अल नीनो हुआ सक्रिय, सर्दियों तक सुपर अल नीनो बनने की 60% से ज़्यादा आशंका, अमेरिकी मौसम एजेंसी का अलर्ट

Gaon Connection | Jun 12, 2026, 11:43 IST
अमेरिका की मौसम एजेंसी NOAA ने अल नीनो की शुरुआत की पुष्टि की है। एजेंसी के अनुसार इस साल सर्दियों तक इसके सुपर अल नीनो बनने की संभावना 60 प्रतिशत से अधिक है। वहीं जापान की मौसम एजेंसी ने जुलाई में पॉजिटिव IOD बनने का अनुमान जताया है। यह स्थिति भारत के मानसून और कृषि गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है।

दुनिया के मौसम को प्रभावित करने वाली एल नीनो की स्थिति अब बन चुकी है और आने वाले महीनों में इसका असर और मजबूत हो सकता है। अमेरिका की मौसम एजेंसी ने चेतावनी दी है कि इस साल सर्दियों तक अल नीनो के "सुपर अल नीनो" में बदलने की संभावना 60 प्रतिशत से अधिक है। यदि ऐसा होता है तो दुनिया के कई हिस्सों में मौसम के पैटर्न पर असर पड़ सकता है।



अमेरिका की नेशनल ओशियानिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) की नेशनल वेदर सर्विस (NWS ने अल नीनो की शुरुआत की पुष्टि करते हुए कहा है कि प्रशांत महासागर का पानी लगातार गर्म हो रहा है। एजेंसी के अनुसार सर्दियों तक इसके बेहद मजबूत स्तर तक पहुंचने की संभावना 63 प्रतिशत है।



क्या होता है सुपर अल नीनो?

मौसम एजेंसियां प्रशांत महासागर के एक खास हिस्से के समुद्री तापमान पर नजर रखती हैं। अनुमान है कि आने वाले महीनों में यहां समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 2 डिग्री सेल्सियस से अधिक बढ़ सकता है। NOAA के मुताबिक जब तापमान वृद्धि 2 डिग्री सेल्सियस या उससे ऊपर पहुंच जाती है तो उसे "वेरी स्ट्रॉन्ग एल नीनो" या "सुपर एल नीनो" कहा जाता है।



जुलाई में पॉजिटिव IOD बनने की संभावना

अमेरिकी एजेंसी ने हिंद महासागर की स्थिति पर कोई टिप्पणी नहीं की है। हालांकि जापान की मौसम एजेंसी जापान एजेंसी फॉर मरीन-अर्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (JAMSTEC) ने कहा है कि फिलहाल हिंद महासागर की स्थिति सामान्य है, लेकिन जुलाई में इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) के पॉजिटिव चरण में पहुंचने की संभावना है। IOD हिंद महासागर के समुद्री तापमान में होने वाले बदलाव से जुड़ी एक जलवायु स्थिति है। इसका असर भारतीय मानसून पर भी पड़ता है। पॉजिटिव IOD भारत के लिए आमतौर पर अच्छी खबर माना जाता है क्योंकि इससे समुद्र से अतिरिक्त नमी मिलती है और कई बार अल नीनो वाले वर्षों में भी मानसून को सहारा मिलता है।



मानसून पर पहले ही दिखने लगा असर

यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) दक्षिण-पश्चिम मानसून का अनुमान घटाकर सामान्य वर्षा के 90 प्रतिशत तक कर चुका है। इस साल मानसून 4 जून को केरल पहुंचा, जो सामान्य से तीन दिन देर से था।



प्रशांत महासागर में लगातार बढ़ रही गर्मी

NOAA के अनुसार अल नीनो बनने के साथ प्रशांत महासागर में गर्म पानी पूर्व की ओर बढ़ने लगता है। यही बदलाव दुनिया के कई हिस्सों के मौसम को प्रभावित करता है। मौसम एजेंसी के अनुसार प्रशांत महासागर के कई हिस्सों में पानी का तापमान सामान्य से काफी अधिक है। कुछ क्षेत्रों में यह 2 डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा बढ़ चुका है। NWS ने कहा कि पिछले एक महीने में समुद्र के भीतर के तापमान में कुछ कमी आई है, लेकिन मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्र के अंदर का तापमान अब भी सामान्य से काफी अधिक बना हुआ है। इससे आने वाले महीनों में अल नीनो के और मजबूत होने की संभावना बनी हुई है। अगर समुद्र की गर्मी इसी तरह बढ़ती रही तो साल के अंत तक एल नीनो "सुपर अल नीनो" की श्रेणी में पहुंच सकता है, जिसका असर वैश्विक मौसम, वर्षा और कृषि गतिविधियों पर देखने को मिल सकता है।

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