मार्च 2027 तक बना रह सकता है अल नीनो, साल के अंत तक और मज़बूत होने के आसार, अमेरिकी मौसम एजेंसी का नया पूर्वानुमान
अमेरिकी मौसम एजेंसी ने वैश्विक मौसम प्रणाली को प्रभावित करने वाली अल नीनो स्थिति को लेकर नया पूर्वानुमान जारी किया है। इसके अनुसार, प्रशांत महासागर में विकसित हो चुका अल नीनो आने वाले महीनों में और अधिक प्रभावशाली हो सकता है तथा इसके मार्च 2027 की शुरुआत तक बने रहने की प्रबल संभावना है। इस स्थिति का असर दुनिया के कई हिस्सों में वर्षा, तापमान और मौसमी गतिविधियों पर देखा जा सकता है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि समुद्र की सतह के तापमान और वायुमंडलीय संकेत लगातार अल नीनो के पक्ष में बने हुए हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में तापमान में बढ़ोतरी और वायुमंडलीय बदलाव इस बात के संकेत हैं कि यह मौसमी प्रणाली आने वाले समय में और सशक्त हो सकती है। इससे वैश्विक मौसम के स्वरूप में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं।
मार्च 2027 तक बने रहने की प्रबल संभावना
अमेरिका के क्लाइमेट प्रेडिक्शन सेंटर (सीपीसी) और नेशनल ओशैनिक ऐंड एटमॉस्फ़ेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (एनओएए) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, अल नीनो अब पूरी तरह स्थापित हो चुका है। एजेंसी ने मार्च 2027 की शुरुआत तक इसके बने रहने की 97 प्रतिशत संभावना जताई है। वहीं अक्टूबर से दिसंबर 2026 के दौरान इसके मज़बूत स्तर पर पहुँचने की संभावना 81 प्रतिशत आँकी गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि लगभग 20 प्रतिशत संभावना ऐसी भी है कि यह अपेक्षाकृत कमज़ोर रह सकता है।
समुद्र की सतह के तापमान में लगातार बढ़ोतरी
रिपोर्ट के अनुसार, भूमध्यरेखीय मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया गया है। अप्रैल 2026 के मध्य से पूर्व-मध्य और पूर्वी प्रशांत में गर्म पानी का विस्तार लगातार बढ़ा है। पिछले चार सप्ताह के दौरान अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा से लेकर पूर्वी प्रशांत तक समुद्र का तापमान सामान्य से ऊपर रहा, जबकि तिथि रेखा के पश्चिमी भाग में तापमान सामान्य से नीचे दर्ज किया गया। पूर्वी भूमध्यरेखीय अटलांटिक महासागर में तापमान सामान्य से कम रहा, जबकि पश्चिमी और पूर्वी हिंद महासागर में समुद्र की सतह सामान्य से अधिक गर्म पाई गई। इसके साथ ही पूर्व-मध्य और पूर्वी प्रशांत में गर्म पानी का प्रभाव और अधिक स्पष्ट हुआ है।
समुद्र के भीतर भी बढ़ी गर्मी
रिपोर्ट में कहा गया है कि जुलाई 2025 के मध्य से समुद्र की गहराई में सामान्य से कम तापमान की स्थिति बनी हुई थी, जो दिसंबर 2025 तक जारी रही। इसके बाद दिसंबर के मध्य से समुद्र के भीतर गर्म पानी की परत विकसित होने लगी और अप्रैल 2026 के अंत तक इसमें लगातार वृद्धि हुई। अप्रैल के अंत से मई के अंत तक इस गर्मी में कुछ कमी आई, लेकिन मई के अंतिम सप्ताह से इसमें फिर बढ़ोतरी शुरू हो गई। पिछले दो महीनों के दौरान भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के अधिकांश हिस्सों में समुद्र की भीतरी परत का तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया गया है।
वर्षा और वायुमंडलीय गतिविधियों में बदलाव
रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 से इंडोनेशिया के ऊपर आउटगोइंग लॉन्गवेव रेडिएशन (ओएलआर) के सकारात्मक विचलन बने हुए हैं, जो वहाँ वर्षा और संवहन गतिविधियों में कमी का संकेत देते हैं। दूसरी ओर, मध्य और पूर्व-मध्य भूमध्यरेखीय प्रशांत में नकारात्मक ओएलआर विचलन दर्ज किए गए हैं, जो अधिक बादल बनने और वर्षा की सक्रियता बढ़ने का संकेत हैं। ओएलआर पृथ्वी की सतह, महासागरों और वायुमंडल से अंतरिक्ष में उत्सर्जित होने वाली ऊष्मीय अवरक्त ऊर्जा को दर्शाता है। वैज्ञानिक इसका उपयोग वायुमंडलीय संवहन और वर्षा संबंधी गतिविधियों की निगरानी के महत्त्वपूर्ण संकेतक के रूप में करते हैं।