अल नीनो के असर से आंध्र प्रदेश में 51% बारिश की कमी, धान की बुवाई घटी, सरकार ने चार सूत्रीय रणनीति बनाई
आंध्र प्रदेश में इस मानसून सीज़न में अब तक सामान्य से 51 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। राज्य सरकार ने अल नीनो के प्रतिकूल असर को कम करने के लिए चार सूत्रीय रणनीति तैयार की है। 25 अगस्त तक राज्य में 193 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 393.7 मिमी होनी चाहिए थी। बारिश की कमी का असर चालू खरीफ़ सीज़न में बुवाई के रक़बे पर भी पड़ा है। इस साल कुल 20.35 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई है, जबकि पिछले साल यह रक़बा 25.63 लाख हेक्टेयर था। यानी बुवाई के रक़बे में क़रीब 21 प्रतिशत की कमी आई है।
बिज़नेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक़, धान की बुवाई का रक़बा 11.79 लाख हेक्टेयर से घटकर 10.37 लाख हेक्टेयर रह गया है। वहीं, दलहन की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है और इसका रक़बा 2.16 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2.66 लाख हेक्टेयर हो गया है। सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि बुवाई के कुल रक़बे में यह बदलाव मुख्य रूप से पानी की उपलब्धता के अनुसार फ़सल पैटर्न में बदलाव की वजह से हुआ है, न कि खेती में सामान्य गिरावट के कारण। धान के 1.29 लाख हेक्टेयर रक़बे को दूसरी फ़सलों में बदलने के लक्ष्य के मुक़ाबले अब तक 36,000 हेक्टेयर यानी 28 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया जा चुका है।
अल नीनो का असर आंध्र प्रदेश में कितना ज़्यादा है?
आंध्र प्रदेश उन क्षेत्रों में शामिल है, जहाँ अल नीनो का असर बहुत ज़्यादा है। 1 जून से 25 अगस्त 2026 के बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान देश में कुल बारिश सामान्य से क़रीब 13 प्रतिशत कम रही, जबकि आंध्र प्रदेश में 51 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। यानी राज्य में बारिश की कमी राष्ट्रीय स्तर की कमी से क़रीब चार गुना रही। राज्य के सभी 28 ज़िलों में बारिश की कमी दर्ज की गई। इनमें 25 ज़िले कमी की श्रेणी में और तीन ज़िले बड़ी कमी की श्रेणी में रहे।
सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार ने फ़रवरी 2026 से ही स्थिति की निगरानी शुरू कर दी थी, क्योंकि उस समय तक इस साल अल नीनो की स्थिति बनने के पर्याप्त संकेत मिल चुके थे। मार्च तक सरकार को पहली आकलन रिपोर्ट सौंप दी गई थी। इसमें 1,357 रायथु सेवा केंद्रों (RSKs) को उच्च जोखिम और 2,077 RSKs को मध्यम जोखिम वाले केंद्रों के रूप में चिन्हित किया गया था। इससे राज्यभर में समय रहते लक्षित तैयारियाँ करने में मदद मिली।
सरकार की चार सूत्रीय रणनीति क्या है?
सरकार के एक अधिकारी के मुताबिक़, सरकार सभी क्षेत्रों के लिए एक जैसी रणनीति अपनाने के बजाय ज़मीनी परिस्थितियों के आधार पर ज़रूरत और स्थान के हिसाब से रणनीति अपना रही है। उन्होंने बताया कि जहाँ पानी उपलब्ध है, वहाँ उसका समझदारी से इस्तेमाल करना; जहाँ पानी सीमित है, वहाँ किसानों और खेती की क्षमता को मज़बूत बनाना; सहायक क्षेत्रों की रक्षा करना और उन्हें मज़बूत करना। ये सरकार की अल नीनो से निपटने की रणनीति के चार प्रमुख आधार हैं। इस रणनीति को ज़मीन पर किसान-वार और भूखंड-वार ‘रायथन्ना मीकोसम’ अभियान के ज़रिये लागू किया जा रहा है। इसकी निगरानी वास्तविक समय में की जा रही है।
धान से दूसरी फ़सलों की ओर कितना बदलाव हुआ?
सरकार ने धान के 1.29 लाख हेक्टेयर रक़बे को दूसरी फ़सलों की ओर स्थानांतरित करने का लक्ष्य रखा है। अब तक इसमें 36,000 हेक्टेयर रक़बे को दूसरी फ़सलों में बदला जा चुका है, जो निर्धारित लक्ष्य का 28 प्रतिशत है। कुल बुवाई रक़बा पिछले साल के 25.63 लाख हेक्टेयर से घटकर इस साल 20.35 लाख हेक्टेयर रह गया है। धान का रक़बा 11.79 लाख हेक्टेयर से घटकर 10.37 लाख हेक्टेयर हुआ है, जबकि दलहन का रक़बा 2.16 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2.66 लाख हेक्टेयर हो गया है। सरकार के अनुसार, बुवाई के रक़बे में यह बदलाव मुख्य रूप से पानी की उपलब्धता के अनुरूप फ़सल पैटर्न में बदलाव का नतीजा है। इसे खेती में सामान्य गिरावट के तौर पर नहीं देखा जा रहा है।