Wheat Export: सरकार का बड़ा फैसला, 25 लाख टन अतिरिक्त गेहूं निर्यात को दी मंजूरी, किसानों को मिलेगा बेहतर दाम
किसानों को बेहतर दाम दिलाने और बाजार में संतुलन बनाए रखने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने अतिरिक्त 25 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) गेहूं के निर्यात को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से जहां किसानों को फसल का अच्छा मूल्य मिलने की उम्मीद है, वहीं बाजार में स्टॉक प्रबंधन और सप्लाई संतुलन भी बेहतर होगा। सरकार का कहना है कि यह निर्णय उत्पादन, उपलब्ध भंडार और कीमतों के व्यापक आकलन के बाद लिया गया है।
कुल निर्यात बढ़कर 50 लाख टन
सरकार के इस फैसले के बाद चालू वर्ष में कुल गेहूं निर्यात की अनुमति बढ़कर 50 लाख मीट्रिक टन हो गई है। इसके अलावा 10 लाख मीट्रिक टन गेहूं से बने उत्पादों के निर्यात को भी मंजूरी दी गई है। इससे पहले जनवरी में 5 लाख टन गेहूं उत्पाद और फरवरी में 5 लाख टन गेहूं उत्पाद के साथ 25 लाख टन गेहूं निर्यात को मंजूरी दी गई थी। ताजा फैसले के बाद निर्यात का दायरा और बढ़ गया है, जिससे बाजार में मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाने में मदद मिलेगी।
उत्पादन और रकबा बढ़ने से मिला भरोसा
सरकार के मुताबिक 2025-26 रबी सीजन में गेहूं का रकबा बढ़कर 334.17 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल 328.04 लाख हेक्टेयर था। वहीं कृषि विभाग के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार इस वर्ष गेहूं उत्पादन 1202 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। बेहतर उत्पादन और पर्याप्त भंडार को देखते हुए सरकार ने निर्यात बढ़ाने का फैसला लिया है, ताकि अतिरिक्त स्टॉक का बेहतर उपयोग हो सके।
किसानों को लाभ और बाजार में स्थिरता की उम्मीद
सरकार का मानना है कि अतिरिक्त निर्यात की अनुमति से बाजार में नकदी प्रवाह बढ़ेगा, स्टॉक प्रबंधन आसान होगा और किसानों को अपनी फसल औने-पौने दाम पर बेचने की मजबूरी नहीं होगी। खासकर कटाई के समय जब बाजार में फसल की आवक ज्यादा होती है, तब यह फैसला किसानों के लिए राहत साबित हो सकता है। सरकार ने यह भी कहा है कि आगे भी ऐसे संतुलित कदम उठाए जाएंगे, जिससे किसानों के हित और उपभोक्ताओं की जरूरतों के बीच संतुलन बना रहे और देश की खाद्य सुरक्षा भी सुरक्षित रहे।