El Niño Maharashtra: अल नीनो का ख़तरा, प्रदेश में बचेगा सिर्फ 45 प्रतिशत पानी! सूखे से निपटने के लिए जिलों में टास्क फोर्स बनाने के आदेश
महाराष्ट्र सरकार ने संभावित अल नीनो के असर को देखते हुए अभी से तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि जल प्रबंधन को प्राथमिकता दें, जल संरक्षण के काम तेज करें और आपसी तालमेल से काम करें। मौसम विभाग के अनुसार, अल नीनो का असर अगस्त और सितंबर में ज्यादा हो सकता है, जिससे मानसून में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है।
अल नीनो के प्रभाव को कम करना होगा
मुख्यमंत्री ने एक समीक्षा बैठक में कहा कि राज्य को पहले से योजना बनाकर काम करना होगा ताकि सूखे जैसी स्थिति से बचा जा सके। उन्होंने कहा कि उपलब्ध पानी का सही उपयोग किया जाए, पुराने तालाबों और जल स्रोतों की मरम्मत की जाए और नए जल संरक्षण कार्यों को तेजी से पूरा किया जाए।
अगस्त और सितंबर में सामान्य से कम बारिश की संभावना
मौसम विभाग ने बताया है कि मई महीने में तापमान सामान्य रह सकता है, लेकिन लू चलने की संभावना ज्यादा है। वहीं अगस्त और सितंबर में कम बारिश हो सकती है। हालांकि, हिंद महासागर की सकारात्मक स्थिति (Indian Ocean Dipole) कुछ हद तक राहत दे सकती है।
करना होगा समय से प्रबंधन
फडणवीस ने कहा कि 2015 में भी अल नीनो के कारण महाराष्ट्र में पानी का संकट पैदा हुआ था। उस समय मानसून खत्म होने के बाद भी जलाशयों में केवल 45 प्रतिशत पानी बचा था। अभी मानसून शुरू होने से पहले भी स्थिति लगभग वैसी ही है, इसलिए समय रहते तैयारी जरूरी है। उन्होंने यह भी बताया कि 2015 के अल नीनो से मिले सबक ने 2018 में समय पर हस्तक्षेप से फसलों को बचाने में मदद की, लेकिन अनियमित वर्षा पैटर्न, खासकर मराठवाड़ा में, लंबे सूखे के कारण फसलों को काफी नुकसान पहुँचा रहा था।
- उन्होंने कहा कि जल संरक्षण बढ़ाना और पानी जमा करने की क्षमता बढ़ाना जरूरी है। इससे किसानों को सुरक्षात्मक सिंचाई मिल सकेगी और फसलों का नुकसान कम होगा। सरकार ने जलयुक्त शिवार योजना और अन्य जल संरक्षण योजनाओं को तेजी से लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए वित्त विभाग से तुरंत फंड जारी करने को भी कहा गया है।
- मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर बारिश 90 प्रतिशत से कम होती है तो इसका सीधा असर पेयजल और खेती पर पड़ेगा। इसलिए अभी से अगले साल की गर्मी तक के लिए पानी की योजना बनानी होगी। उन्होंने जिलों में विशेष टास्क फोर्स बनाने के निर्देश दिए हैं, जिसमें जिला अधिकारी, सिंचाई विभाग और स्थानीय निकायों के लोग शामिल होंगे।
- पशुओं के चारे को लेकर भी सरकार सतर्क है। फडणवीस ने कहा कि अगर सूखा पड़ा तो चारे की कमी हो सकती है, इसलिए राज्य को दूसरे राज्यों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने सोलापुर, सांगली और मराठवाड़ा जैसे क्षेत्रों में चारा उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया।
- उन्होंने खाद की उपलब्धता पर भी ध्यान देने को कहा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि किसानों को समय पर खाद मिले और वितरण में पारदर्शिता रहे। इसके लिए AgriStack और Artificial Intelligence (AI) जैसी तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
कृषि मंत्री ने बताईं तैयारियाँ
कृषि मंत्री दत्तात्रय भारणे ने कहा कि- "विभाग पूरी तरह तैयार है। अधिकारियों के साथ बैठकें हो चुकी हैं और खरीफ सीजन के लिए खाद, बीज और चारे का पर्याप्त स्टॉक रखने के निर्देश दिए गए हैं। अगर दोबारा बुवाई की जरूरत पड़ी तो किसानों को अतिरिक्त बीज भी दिए जाएंगे। सरकार का कहना है कि समय पर तैयारी करके किसानों और आम लोगों को अल नीनो के असर से बचाया जा सकता है। साथ ही फार्म तालाब योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए और किसानों को प्लास्टिक लाइनिंग जैसी आवश्यक सामग्री प्रदान की जानी चाहिए।" भारणे ने आश्वासन दिया कि कृषि विभाग स्थिति से निपटने के लिए "पूरी तरह से तैयार" है और किसानों को होने वाले नुकसान को कम करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रहा है।