"कृषि भूमि को अतिक्रमण मुक्त कर विकसित होंगी नर्सरियाँ, कृषि मंत्री ने अधिकारियों को दिए निर्देश"
बिहार में कृषि भूमि के बेहतर उपयोग और पौध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग ने नई पहल शुरू की है। कृषि मंत्री मंगल पांडेय ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि कृषि विभाग की अतिक्रमित भूमि को चिन्हित कर उसे अतिक्रमण मुक्त कराया जाए और वहाँ आधुनिक नर्सरियों का विकास किया जाए। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र के विस्तार और किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौध उपलब्ध कराने में नर्सरियों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
पटना स्थित कृषि भवन में उद्यान निदेशालय, क्षेत्रीय कार्यालयों और विभागीय योजनाओं की समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री ने अधिकारियों को नर्सरी विकास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य में फलदार, सब्जी एवं औषधीय पौधों की बढ़ती मांग को देखते हुए आधुनिक और वैज्ञानिक नर्सरी व्यवस्था विकसित करना आवश्यक है।
पौध उत्पादन और उपलब्धता पर रहेगा फोकस
कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण पौधे उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसके लिए नर्सरियों की क्षमता बढ़ाने, पौध उत्पादन में सुधार लाने और वितरण व्यवस्था को मजबूत बनाने की जरूरत है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि विभागीय नर्सरियों की नियमित निगरानी की जाए और उनकी उत्पादकता बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
अतिक्रमण हटाने के लिए जिला प्रशासन से समन्वय
बैठक में मंत्री ने कृषि विभाग की भूमि पर हुए अतिक्रमण को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसी सभी जमीनों का रिकॉर्ड तैयार किया जाए। साथ ही जिला प्रशासन के सहयोग से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तेज की जाए। उन्होंने कहा कि विभागीय भूमि को सुरक्षित रखना और उसका कृषि विकास के लिए उपयोग सुनिश्चित करना जरूरी है।
किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
कृषि विभाग का मानना है कि नर्सरी विकास से न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी, बल्कि राज्य में हरित आवरण बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी। विभाग अब अतिक्रमण मुक्त भूमि को कृषि और उद्यानिकी विकास के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम करेगा।
यदि विभागीय भूमि पर आधुनिक नर्सरियों का विकास होता है तो किसानों को स्थानीय स्तर पर बेहतर गुणवत्ता के पौधे उपलब्ध हो सकेंगे। इससे बागवानी को बढ़ावा मिलेगा, पौधों की लागत कम होगी और राज्य में फल एवं सब्जी उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।