खेत में खड़े-खड़े मिलेगी खाद की सही सलाह: क्या है e-FARMS ऐप और किसानों के लिए क्यों है ख़ास?
धान की फ़सल के लिए कितनी यूरिया डालनी है? पोटाश की ज़रूरत है या नहीं? मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी है या फ़ॉस्फ़ोरस पर्याप्त है? इन सवालों के जवाब के लिए अब किसानों को किसी दफ़्तर के चक्कर लगाने या अनुमान के आधार पर खाद डालने की ज़रूरत नहीं है। इसके लिए विकसित किया गया है e-FARMS (Fertilizer Advisory and Resource Management System), जो खेत और फ़सल के अनुसार उर्वरक की सटीक सिफ़ारिश देने वाला एक आधुनिक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है।
हाल ही में एक खेत में इसके प्रदर्शन के दौरान कृषि विशेषज्ञों ने दिखाया कि मोबाइल पर ऐप खोलकर, मिट्टी के आंकड़ों के आधार पर कुछ ही सेकंड में यह पता लगाया जा सकता है कि खेत में कौन-से पोषक तत्व कम हैं और उनकी पूर्ति के लिए कितनी खाद डालनी चाहिए। प्रदर्शन के दौरान खेत की मिट्टी में नाइट्रोजन और पोटाश की कमी सामने आई, जिसके आधार पर ऐप ने धान की फ़सल के लिए उर्वरक की संतुलित मात्रा सुझाई।
क्या करता है e-FARMS?
e-FARMS एक वैज्ञानिक प्रणाली है जो मिट्टी के आंकड़ों, फ़सल की जानकारी और उत्पादन के लक्ष्य को आपस में जोड़कर खेत-विशिष्ट (Farm-specific) और फ़सल-विशिष्ट (Crop-specific) उर्वरक सिफ़ारिशें तैयार करती है। इसका मुख्य उद्देश्य पैदावार बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी के स्वास्थ्य को भी बनाए रखना है। सरल शब्दों में कहें तो, यह किसानों को यह सिखाता है कि "जितनी ज़रूरत, उतनी खाद"। इससे न केवल खेती की लागत कम होगी, बल्कि अंधाधुंध उर्वरकों के इस्तेमाल से मिट्टी पर पड़ने वाला दबाव भी कम किया जा सकेगा।
ऐप कैसे डाउनलोड करें?
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने बताया कि e-FARMS ऐप को मोबाइल में आसानी से डाउनलोड किया जा सकता है। इसके लिए क्यूआर (QR) कोड स्कैन करने का विकल्प उपलब्ध कराया गया है। साथ ही, यह जानकारी भी दी गई कि इस ऐप से जुड़ी तमाम जानकारियां और
इसकी पहुंच ICAR-भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान (IISS) की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध हैं।
किसानों के लिए क्या हैं इसके फ़ायदे?
सटीक आकलन: सबसे बड़ा
फ़ायदा यह है कि किसान को खाद की मात्रा का अनुमान लगाने की बजाय, मिट्टी के वास्तविक आंकड़ों के आधार पर
वैज्ञानिक सलाह मिलती है।
अनावश्यक ख़र्च से बचाव: अक्सर
किसान खेत में ज़रूरत से ज़्यादा यूरिया डाल देते हैं। यह तकनीक प्रमाणित
करती है कि मिट्टी की सही स्थिति जानकर कम मात्रा में भी उतना ही, बल्कि उससे बेहतर उत्पादन लिया जा सकता है।
पोषक तत्वों की लाइव रिपोर्ट: यह ऐप मिट्टी में मौजूद नाइट्रोजन, फ़ॉस्फ़ोरस, पोटाश और ऑर्गेनिक कार्बन जैसे प्रमुख तत्वों की ताज़ा
स्थिति बताता है। इससे किसान अपनी आँखों से देख सकते हैं कि उनकी ज़मीन को
किस चीज़ की दरकार है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह तकनीक?
भारत में आज भी एक बड़ी आबादी पारंपरिक अनुभव और अंदाज़े से उर्वरकों का उपयोग करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि मिट्टी की वास्तविक ज़रूरत को जाने बिना खाद डालने से लागत बढ़ती है और मिट्टी का प्राकृतिक संतुलन भी बिगड़ जाता है। e-FARMS जैसी डिजिटल प्रणाली इसी खाई को पाटने का काम कर रही है, जहाँ किसान अपने खेत में खड़े-खड़े, मोबाइल फ़ोन के ज़रिए अपनी मिट्टी के मिज़ाज को समझ सकता है। यदि यह तकनीक ग्रामीण स्तर पर पूरी तरह प्रभावी ढंग से पहुँचती है, तो यह देश के अन्नदाताओं के लिए खेती को मुनाफ़े का सौदा
बनाने में गेम-चेंजर साबित होगी।