खरीफ सीजन में खाद की बिक्री 13% घटी, खरीफ बुवाई और कमजोर मानसून से उत्पादन पर चिंता, 338 ज़िलों में बारिश कम
खरीफ फसलों की बुवाई का सबसे अहम महीना माने जाने वाले जुलाई में देश में प्रमुख उर्वरकों की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई है। यूरिया, डीएपी, एमओपी और कॉम्प्लेक्स उर्वरकों की बिक्री कम होने से खरीफ फसलों के उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ गई है। जुलाई 2026 में कुल उर्वरक बिक्री 13 प्रतिशत घटकर 77.44 लाख टन रह गई, जबकि पिछले साल इसी महीने में यह 89.41 लाख टन थी। इसी दौरान खरीफ फसलों का कुल बुवाई क्षेत्र भी पिछले साल की तुलना में कम है और मानसूनी बारिश में कमी का असर कई इलाकों में बना हुआ है।
कृषि क्षेत्र के लिए चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि कई राज्यों में फसलों की समय पर बुवाई का अनुकूल समय निकल चुका है। देर से बुवाई से क्षेत्रफल की कमी कुछ हद तक पूरी हो सकती है, लेकिन इससे उपज पर असर पड़ने की आशंका है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के पूर्व उप महानिदेशक के मुताबिक, कई जिलों में बारिश की कमी 40 प्रतिशत से अधिक है और प्रमुख फसलों की उपज में 5-7 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है। हालांकि, फर्टिलाइज़र एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FAI) के महानिदेशक एसके चौधरी ने कहा है कि किसानों को उपलब्ध पोषक तत्व सामान्य उत्पादन के लिए पर्याप्त हो सकते हैं।
जुलाई में उर्वरक बिक्री में 13 प्रतिशत की गिरावट
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 में यूरिया की बिक्री 9 प्रतिशत घटकर 49.28 लाख टन रह गई। डीएपी की बिक्री 1.4 प्रतिशत घटकर 10.7 लाख टन रही। एमओपी की बिक्री 21 प्रतिशत गिरकर 1.95 लाख टन और कॉम्प्लेक्स उर्वरकों की बिक्री 29 प्रतिशत घटकर 15.51 लाख टन रह गई। चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से जुलाई के बीच कुल उर्वरक खपत भी 9 प्रतिशत घटकर 191.44 लाख टन रही, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 210.6 लाख टन थी। इस दौरान यूरिया, एमओपी और कॉम्प्लेक्स उर्वरकों की बिक्री कम हुई, जबकि डीएपी की बिक्री करीब 27 लाख टन पर लगभग स्थिर रही।
खरीफ बुवाई का क्षेत्र 1.8 प्रतिशत घटा
इस खरीफ सीजन में अधिकांश प्रमुख फसलों का बुवाई क्षेत्र पिछले साल की तुलना में पीछे चल रहा है। 7 अगस्त तक खरीफ फसलों की कुल बुवाई 967.92 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 985.89 लाख हेक्टेयर थी। यानी बुवाई क्षेत्र में करीब 1.8 प्रतिशत की कमी है। उड़द, सोयाबीन और मूंगफली को छोड़कर प्रमुख खरीफ फसलों का रकबा इस साल कम है। केंद्र सरकार ने खरीफ 2026 के लिए कुल 176.16 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसमें 123.15 मिलियन टन चावल, 8.4 मिलियन टन दालें, 31.04 मिलियन टन मक्का और 13.56 मिलियन टन पोषक अनाज शामिल हैं। तिलहन के लिए कुल 28.92 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इसमें सोयाबीन का लक्ष्य 14.85 मिलियन टन और मूंगफली का 11.35 मिलियन टन है।
मानसून की कमी से कई जिलों में बुवाई पर असर
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून से 12 अगस्त के बीच देश में 485.5 मिलीमीटर बारिश हुई है, जो सामान्य से 12 प्रतिशत कम है। देश के 741 जिलों में से 338 जिलों में 20 प्रतिशत से अधिक बारिश की कमी दर्ज की गई है। देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 16 में सामान्य से कम बारिश हुई है। इन क्षेत्रों का देश के कुल भू-भाग में करीब 35 प्रतिशत हिस्सा है। 112 जिलों में सामान्य बारिश के मुकाबले 60 प्रतिशत या उससे भी कम बारिश हुई है। कुछ जिलों में बारिश की कमी 91 प्रतिशत तक पहुंच गई है। वहीं, 191 जिलों में बारिश की कमी 30 प्रतिशत या उससे अधिक दर्ज की गई है।
बारिश में अनियमितता ने किसानों के उर्वरक इस्तेमाल के फैसले को भी प्रभावित किया है। जिन क्षेत्रों में बुवाई कम हुई है, वहां उर्वरकों की मांग भी स्वाभाविक रूप से घट सकती है।
देर से बुवाई से उपज पर पड़ सकता है असर
फसलों की बुवाई में देरी से कुल रकबा बाद में पूरा किया जा सकता है, लेकिन समय पर बुवाई अच्छी उपज के लिए महत्वपूर्ण है। इस साल कई राज्यों में अलग-अलग फसलों की बुवाई की तय अवधि प्रभावित हुई है। ऐसे में देर से बोई गई फसलों की उपज पर असर पड़ने की आशंका है।