पेट्रोल में 20% से ज़्यादा एथेनॉल मिलाने की सरकारी तैयारी तेज़! डिस्टिलरियों को FCI से मिलेगा 72 लाख टन चावल, टूटे चावल की होगी ई-नीलामी
पेट्रोल में एथेनॉल की मिलावट बढ़ाने और आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। आगामी एथेनॉल आपूर्ति वर्ष (ESY 2026-27) के लिए सरकार ने भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के सरकारी भंडार से 72 लाख टन चावल एथेनॉल बनाने वाली डिस्टिलरियों के लिए उपलब्ध कराने का फ़ैसला किया है। यह मात्रा पिछले आपूर्ति वर्ष 2025-26 में निर्धारित 52 लाख टन की तुलना में काफ़ी अधिक है। सरकार का उद्देश्य देश में एथेनॉल उत्पादन बढ़ाना और भविष्य में पेट्रोल में अधिक एथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य को हासिल करना है।
इसके साथ ही सरकार ने 100 प्रतिशत टूटे (ब्रोकन) चावल के 55 लाख टन अतिरिक्त स्टॉक को ई-नीलामी के ज़रिए बेचने की मंज़ूरी दी है। एथेनॉल निर्माता इस चावल की ख़रीद कर सकेंगे, जिससे जैव ईंधन उत्पादन की लागत कम होने और डिस्टिलरियों को अधिक लाभ मिलने की संभावना है। यह फ़ैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब सरकार पेट्रोल में एथेनॉल की हिस्सेदारी मौजूदा 20 प्रतिशत से आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है और इसके लिए परीक्षण भी जारी हैं।
खाद्य मंत्रालय ने एफसीआई को भेजा आदेश, एथेनॉल के लिए मिलेगा 72 लाख टन चावल
बिजनेस लाइन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 16 जुलाई को खाद्य मंत्रालय ने भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को भेजे गए एक पत्र में बताया कि सक्षम प्राधिकरण ने एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2026-27 (नवंबर 2026 से अक्टूबर 2027) के दौरान डिस्टिलरियों को 72 लाख टन चावल 2,390 रुपये प्रति क्विंटल की दर से उपलब्ध कराने को मंज़ूरी दे दी है।
इसके अलावा, राइस मिलिंग ट्रांसफ़ॉर्मेशन (RMT) योजना के तहत तैयार होने वाले 55 लाख टन 100 प्रतिशत टूटे चावल को खुले बाज़ार में ई-नीलामी के माध्यम से बेचने के लिए भी अलग से निर्धारित किया गया है। 2 जुलाई को सरकार ने विभिन्न श्रेणियों में बिकने वाले चावल और गेहूँ के लिए आरक्षित मूल्य तय किए थे। आरएमटी चावल के लिए 2,000 रुपये प्रति क्विंटल का आधार आरक्षित मूल्य रखा गया था। हालांकि सरकार ने कहा है कि डायनेमिक रिज़र्व प्राइस (DRP) हर तिमाही एक समिति तय करेगी।
टूटे चावल से बने एथेनॉल पर ज़्यादा दाम, डिस्टिलरियों को होगा फ़ायदा
सरकार के इस फ़ैसले का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि तेल विपणन कंपनियाँ (OMCs) एफसीआई के सामान्य चावल से बने एथेनॉल की ख़रीद 58.50 रुपये प्रति लीटर की दर से करती हैं, जबकि 100 प्रतिशत टूटे चावल से बने एथेनॉल के लिए 64 रुपये प्रति लीटर का भुगतान किया जाता है। ई-नीलामी के माध्यम से बिकने वाले एफसीआई के 100 प्रतिशत टूटे चावल के उपयोग पर कोई विशेष प्रतिबंध या अलग व्यवस्था नहीं है। ऐसे में उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि इसका उपयोग भी एथेनॉल उत्पादन में किया जा सकता है, जिससे डिस्टिलरियों की लागत कम होगी और उत्पादन अधिक लाभदायक बन सकता है।
सरकार पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को मौजूदा 20 प्रतिशत से आगे बढ़ाने पर विचार कर रही है और इसके लिए परीक्षण जारी हैं। यदि कमज़ोर मानसून के कारण गन्ने या मक्का का उत्पादन प्रभावित होता है, तो सरकारी भंडार का चावल एथेनॉल उत्पादन के लिए लगातार आपूर्ति सुनिश्चित कर सकता है। वर्तमान में देश में हर साल लगभग 2,000 करोड़ लीटर एथेनॉल का उत्पादन होता है, जबकि 20 प्रतिशत मिश्रण लक्ष्य हासिल करने के लिए तेल विपणन कंपनियों को हर वर्ष 1,050 से 1,100 करोड़ लीटर एथेनॉल की आवश्यकता होती है।
राज्यों, निजी कारोबारियों और सहकारी संस्थाओं के लिए भी तय हुआ चावल का कोटा
सरकार ने राज्य सरकारों, उनकी एजेंसियों और सामुदायिक रसोईघरों को बिना ई-नीलामी के चावल उपलब्ध कराने के लिए जुलाई से अक्तूबर के दौरान 16 लाख टन चावल 2,320 रुपये प्रति क्विंटल की दर से तथा नवंबर 2026 से जून 2027 के बीच 32 लाख टन चावल 2,390 रुपये प्रति क्विंटल की दर से उपलब्ध कराने का फ़ैसला किया है।
हालांकि, नाफेड (NAFED), एनसीसीएफ (NCCF) और केंद्रीय भंडार जैसी राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं को 'भारत' ब्रांड के तहत खुदरा बिक्री के लिए चावल का आवंटन फ़िलहाल टाल दिया गया है। सरकार ने कहा है कि इसकी मात्रा की जानकारी बाद में दी जाएगी। इससे पहले ये संस्थाएँ सरकार द्वारा तय कीमतों पर 'भारत' ब्रांड का चावल बेचती थीं।
खुले बाज़ार में भी होगी बिक्री, 20 लाख टन 10% टूटा चावल भी आएगा ई-नीलामी में
केंद्र सरकार ने निजी कंपनियों और सहकारी संस्थाओं को ई-नीलामी के माध्यम से बेचने के लिए 25 लाख टन चावल भी निर्धारित किया है। जुलाई से अक्तूबर के दौरान इसका आरक्षित मूल्य 2,660 से 2,890 रुपये प्रति क्विंटल रहेगा, जबकि नवंबर 2026 से जून 2027 के बीच यह 2,740 से 2,970 रुपये प्रति क्विंटल होगा। इसी आवंटन के तहत छोटे निजी व्यापारी, उद्यमी और व्यक्तिगत ख़रीदार जुलाई-अक्तूबर में 2,890 रुपये प्रति क्विंटल तथा नवंबर 2026 से जून 2027 के दौरान 2,970 रुपये प्रति क्विंटल की दर से चावल ख़रीद सकेंगे।
इसके अलावा, खाद्य मंत्रालय ने 10 प्रतिशत टूटे दानों वाले 20 लाख टन चावल को भी खुले बाज़ार में ई-नीलामी के ज़रिए बेचने का फ़ैसला किया है। इसका आरक्षित मूल्य जुलाई-अक्तूबर के लिए 3,090 रुपये प्रति क्विंटल और नवंबर 2026 से जून 2027 के लिए 3,180 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है।