Gaon Se: फौजी से किसान बने उत्कृष्ट पांडे, चंदन और हल्दी की खेती से बदली गाँव की तस्वीर
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में एक पूर्व सैनिक ने खेतों का रुख किया। जिंदगी का एक नया अध्याय शुरू किया और एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी रची जो भारत में बहुत से लोगों के लिए मिसाल बन सकती है। जीवन का एक अध्याय समाप्त हुआ और एक नया अध्याय शुरू हुआ खेती का। उन्होंने हल्दी और चंदन की खेती शुरू की और अपनी ही नहीं, न जाने कितने और लोगों के खेतों को एक नया रूप दिया। उनके जीवन को एक नया रंग दिया। बहुत से किसानों को जोड़ा और खेती के जरिए भी आर्थिक सफलता हासिल कर सकते हैं ये साबित किया।
उत्कृष्ट पांडे की कहानी उन लोगों के लिए है जो अक्सर जिंदगी में mid life crisis महसूस करते हैं या जिंदगी में यह महसूस करते हैं कि अब इस रास्ते पर बहुत चल लिए, कुछ नया करना चाहते हैं। हर मिट्टी की अपनी खुशबू होती है लेकिन कुछ मिट्टीयाँ ऐसी होती हैं जो सपनों की भी खुशबू समेट लेती हैं। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ की मिट्टी में आज वो खुशबू है चंदन की खुशबू। यह कहानी है एक नौजवान की जिसने वर्दी छोड़ दी ताकि खेतों में सपनों की खेती कर सके। लोग कहते थे यूपी में चंदन, यह तो पागलपन है। लेकिन उत्कृष्ट पांडे ने कहा, कभी कोशिश की है?
एक फौजी ने क्यों चुनी खेती
उत्तर प्रदेश के Pratapgarh जिले के एक पूर्व सैनिक ने वर्दी उतारने के बाद जिंदगी की नई राह चुनी-खेती की राह। सेना की नौकरी छोड़ने के बाद Utkrisht Pandey ने तय किया कि वे अपने गाँव की मिट्टी में कुछ ऐसा करेंगे जो न सिर्फ उनकी जिंदगी बदले, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी नई उम्मीद लेकर आए।
चंदन की खेती से शुरू हुआ नया सफर
सेना से लौटने के बाद उत्कृष्ट पांडे ने परंपरागत खेती से अलग रास्ता चुना और अपने खेतों में चंदन और हल्दी जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती शुरू की। शुरुआत में लोगों को यह विचार अजीब लगा। कई लोगों ने कहा कि उत्तर प्रदेश में चंदन की खेती करना मुश्किल है, लेकिन उत्कृष्ट ने हार नहीं मानी और प्रयोग जारी रखा। उन्होंने करीब 400 चंदन के पौधों से अपनी खेती की शुरुआत की। धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाई और आज उनके खेतों में हजारों चंदन के पेड़ खड़े हैं।
खेती को बनाया मॉडल
उत्कृष्ट पांडे ने खेती को सिर्फ एक फसल तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने एक समग्र मॉडल तैयार किया, जिसके तहत चंदन के पेड़ों के साथ-साथ खेतों में हल्दी, दालें और अन्य उच्च मूल्य वाली फसलें भी उगाई जाती हैं। इसके लिए उन्होंने Rishigram Organics नाम से एक पहल शुरू की। इस मॉडल में चंदन को लंबी अवधि का निवेश माना जाता है, जबकि बीच की खाली जगह में अन्य फसलों की खेती कर किसान नियमित आमदनी भी हासिल कर सकते हैं।
गाँव के किसानों को मिली प्रेरणा
उत्कृष्ट की पहल का असर आसपास के गाँवों में भी दिखाई देने लगा। जो लोग पहले चंदन की खेती को असंभव मानते थे, वही अब उनके खेत देखने आते हैं और सीखने की कोशिश करते हैं। आज उनके गाँव और आसपास के इलाकों में कई किसानों ने चंदन के पौधे लगाए हैं। कुछ लोगों ने अपने घरों के आंगन में भी दो-चार चंदन के पेड़ लगाए हैं ताकि भविष्य में जरूरत पड़ने पर उन्हें आर्थिक सहारा मिल सके।
खेती से गाँव में रोजगार
उत्कृष्ट पांडे की सोच सिर्फ खेती तक सीमित नहीं है। उनका प्रयास है कि गाँव में ही खेती से जुड़ी पूरी व्यवस्था तैयार हो-उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण और पैकेजिंग तक। इससे गाँव के लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार भी मिल रहा है। उनका मानना है कि अगर किसान सही योजना और नई तकनीकों के साथ खेती करें तो यह भी एक मजबूत आर्थिक विकल्प बन सकता है।
सपनों की खुशबू बन गया चंदन
आज उत्कृष्ट पांडे की कहानी सिर्फ एक किसान की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह इस बात का उदाहरण है कि अगर कोई व्यक्ति अपने गांव और मिट्टी से जुड़कर काम करे तो खेती भी बदलाव का बड़ा माध्यम बन सकती है। प्रतापगढ़ की मिट्टी में आज चंदन की खुशबू के साथ-साथ उम्मीद और आत्मनिर्भरता की खुशबू भी फैल रही है।