) जर्मप्लाज़्म की पहचान, जल्दी पकने वाली और अधिक उत्पादन देने वाली मोठ की किस्मों का चयन, अनेक रोगों के प्रति प्रतिरोधी मोठ जर्मप्लाज़्म की पहचान तथा गर्म और शुष्क परिस्थितियों में उच्च उत्पादकता वाली लोबिया (Cowpea) की किस्मों की पहचान शामिल रही।



जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अनुसंधान पर रहा विशेष फोकस

डॉ. मोनिका पुनिया का वर्तमान अनुसंधान शुष्क पारिस्थितिकी तंत्र में जैविक और अजैविक तनावों के प्रति सहनशील दलहनी फसलों के विकास पर केंद्रित था। वे मोठ, लोबिया और ग्वार जैसी प्रमुख फसलों के लिए तनाव-रोधी जीनोटाइप विकसित करने की अनुसंधान परियोजना से जुड़ी थीं। इस दिशा में उन्होंने आधुनिक पादप प्रजनन तकनीकों के माध्यम से ऐसी किस्मों के विकास पर काम किया, जो बदलती जलवायु परिस्थितियों में किसानों के लिए अधिक उपयोगी साबित हो सकें। उनका मानना था कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच दलहनी फसलों की उत्पादकता और स्थिरता बढ़ाना भविष्य की कृषि के लिए आवश्यक है।



शोध, प्रशिक्षण और सम्मान से बनाई अलग पहचान

डॉ. पुनिया ने अपने वैज्ञानिक जीवन में अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लिया। इनमें प्रायोगिक आँकड़ों के विश्लेषण, पौध आनुवंशिक संसाधन प्रबंधन, जीनोमिक्स आधारित फसल सुधार, जलवायु-स्मार्ट दलहन फसलें तथा कृषि में डेटा प्रबंधन और परियोजना लेखन जैसे विषय शामिल रहे। उन्होंने मोठ, मेथी, बाजरा तथा दलहनी फसलों पर कई शोधपत्र प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशित किए। उनके शोध कार्यों में सूखा एवं गर्मी सहनशील मोठ की किस्मों का मूल्यांकन, रोग प्रतिरोधी जर्मप्लाज़्म की पहचान, फसल उत्पादकता सुधार तथा आनुवंशिक विविधता का अध्ययन प्रमुख रहे।



उनकी प्रतिभा और शोध कार्यों को कई सम्मान भी मिले। उन्हें एम.एससी. में विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक (University Gold Medal), सोसाइटी फ़ॉर साइंटिफ़िक डेवलपमेंट इन एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी द्वारा 'यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड' तथा जलवायु परिवर्तन और खाद्य सुरक्षा विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में 'बेस्ट पेपर प्रेज़ेंटेशन अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया।



आईसीएआर ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि


आईसीएआर ने अपने शोक संदेश में कहा कि डॉ. मोनिका पुनिया ने जलवायु-अनुकूल दलहन अनुसंधान के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया। परिषद ने उनके परिवार, सहकर्मियों और मित्रों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। कृषि वैज्ञानिक समुदाय का मानना है कि डॉ. पुनिया का शोध कार्य आने वाले वर्षों में भी शुष्क क्षेत्रों की टिकाऊ खेती और दलहन अनुसंधान को नई दिशा देता रहेगा।

Tags:
  • indian council of agricultural research
  • ICAR
  • Dr Monika Punia
  • IIPR Bikaner
  • Pulse Research
  • Climate Resilient Crops
  • Genetics and Plant Breeding
  • Arid Pulses
  • Agricultural Scientist
  • Moth Bean