फ्रांस में गर्मी से 1000 मौतें, संयुक्त राष्ट्र ने अल नीनो को लेकर चेताया, भारत के 315 ज़िलों में खेती, पानी और पशुपालन पर संकट
दुनिया इस समय भीषण गर्मी और बदलते मौसम के दोहरे संकट का सामना कर रही है। फ्रांस की सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार, पिछले सप्ताह रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के दौरान देश में लगभग 1,000 अतिरिक्त मौतें दर्ज की गईं। वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक ने चेतावनी दी है कि यूरोप दुनिया का सबसे तेज़ी से गर्म होने वाला महाद्वीप बन चुका है। वैज्ञानिकों का मानना है कि बढ़ते वैश्विक तापमान और चरम मौसमी घटनाओं के पीछे अल नीनो जैसी जलवायु परिस्थितियाँ भी अहम भूमिका निभा रही हैं, जिनका असर अब दुनिया के साथ भारत पर भी साफ़ दिखाई देने लगा है।
भारत में अल नीनो का सबसे बड़ा प्रभाव दक्षिण-पश्चिम मानसून पर पड़ने की आशंका है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), कृषि मंत्रालय और भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के ताज़ा आकलन बताते हैं कि यदि मानसून सामान्य से कमज़ोर रहा तो देश के कई हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति बन सकती है। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने संभावित संकट से निपटने के लिए राज्यों को पहले से तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। जल संरक्षण, रोज़गार, सिंचाई, पशुओं के चारे और पेयजल की उपलब्धता को प्राथमिकता देने की रणनीति बनाई जा रही है।
315 ज़िलों पर सूखे का ख़तरा, 12 राज्यों में बढ़ी चिंता
कृषि मंत्रालय और आईसीएआर ने वैज्ञानिक आँकड़ों के आधार पर 315 ज़िलों को संभावित सूखा प्रभावित क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया है। इनमें 111 ज़िले ऐसे हैं, जहाँ सिंचाई का दायरा 25 प्रतिशत से भी कम है, जबकि 76 ज़िलों में यह 25 से 50 प्रतिशत के बीच है। सबसे अधिक प्रभावित होने की आशंका मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा के कई ज़िलों में जताई गई है।
उधर, आईएमडी के अनुसार 1 से 27 जून के बीच देश में सामान्य से 43 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज हुई है। इस अवधि में मध्य भारत में 57 प्रतिशत, पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में 44 प्रतिशत, दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में 30 प्रतिशत तथा उत्तर-पश्चिम भारत में 27 प्रतिशत कम बारिश हुई। यदि जुलाई के शुरुआती दिनों में मानसून की रफ़्तार नहीं बढ़ती है, तो धान, मक्का, बाजरा समेत खरीफ़ फसलों की बुआई और उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
नवंबर तक बना रह सकता है अल नीनो का असर: संयुक्त राष्ट्र
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) के आकलन के अनुसार, जून से नवंबर के बीच अल नीनो के सक्रिय रहने की संभावना 90 प्रतिशत से अधिक है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इसे वैश्विक जलवायु के लिए गंभीर चेतावनी बताते हुए कहा है कि यह पहले से गर्म हो रही दुनिया में संकट को और गहरा कर सकता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय हिस्से में समुद्र की सतह का असामान्य रूप से गर्म होना वर्षा और तापमान के वैश्विक पैटर्न को प्रभावित कर रहा है। इसका असर केवल एशिया ही नहीं, बल्कि यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका तक दिखाई दे रहा है। फ्रांस, जर्मनी, स्पेन और ब्रिटेन जैसे देशों में रिकॉर्ड तापमान और भीषण गर्मी इसी बदलते मौसम चक्र की गंभीरता को दर्शाते हैं।
सरकार ने पानी, रोज़गार और चारे की शुरू की तैयारी
संभावित सूखे की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों और ज़िला प्रशासन को अग्रिम तैयारियाँ करने के निर्देश दिए हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के अनुसार संवेदनशील ज़िलों की पहचान कर ली गई है और जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। तालाब, जलाशय, खेत-तालाब, नालों और चेक डैम की मरम्मत के साथ नए जल स्रोत विकसित किए जा रहे हैं, ताकि कम वर्षा होने पर भी अधिक से अधिक वर्षाजल का संरक्षण किया जा सके। आवश्यकता पड़ने पर पानी की अधिक उपलब्धता वाले क्षेत्रों से संकटग्रस्त इलाकों तक जल पहुँचाने की योजना भी तैयार की जा रही है। इसके अलावा ग्रामीण रोज़गार प्रभावित न हो, इसके लिए आवश्यक प्रबंध किए जा रहे हैं। पशुपालकों को चारे की कमी से बचाने के लिए अतिरिक्त चारा उपलब्ध कराने, उसका भंडारण करने और प्रभावित क्षेत्रों तक समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने की कार्ययोजना भी बनाई गई है।