एथेनॉल ब्लेंडिंग के बीच सरकार की सफाई, कहा-अनाज से एथेनॉल बनाने से खाद्य सुरक्षा पर नहीं पड़ा असर; जानिए FCI का कितना चावल-मक्का इस्तेमाल

Gaon Connection | Jul 22, 2026, 14:49 IST
केंद्र सरकार ने बताया कि एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2025-26 में जून तक एफसीआई के 39 लाख टन अतिरिक्त चावल और 68 लाख टन मक्का का उपयोग एथेनॉल उत्पादन में किया गया है। सरकार के अनुसार इससे खाद्य सुरक्षा, खाद्यान्न उपलब्धता या खुदरा महँगाई पर कोई असर नहीं पड़ा है। साथ ही सरकार ने साफ़ किया कि बिना एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

देश में एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के तहत चालू एथेनॉल आपूर्ति वर्ष (ईएसवाई 2025-26) के दौरान जून 2026 तक भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के लगभग 39 लाख टन अतिरिक्त चावल और क़रीब 68 लाख टन मक्का का उपयोग एथेनॉल उत्पादन में किया गया है। सरकार का कहना है कि इससे देश में खाद्यान्न उपलब्धता या खाद्य सुरक्षा पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा है।



राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने कहा कि 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य खाद्यान्न उपलब्धता को प्रभावित नहीं कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एथेनॉल उत्पादन के लिए केवल वही अतिरिक्त खाद्यान्न उपयोग में लाया जाता है, जिसकी अनुमति खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा संबंधी ज़रूरतें पूरी करने और निर्धारित बफ़र स्टॉक बनाए रखने के बाद देता है।



अतिरिक्त खाद्यान्न और अनुपयोगी अनाज का हो रहा उपयोग

सुरेश गोपी ने कहा कि एथेनॉल कार्यक्रम "वेस्ट-टू-वेल्थ" अवधारणा पर आधारित है। इसके तहत अतिरिक्त कृषि उपज, क्षतिग्रस्त खाद्यान्न, टूटे हुए चावल, मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त खाद्यान्न तथा अन्य स्वीकृत कच्चे माल का उपयोग एथेनॉल उत्पादन में किया जा रहा है। उनका कहना था कि इससे ऐसे खाद्यान्न का बेहतर उपयोग हो रहा है, जो अन्यथा भंडारण के दौरान अनुपयोगी रह जाते या ख़राब हो जाते।



उन्होंने कहा कि देश में चीनी की औसत खुदरा क़ीमत फ़िलहाल सामान्य दायरे में है। एथेनॉल उत्पादन के लिए केवल अतिरिक्त चीनी का ही उपयोग किया जा रहा है। वर्ष 2024-25 के पिछले चीनी सीज़न की तुलना में खुदरा चीनी की क़ीमतों में सालाना बढ़ोतरी लगभग 2.5 प्रतिशत रही है।



चावल के मोर्चे पर महँगाई या खाद्य सुरक्षा पर असर नहीं

मंत्री ने कहा कि अतिरिक्त एफसीआई चावल को एथेनॉल उत्पादन में भेजने से खुदरा खाद्य महँगाई पर कोई असर नहीं पड़ा है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए), अन्य कल्याणकारी योजनाओं (ओडब्ल्यूएस) और बफ़र स्टॉक की आवश्यकता पूरी करने के बाद ही अतिरिक्त चावल को एथेनॉल उत्पादन के लिए उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने दोहराया कि खाद्य सुरक्षा से जुड़ी सभी ज़रूरतें पूरी होने के बाद ही अतिरिक्त खाद्यान्न के उपयोग की अनुमति दी जाती है और इसी प्रक्रिया का पालन वर्तमान एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम में भी किया जा रहा है।



एथेनॉल ख़रीद बढ़ी, नॉन-ब्लेंडेड पेट्रोल पर कोई प्रस्ताव नहीं

राज्यसभा में एक अन्य प्रश्न के उत्तर में सुरेश गोपी ने बताया कि एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2023-24 (नवंबर 2023 से अक्तूबर 2024) के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने 679.04 करोड़ लीटर एथेनॉल की 48,757.01 करोड़ रुपये में ख़रीद की थी। यह मात्रा एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2024-25 में बढ़कर 1,033.31 करोड़ लीटर हो गई, जिसकी कुल क़ीमत 73,996.48 करोड़ रुपये रही। उन्होंने बताया कि एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2025-26 में जून 2026 तक ओएमसी 705.43 करोड़ लीटर एथेनॉल की 49,577.36 करोड़ रुपये में ख़रीद कर चुकी हैं।



मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर बिना मिश्रण वाला या कम एथेनॉल मिश्रण वाला पेट्रोल उपलब्ध कराने का सरकार के पास कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति और एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम के तहत स्वच्छ, तकनीकी रूप से बेहतर और पर्यावरण के अनुकूल ईंधन की दिशा में चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रही है।

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