Fish Farming: श्रीनगर में कोल्ड वाटर फिशरीज पर पहला राष्ट्रीय सम्मेलन, अब ड्रोन से होगा मछलियों का ट्रांसपोर्ट
भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के तहत आने वाले मत्स्य विभाग की ओर से 14 मार्च 2026 को Sher-e-Kashmir International Convention Centre में ठंडे पानी की मछली पालन (कोल्ड वाटर फिशरीज) पर देश का पहला राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इस सम्मेलन का मकसद भारत में ठंडे पानी में होने वाली मछली पालन की संभावनाओं को बढ़ावा देना और इसके विकास के लिए नई रणनीति तैयार करना है।
पहाड़ी राज्यों में मछली पालन की अच्छी संभावना
भारत में ठंडे पानी की मछली पालन ज्यादातर हिमालयी और पहाड़ी इलाकों में होती है। इसमें Jammu and Kashmir, Ladakh, Himachal Pradesh, Uttarakhand, Arunachal Pradesh और Sikkim जैसे राज्य शामिल हैं। देश के करीब 5.33 लाख वर्ग किलोमीटर पहाड़ी इलाके में साफ नदियां, झीलें और जलाशय मौजूद हैं, जो इस तरह की मछलियों के लिए बहुत अनुकूल माने जाते हैं। आपको बता दें कि भारत में 278 से ज्यादा ठंडे पानी की मछली प्रजातियाँ पाई जाती हैं। ये न सिर्फ लोगों की आजीविका का साधन हैं, बल्कि पोषण और जैव विविधता के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।
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पीएम मत्स्य संपदा योजना से मिल रहा समर्थन
सरकार ने Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana के तहत ठंडे पानी की मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसके लिए पहाड़ी राज्यों में करीब 2,299.56 करोड़ रुपये का निवेश स्वीकृत किया गया है।
इस राशि का उपयोग हैचरी बढ़ाने, मछली बीज और चारा व्यवस्था सुधारने, रेसवे बनाने, कोल्ड चेन और परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने में किया जा रहा है। इससे आधुनिक तकनीक के साथ मछली पालन को बढ़ावा मिल रहा है।
किसानों और संगठनों को मिलेगा सम्मान
सम्मेलन के दौरान केंद्रीय मंत्री पारंपरिक और प्रगतिशील मछुआरों, मत्स्य सहकारी समितियों और किसान क्रेडिट कार्ड से जुड़े लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ देंगे। साथ ही Jammu and Kashmir के अच्छे काम करने वाले मत्स्य संगठनों और स्टार्टअप्स को सम्मानित भी किया जाएगा।
प्रीमियम मछलियों पर सरकार का फोकस
भारत में Rainbow Trout, Brown Trout और Mahseer जैसी ठंडे पानी की मछलियाँ काफी महंगी और माँग वाली होती हैं। पिछले दस वर्षों में ट्राउट मछली का उत्पादन करीब 1.8 गुना बढ़ा है। इसके बावजूद भारत को सैल्मन और प्रीमियम ट्राउट जैसी मछलियाँ बाहर से मंगानी पड़ती हैं। इसी को देखते हुए सरकार ने राष्ट्रीय परिकल्पना 2030 के तहत ट्राउट और महसीर जैसी मछलियों का उत्पादन दोगुना करने का लक्ष्य रखा है।
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मत्स्य क्षेत्र में बड़ा निवेश
पिछले दस साल में सरकार ने मत्स्य क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए कई योजनाएं चलाई हैं, जिनमें Blue Revolution, Fisheries and Aquaculture Infrastructure Development Fund और Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana शामिल हैं। इन योजनाओं के जरिए करीब 39,000 करोड़ रुपये निवेश की योजना बनाई गई है, जिनमें से 34,266 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है।
ड्रोन से मछलियों का परिवहन
सरकार भविष्य में पहाड़ी और दूर-दराज के इलाकों में मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल करने की भी योजना बना रही है। एक पायलट प्रोजेक्ट में पाया गया है कि ड्रोन से मछलियों और उनके बीज को एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाने में नुकसान कम होता है और किसानों को बाजार तक जल्दी पहुंच मिलती है।
कुल मिलाकर इस राष्ट्रीय सम्मेलन से नीति बनाने वाले लोगों, वैज्ञानिकों और मछली पालन से जुड़े लोगों को एक मंच मिलेगा, जहाँ ठंडे पानी की मछली पालन को आगे बढ़ाने के लिए नई योजनाएं और रणनीति तय की जाएगी। इससे पहाड़ी इलाकों में रोजगार बढ़ने और लोगों की आय में सुधार की उम्मीद है।