मानसून की बेरुख़ी से राजस्थान में खरीफ़ बुआई 20-25% पिछड़ी, ग्वार का सिर्फ 39% लक्ष्य पूरा, जानिए कौन-सी फसल कितनी पिछड़ी
खरीफ़ सीज़न में समय पर होने वाली बारिश किसानों के लिए सबसे बड़ी उम्मीद होती है। लेकिन जब मानसून की रफ़्तार थम जाती है, तो खेतों में बुआई भी धीमी पड़ जाती है। इस बार राजस्थान में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। पहले कमजोर प्री-मानसून और फिर बीच में पड़े सूखे दौर ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कई इलाक़ों में किसान अगली बारिश का इंतज़ार कर रहे हैं, ताकि बुआई का काम आगे बढ़ाया जा सके।
बारिश की अनिश्चितता का असर राज्य की खरीफ़ बुआई पर साफ़ दिखाई दे रहा है। कृषि विभाग के आँकड़ों के मुताबिक़ कई प्रमुख फसलों की बुआई अभी भी तय लक्ष्य से पीछे चल रही है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य में अब तक बुआई का रकबा पिछले वर्ष की तुलना में 20 से 25 प्रतिशत कम है। हालाँकि, अच्छी बारिश होने पर बुआई की रफ़्तार फिर तेज़ होने की उम्मीद जताई जा रही है।
बाजरा, मूँग समेत कई फसलें लक्ष्य से पीछे, बारिश नहीं हुई तो पड़ सकती है दोबारा बुआई की नौबत
राजस्थान कृषि विभाग के एक अधिकारी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि राज्य की आधे से ज़्यादा खरीफ़ फसलें मानसून पर निर्भर हैं। सामान्य तौर पर प्री-मानसून की बारिश के साथ बुआई शुरू हो जाती है, लेकिन इस वर्ष शुरुआती बारिश कमजोर रही। राज्य में मानसून 2 जुलाई के आसपास पहुँचा और एक सप्ताह तक अच्छी वर्षा हुई, लेकिन पिछले कुछ दिनों से बारिश नहीं होने के कारण पहले से बोई गई फसलों पर भी जोखिम बढ़ गया है। अधिकारी ने कहा कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई, तो किसानों को दोबारा बुआई करनी पड़ सकती है।
9 जुलाई तक के कृषि विभाग के आँकड़ों के अनुसार, मोटे अनाज की 61 प्रतिशत, दलहनों की 58 प्रतिशत, तिलहनों की 60 प्रतिशत और अन्य खरीफ़ फसलों की 56 प्रतिशत लक्ष्य क्षेत्र में बुआई पूरी हो सकी है।
प्रमुख फसलों की बात करें तो बाजरा की 40.50 लाख हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले 24.65 लाख हेक्टेयर में बुआई हुई है, जो लक्ष्य का 61 प्रतिशत है। ज्वार की बुआई 51 प्रतिशत और मक्का की 69 प्रतिशत तक पहुँची है। दलहनों में मूँग की 26.50 लाख हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले 15.90 लाख हेक्टेयर में बुआई हुई है, यानी 60 प्रतिशत लक्ष्य पूरा हुआ है। वहीं मोठ और उड़द की बुआई 44-44 प्रतिशत तक ही पहुँच सकी है।
मूँगफली सबसे आगे, जबकि ग्वार की बुआई सबसे ज़्यादा पिछड़ी
तिलहनी फसलों में मूँगफली की स्थिति सबसे बेहतर है। इसकी 11.50 लाख हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले 9.19 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी है, जो 80 प्रतिशत लक्ष्य के बराबर है। सोयाबीन की 11 लाख हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले 6.74 लाख हेक्टेयर में बुआई हुई है, यानी 61 प्रतिशत लक्ष्य पूरा हुआ है। कपास की बुआई भी 72 प्रतिशत तक पहुँच चुकी है। इसके उलट, राजस्थान की प्रमुख नक़दी फसल ग्वार की बुआई सबसे अधिक पिछड़ी हुई है। 25.50 लाख हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले अब तक केवल 9.82 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हुई है, जो महज़ 39 प्रतिशत है।
बिज़नेस स्टैंडर्ड के अनुसार, विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मानसून में और देरी होती है या बारिश कम रहती है, तब भी ग्वार, मूँग और बाजरा जैसी फसलों की बुआई बाद में तेज़ी पकड़ सकती है, क्योंकि इन फसलों को कम पानी की आवश्यकता होती है, देर से बोया जा सकता है और ये अपेक्षाकृत कम समय में तैयार हो जाती हैं। राजस्थान देश में ग्वार का सबसे बड़ा उत्पादक राज्यों में शामिल है और देश के कुल उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी 70 प्रतिशत से अधिक है।