क्या अब किसानों के खाते में सीधे आएगी खाद की सब्सिडी? सरकार ने संसद में बताई पूरी बात

Gaon Connection | Jul 24, 2026, 19:01 IST
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि फ़िलहाल उर्वरक सब्सिडी सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजने की कोई योजना नहीं है। सरकार के अनुसार, पात्र किसानों का डेटाबेस अभी पूरी तरह तैयार नहीं है, इसलिए मौजूदा डीबीटी व्यवस्था ही जारी रहेगी, जिसके तहत आधार प्रमाणीकरण के बाद उर्वरक कंपनियों को सब्सिडी का भुगतान किया जाता है। सरकार ने यह भी बताया कि खरीफ़ 2026 के दौरान उत्तर प्रदेश में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है।

केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि फ़िलहाल उर्वरक सब्सिडी सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजने की कोई योजना नहीं है। सरकार का कहना है कि देशभर में पात्र किसानों का डेटाबेस अभी पूरी तरह तैयार नहीं हुआ है, इसलिए प्रत्यक्ष नक़द हस्तांतरण (डायरेक्ट कैश ट्रांसफ़र) पर अभी विचार नहीं किया जा रहा। मौजूदा व्यवस्था के तहत उर्वरक सब्सिडी पहले की तरह उर्वरक कंपनियों को ही दी जाती रहेगी, लेकिन यह भुगतान तभी होगा जब आधार प्रमाणीकरण के बाद लाभार्थियों को उर्वरक की वास्तविक बिक्री दर्ज होगी।



लोकसभा में रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने लिखित उत्तर में बताया कि सरकार की वर्तमान प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रणाली पहले की तरह जारी रहेगी। इस व्यवस्था में देशभर के उर्वरक बिक्री केंद्रों पर लगाए गए पॉइंट ऑफ़ सेल (पीओएस) उपकरणों के माध्यम से आधार आधारित प्रमाणीकरण के बाद ही बिक्री दर्ज की जाती है और उसी के आधार पर संबंधित उर्वरक कंपनियों को सब्सिडी जारी की जाती है।



किसानों के खातों में सीधे सब्सिडी भेजने की फ़िलहाल नहीं है योजना

सरकार ने कहा कि उर्वरक सब्सिडी सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजने की व्यवस्था अभी लागू नहीं की जाएगी। इसके पीछे मुख्य वजह यह बताई गई है कि पात्र किसानों का डेटाबेस अभी पूरी तरह तैयार नहीं है। सरकार ने यह जानकारी लोकसभा में उस प्रश्न के जवाब में दी, जिसमें पूछा गया था कि क्या उर्वरक सब्सिडी को अधिक पारदर्शी और सरल बनाने के लिए इसे सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजने पर विचार किया जा रहा है, ताकि खेती की लागत कम हो सके।



मौजूदा डीबीटी व्यवस्था के तहत कंपनियों को मिलती है सब्सिडी

जगत प्रकाश नड्डा ने बताया कि वर्तमान डीबीटी प्रणाली के तहत विभिन्न श्रेणी के उर्वरकों पर 100 प्रतिशत सब्सिडी उर्वरक कंपनियों को जारी की जाती है। यह भुगतान तभी किया जाता है, जब लाभार्थी किसानों को आधार प्रमाणीकरण के बाद पीओएस मशीनों के माध्यम से उर्वरक की वास्तविक बिक्री दर्ज हो जाती है। सरकार के अनुसार, देश के प्रत्येक उर्वरक खुदरा बिक्री केंद्र पर पीओएस मशीनें स्थापित हैं, जिनके माध्यम से आधार सत्यापन के बाद ही सब्सिडी का दावा स्वीकार किया जाता है।



उत्तर प्रदेश में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता का दावा

सरकार ने संसद को यह भी बताया कि मौजूदा खरीफ़ 2026 सीज़न के दौरान उत्तर प्रदेश में यूरिया, डीएपी, एमओपी और एनपीकेएस सहित सभी प्रमुख उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है। सरकार का कहना है कि किसानों को उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है।



कालाबाज़ारी पर कार्रवाई, हज़ारों छापे और दर्जनों एफ़आईआर

सरकार ने उर्वरकों की कालाबाज़ारी, जमाखोरी, घटिया गुणवत्ता और डायवर्ज़न के मामलों पर की गई कार्रवाई का भी ब्यौरा दिया। रसायन एवं उर्वरक मंत्री ने बताया कि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग राज्य सरकारों के साथ मिलकर ऐसे मामलों की साप्ताहिक निगरानी करता है। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में अप्रैल 2026 से 17 जुलाई 2026 तक 9,687 छापे मारे गए। इस दौरान 1,083 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, 548 लाइसेंस निलंबित या रद्द किए गए और नियमों के उल्लंघन के मामलों में 38 एफ़आईआर दर्ज की गईं।

Tags:
  • Fertiliser Subsidy
  • DBT in Fertilisers
  • JP Nadda
  • Direct Benefit Transfer
  • Fertiliser Subsidy Scheme
  • Aadhaar Authentication
  • Fertiliser Distribution
  • Kharif 2026
  • Uttar Pradesh Fertiliser
  • Agriculture News