रील-वीडियो बनाओ, ₹1 लाख तक कमाओ! बिहार में सोशल मीडिया क्रिएटर्स के लिए नई योजना का ऐलान, जानें कितने व्यूज़ पर मिलेंगे कितने रूपये
बिहार में यूट्यूब, इंस्टाग्राम और फ़ेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों से जुड़े वीडियो या रील बनाने वाले डिजिटल क्रिएटर्स के लिए नई कमाई की व्यवस्था की गई है। राज्य कैबिनेट ने ‘बिहार सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन मीडिया नियमावली’ में संशोधन के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है। इसके तहत सरकार की योजनाओं, कार्यक्रमों और उपलब्धियों से जुड़ा कंटेंट बनाने वाले पात्र डिजिटल क्रिएटर्स को उनके वीडियो के प्रदर्शन के आधार पर भुगतान किया जाएगा।
नई व्यवस्था में वीडियो के व्यूज़ के आधार पर भुगतान की सीमा तय की गई है। सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव के मुताबिक़, 1 लाख व्यूज़ के बाद हर अतिरिक्त 1 लाख व्यूज़ पर क्रिएटर को ₹10,000 दिए जाएंगे। एक वीडियो के लिए अधिकतम भुगतान ₹1 लाख तय किया गया है। भुगतान के लिए वीडियो प्रकाशित होने के 30 दिन बाद उसके व्यूज़ की गणना की जाएगी। हालांकि, यह लाभ तय नियमों और पात्रता पूरी करने वाले क्रिएटर्स को ही मिलेगा।
1 लाख व्यूज़ के बाद हर 1 लाख पर ₹10 हजार
कैबिनेट ने ‘बिहार सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन मीडिया नियमावली’ में संशोधन के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी है। सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव के मुताबिक़, सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों पर रील या वीडियो बनाने वाले डिजिटल क्रिएटर्स को 1 लाख व्यूज़ के बाद हर अतिरिक्त 1 लाख व्यूज़ पर ₹10,000 दिए जाएंगे। एक वीडियो के लिए भुगतान की अधिकतम सीमा ₹1 लाख तय की गई है। इस भुगतान के लिए वीडियो के व्यूज़ प्रकाशित होने के 30 दिन बाद गिने जाएंगे। यानी क्रिएटर को वीडियो पोस्ट करने के बाद 30 दिनों के प्रदर्शन के आधार पर भुगतान किया जाएगा।
10 लाख व्यूज़ पर अधिकतम ₹1 लाख
नई व्यवस्था के हिसाब से अगर किसी वीडियो को निर्धारित अवधि में 1 लाख व्यूज़ मिलते हैं, तो उसके बाद हर अतिरिक्त 1 लाख व्यूज़ पर ₹10,000 की दर से भुगतान होगा। इस तरह 10 लाख व्यूज़ तक पहुँचने पर कुल भुगतान ₹1 लाख तक हो सकता है। हालांकि, 10 लाख से अधिक व्यूज़ आने पर भी एक वीडियो के लिए भुगतान की अधिकतम सीमा ₹1 लाख ही रहेगी।
हर वायरल वीडियो पर अपने आप नहीं मिलेगा भुगतान
सरकार की यह व्यवस्था हर वायरल वीडियो या सोशल मीडिया पोस्ट पर स्वतः लागू नहीं होगी। भुगतान के लिए क्रिएटर को सरकार की ओर से तय पात्रता और अन्य शर्तों को पूरा करना होगा। वीडियो का प्लेटफ़ॉर्म, कंटेंट की गुणवत्ता और व्यूज़ का आधिकारिक सत्यापन जैसी शर्तें भी लागू होंगी। अंतिम भुगतान सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के आधार पर किया जाएगा।
क्रिएटर्स का पंजीकरण ज़रूरी
इस व्यवस्था का लाभ लेने के लिए डिजिटल क्रिएटर्स और पंजीकृत कंपनियों को सूचना एवं जनसंपर्क विभाग यानी आईपीआरडी के माध्यम से सूचीबद्ध होना होगा। बिना सूचीबद्ध हुए या विभाग की अनुमति के तैयार किए गए कंटेंट को इस भुगतान के लिए योग्य नहीं माना जाएगा। क्रिएटर्स को निर्धारित पंजीकरण और अन्य औपचारिकताएँ भी पूरी करनी होंगी। बिहार सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर सोशल मीडिया और ऑनलाइन मीडिया नीति के तहत व्यक्तिगत क्रिएटर्स और पंजीकृत कंपनियों के पंजीकरण की व्यवस्था उपलब्ध है।
फ़ेक व्यूज़ और फ़र्ज़ी फ़ॉलोअर्स पर भी होगी निगरानी
सरकार ने सोशल मीडिया अकाउंट की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए फ़ॉलोअर्स और व्यूज़ के सत्यापन पर भी ज़ोर दिया है। पंजीकृत सोशल मीडिया हैंडल, पेज और चैनल के फ़ॉलोअर्स की समय-समय पर जाँच की जाएगी। इसका उद्देश्य बॉट या फ़र्ज़ी फ़ॉलोअर्स के ज़रिए आँकड़े बढ़ाकर योजना का अनुचित लाभ लेने की कोशिशों पर रोक लगाना है। इसलिए भुगतान के लिए सिर्फ़ दिख रहे व्यूज़ और फ़ॉलोअर्स ही पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि उनके सत्यापन को भी महत्व दिया जाएगा।
सरकारी योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुँचाना मक़सद
इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य बिहार सरकार की योजनाओं, विकास पहलों, कार्यक्रमों और उपलब्धियों से जुड़ी जानकारी को डिजिटल माध्यमों के ज़रिए अधिक लोगों तक पहुँचाना है। इसके तहत पंजीकृत क्रिएटर्स सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों पर रील, वीडियो और अन्य सोशल मीडिया कंटेंट तैयार कर सकेंगे। तय शर्तें पूरी होने और वीडियो के प्रदर्शन के आधार पर उन्हें भुगतान किया जाएगा।
बिहार में एआई को लेकर भी बड़ा फैसला
कैबिनेट बैठक में सोशल मीडिया नीति के अलावा तकनीक से जुड़ा एक अहम फैसला भी लिया गया। बिहार के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने Taiyo AI India Pvt Ltd के साथ एक समझौता किया है। इसके तहत राज्य में चल रही आधारभूत ढाँचा परियोजनाओं की वास्तविक समय में निगरानी के लिए एआई आधारित डैशबोर्ड तैयार किया जाएगा।
युवाओं और महिलाओं के लिए एआई प्रशिक्षण
समझौते के तहत राज्य के अधिकारियों, छात्रों और महिलाओं के लिए एआई और डेटा एनालिटिक्स से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे। इस तरह कैबिनेट के फैसले में एक तरफ़ सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी सोशल मीडिया के ज़रिए लोगों तक पहुँचाने के लिए डिजिटल क्रिएटर्स को प्रोत्साहित करने की व्यवस्था की गई है, वहीं दूसरी तरफ़ सरकारी परियोजनाओं की निगरानी और एआई प्रशिक्षण के लिए तकनीक के इस्तेमाल को भी बढ़ावा दिया गया है।