बिहार में मछली पालन को मिलेगा बढ़ावा: 5 विशेष क्लस्टर बनेंगे, 50,200 मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य

Mansi | Aug 13, 2026, 16:12 IST
बिहार सरकार मछली उत्पादन को प्रोत्साहित करने और रोजगार के अवसरों को सृजित करने की दिशा में एक महत्वाकांक्षी योजना बना रही है। विजन 2030 के तहत, आठ महत्वपूर्ण परियोजनाओं के माध्यम से मछली उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। सीवान से मुंगेर क्षेत्र में, स्थानीय स्थितियों के अनुसार मछली पालन क्लस्टर विकसित किए जाएंगे।

बिहार में मछली पालन को सिर्फ़ पारंपरिक रोज़गार तक सीमित रखने के बजाय इसे किसानों और मछुआरा परिवारों की आय बढ़ाने का बड़ा माध्यम बनाने की तैयारी है। राज्य सरकार अब मछली उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ प्रसंस्करण, कारोबार और रोज़गार के नए अवसर तैयार करने पर भी ज़ोर दे रही है। इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना में ‘विजन 2030 - बिहार मत्स्य प्राथमिकता परियोजनाओं’ की समीक्षा की।



सरकार का लक्ष्य आने वाले सालों में बिहार को देश के प्रमुख अंतर्देशीय मछली पालन राज्यों में शामिल करना है। इसके लिए अलग-अलग इलाक़ों की ज़रूरत और वहां मौजूद जल संसाधनों को ध्यान में रखकर योजनाएँ तैयार की जा रही हैं। सरकार की कोशिश है कि मछली उत्पादन बढ़ने का सीधा फ़ायदा ग्रामीण परिवारों की कमाई और रोज़गार पर भी दिखाई दे।



8 परियोजनाओं से बढ़ेगा मछली उत्पादन

‘विजन 2030’ के तहत मछली पालन क्षेत्र के विकास के लिए 8 प्राथमिकता वाली परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की योजना है। इन परियोजनाओं के तहत करीब 1,848.75 हेक्टेयर क्षेत्र में सीधे विकास और लगभग 9,357 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रभावी विकास का प्रस्ताव है। सरकार ने इन परियोजनाओं के ज़रिए 50,200 मीट्रिक टन मछली उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसके लिए मत्स्य एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष यानी FIDF और प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना यानी PMMSY से वित्तीय मदद लेने की योजना है। हालाँकि, इस योजना का मक़सद सिर्फ़ ज़्यादा मछली पैदा करना नहीं है। मछली को बाज़ार तक पहुँचाने, उसके प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा देने की तैयारी है। इससे मत्स्य पालन से जुड़े कारोबार का दायरा बढ़ सकता है।



सीवान से मुंगेर तक बनेंगे अलग-अलग तरह के क्लस्टर

बिहार के हर इलाक़े में एक जैसी परिस्थितियाँ नहीं हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार अलग-अलग जिलों में उनकी स्थानीय परिस्थितियों के मुताबिक़ मछली पालन के क्लस्टर विकसित करेगी। सीवान में आर्द्रभूमि यानी वेटलैंड के समग्र विकास पर काम होगा। वहीं सारण में स्कैंपी यानी बड़े झींगे के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विशेष क्लस्टर विकसित किया जाएगा। मुंगेर में केज कल्चर के ज़रिए मछली पालन पर ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा मिथिला क्षेत्र, विशेष रूप से मधुबनी, में वेटलैंड आधारित मछली पालन को आगे बढ़ाने की योजना है। मोतिहारी में व्यापक स्तर पर मछली क्लस्टर विकसित करने का प्रस्ताव है।



मछुआरों की कमाई बढ़ाने पर भी रहेगा ध्यान

सरकार की योजना में उत्पादन के साथ उन लोगों की आय बढ़ाना भी अहम हिस्सा है, जो सीधे मछलाी पालन से जुड़े हैं। समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से आधुनिक और वैज्ञानिक तरीक़ों को बढ़ावा देने के साथ मछुआरा परिवारों की आमदनी बढ़ाने के लिए चरणबद्ध योजना तैयार करने को कहा। मछुआरा सहकारी समितियों को मज़बूत करने पर भी ज़ोर दिया गया। इसके लिए सदस्यों के कौशल विकास, तकनीकी जानकारी और बेहतर प्रबंधन क्षमता बढ़ाने की बात कही गई है। इससे समितियाँ अपने काम को बेहतर ढंग से संचालित कर सकेंगी और मत्स्य पालन से जुड़े लोगों को अधिक अवसर मिल सकते हैं।



तालाब से बाज़ार तक पूरी व्यवस्था मजबूत करने की कोशिश

मछली पालन में उत्पादन बढ़ जाना ही पर्याप्त नहीं है। अगर मछली को सही समय पर बेहतर बाज़ार मिले, उसका प्रसंस्करण हो और उससे जुड़े उत्पादों का मूल्य बढ़ाया जा सके, तभी किसानों और मछुआरों की कमाई में बड़ा बदलाव आ सकता है। इसी वजह से ‘विजन 2030’ में उत्पादन के साथ प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और व्यापार को भी महत्व दिया गया है।



बिहार में जल संसाधनों और मछली पालन की संभावनाओं को देखते हुए सरकार इस क्षेत्र को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की कोशिश कर रही है। अब चुनौती इन परियोजनाओं को ज़मीन पर प्रभावी ढंग से लागू करने की होगी। अगर योजनाएँ तय लक्ष्य के मुताबिक़ आगे बढ़ती हैं, तो आने वाले वर्षों में मत्स्य पालन बिहार के ग्रामीण परिवारों के लिए आय और रोज़गार का और बड़ा साधन बन सकता है।

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