Economic Survey 2025-26: कैसा रहा स्वास्थ्य का रिपोर्ट कार्ड?

Gaon Connection | Jan 29, 2026, 14:48 IST
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Economic Survey 2025-26 के अनुसार पिछले दशक में शिशु मृत्यु दर में 37 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। साथ ही आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन और ई-संजीवनी जैसे आईसीटी में हुए नवाचारों से भी स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार हुआ है।

<p>Economic Survey 2025-26 के अनुसार पिछले दशक में शिशु मृत्यु दर में 37 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।<br></p>

Economic Survey 2025-26 के अनुसार देश ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर और किफायती सुविधाएं उपलब्ध कर स्वास्थ्य सेवाओं को और आसान बनाया गया है। यही नहीं शिशु व मातृ मृत्यु दर में कमी लाई गई है, टीकाकरण के कवरेज का विस्तार किया गया है और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा को बेहतर बनाया गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, आयुष्मान भारत और बीमारियों के नियंत्रण संबंधित कार्यक्रम से इसको बढ़ावा मिला है।



केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने 29 जनवरी को संसद में आर्थिक समीक्षा 2025-26 पेश की है, जिसमें स्वास्थ्य पर भी बात की गई है।



आर्थिक समीक्षा में बताया गया कि 1990 के बाद से, भारत ने मातृ मृत्यु दर में 86 प्रतिशत की कमी दर्ज की है, जो वैश्विक औसत 48 प्रतिशत से कहीं अधिक है। इसी प्रकार, पांच वर्ष से कम आयु की मृत्यु दर में 78 प्रतिशत की गिरावट हासिल की गई, जो 1990-2023 के दौरान वैश्विक स्तर पर 54 प्रतिशत की तुलना में 61 प्रतिशत की वैश्विक कमी और नवजात मृत्यु दर में 70 प्रतिशत की गिरावट से अधिक है।



पिछले दशक में शिशु मृत्यु दर में 37 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है और यह 2013 में प्रति हजार जीवित जन्मों पर 40 से घटकर 2023 में 25 हो गई है।



आर्थिक समीक्षा में बताया गया है कि डिजिटल तकनीक और आईसीटी में हुए नवाचारों का इस्तेमाल करते हुए पारदर्शिता बढ़ाने और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच का विस्तार करने वाली एकीकृत स्वास्थ्य व बीमा प्रणालियों का निर्माण किया गया है। हॉस्पिटल मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) और ई-संजीवनी जैसी पहलों ने नागरिकों की डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को मजबूत किया है।



भारत में मोटापा चिंताजनक तेजी से बढ़ रहा है और यह प्रमुख स्वास्थ्य संबंधी चुनौती बन गया है। स्वास्थ्य के लिए हानिकारक आहार, भागदौड़ भरी जिंदगी सहित जीवन-शैली में बदलाव, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स (यूपीएफ) का अत्यधिक सेवन सभी आयुवर्ग के लोगों को प्रभावित कर रहा है और मधुमेह (डायबिटीज), हृदयरोग और हाइपरटेंशन जैसे गैर-संक्रामक रोगों (एनसीडी) का खतरा बढ़ रहा है।



वर्ष 2019-21 के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) के अनुसार 24 प्रतिशत भारतीय महिलाओं और 23 प्रतिशत भारतीय पुरुष मोटापे के शिकार हैं। इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि अधिक वजन की समस्या के शिकार पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की संख्या 2015-16 में 2.1 प्रतिशत से बढ़कर 2019-21 में 3.4 प्रतिशत हो गई।



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मोटापे को एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में पहचानते हुए, सरकार ने कई पहल शुरू की हैं ताकि स्वास्थ्य, पोषण, शारीरिक गतिविधि, खाद्य सुरक्षा और जीवनशैली में सुधार किया जा सके। पोषण अभियान और पोषण 2.0, फिट इंडिया मूवमेंट, खेलो इंडिया, ईट राइट इंडिया, राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान आज से थोड़ा कम जैसे कदम इन पहलों के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। इसके अलावा, एफएसएसएआई ने 'मोटापा रोकें, मोटापा भगाएं - मोटापा रोकने के लिए जागरूकता पहल' अभियान शुरू किया है।



आर्थिक समीक्षा में आहार संबंधी सुधारों को सार्वजनिक स्वास्थ्य की प्राथमिकता बताई गई है। भारत यूपीएफ की बिक्री के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक है। वर्ष 2009 से 2023 तक इसमें 150 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई। यह तथ्य मोटापे के प्रभावी प्रबंधन हेतु स्थानीय स्तर पर पैदा किये गये खाद्यान्नों, पारम्परिक आहारों और आयुष (योग को बढ़ावा) जैसी पारम्परिक प्रणालियों को लोकप्रिय बन गईं हैं।



आर्थिक समीक्षा में बच्चों में डिजिटल एडिक्शन की बढ़ती समस्या पर भी बात की गई है। आर्थिक समीक्षा में इस समस्या के समाधान के लिए सरकार के उठाए गए कदमों का ज़िक्र किया गया है। सीबीएसई ने स्कूलों और स्कूल बसों में सुरक्षित इंटरनेट इस्तेमाल पर दिशा-निर्देश जारी किए हैं।



युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य में आई गिरावट और डिजिटल एडिक्शन के बीच गहरा संबंध है। कई अध्ययनों ने 15-24 वर्ष के युवाओं में सोशल मीडिया के बढ़ते एडिक्शन की पुष्टि की है। सोशल मीडिया के व्यसन का जुड़ाव घबराहट, अवसाद, आत्मविश्वास में कमी और साइबरबुलिंग से उपजे दबाव के साथ भी है। भारतीय युवाओं को परेशान करने वाली दूसरी समस्याओं में कंपल्सिव स्क्रॉलिंग, सामाजिक तुलना और गेमिंग से जुड़ी विकृतियां शामिल हैं। ये समस्याएं किशोरों में नींद की कमी, आक्रामकता, सामाजिकता में कमी और अवसाद को जन्म देती हैं।



इसलिए, आर्थिक समीक्षा में इस समस्या से निपटने के लिए सरकार द्वारा उठाए गये कई कदमों का ज़िक्र किया गया है। उदाहरण के लिए, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा अक्टूबर 2022 में शुरू की गई टेली-मानस सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 24/7 टोल-फ्री मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन उपलब्ध कराती है, जो कॉल करने वालों को बिना किसी फीस के प्रशिक्षित पेशेवरों से जोड़ती है।



वर्ष 2024 में लॉन्च किए गए टेली-मानस ऐप ने पहुंच का और विस्तार किया। इस सेवा को इसकी शुरूआत के बाद से 32 लाख से अधिक कॉल मिले हुए हैं। ऑनलाइन गेमिंग (विनियमन) अधिनियम, 2025, युवाओं में डिजिटल व्यसन और वित्तीय हानि को नियंत्रित करने के एक महत्वपूर्ण कदम का प्रतिनिधित्व करता है।



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