अनुदानित बीज वितरण में यूपी ने हासिल किया 93% लक्ष्य, धान और ढैंचा का शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल, 1.83 लाख क्विंटल बीज बाँटे गए
उत्तर प्रदेश में खरीफ़ सीज़न 2026 की बुवाई शुरू होने से पहले किसानों को समय पर बीज उपलब्ध कराने की कवायद तेज़ हो गई है। राज्य सरकार के अनुसार, अनुदानित बीज वितरण अभियान का करीब 93 प्रतिशत लक्ष्य पूरा कर लिया गया है। इससे किसानों को समय पर प्रमाणित बीज मिल रहे हैं, जिससे बुवाई में तेज़ी आने और बेहतर उत्पादन की उम्मीद बढ़ी है।
सरकार का कहना है कि खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए बीज वितरण से लेकर सिंचाई, कृषि यंत्रीकरण, फसल बीमा, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद और समयबद्ध भुगतान जैसी व्यवस्थाओं को लगातार मज़बूत किया जा रहा है। इसका उद्देश्य किसानों को खेती के हर चरण में बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना और उनकी आय बढ़ाने में मदद करना है।
धान और ढैंचा का लक्ष्य लगभग पूरा, दलहन-तिलहन के बीज भी पहुँचे किसानों तक
कृषि विभाग के आँकड़ों के अनुसार, खरीफ़ सीज़न 2026 के लिए 1,97,575 क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण का लक्ष्य तय किया गया था। इसके मुकाबले अब तक 1,83,104 क्विंटल बीज किसानों तक पहुँचाया जा चुका है। धान की बुवाई के लिए 69,280 क्विंटल बीज उपलब्ध कराया गया था, जिसमें से 69,049 क्विंटल बीज का वितरण हो चुका है। वहीं मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने वाली हरी खाद फसल ढैंचा का 27,615 क्विंटल बीज भी पूरी तरह किसानों तक पहुँचाया जा चुका है। कृषि विभाग का मानना है कि ढैंचा की खेती से मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होगी और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा उड़द, मूंग, अरहर, तिल, मूंगफली, सोयाबीन, बाजरा, ज्वार, कोदो, सांवा, मडुआ (रागी) और काकुन/कुटकी जैसी खरीफ़ फसलों के बीजों का भी बड़े स्तर पर वितरण किया गया है। दलहन और तिलहन फसलों के लिए उपलब्ध 1,69,960 क्विंटल बीज में से 1,55,489 क्विंटल का वितरण पूरा हो चुका है, जो कुल लक्ष्य का लगभग 91 प्रतिशत है।
खेती को लाभकारी बनाने पर ज़ोर, कई योजनाओं का मिल रहा लाभ
राज्य सरकार का कहना है कि किसानों की आय बढ़ाने और खेती की लागत कम करने के लिए कई स्तरों पर काम किया जा रहा है। सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा, प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं का लाभ किसानों तक पहुँचाया जा रहा है। इसके साथ ही मंडियों के आधुनिकीकरण और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीद की व्यवस्था को भी मज़बूत किया गया है। गेहूँ, धान, बाजरा, ज्वार और अन्य फसलों की सरकारी खरीद के लिए ऑनलाइन पंजीकरण और पारदर्शी भुगतान प्रणाली लागू होने से किसानों को अपनी उपज बेचने और भुगतान प्राप्त करने में पहले की तुलना में अधिक सुविधा मिल रही है।
सरकार का मानना है कि समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध होने, बेहतर कृषि सुविधाओं और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से इस खरीफ़ सीज़न में उत्पादन बढ़ने के साथ किसानों को आर्थिक रूप से भी लाभ मिलने की उम्मीद है।