Flood Alert: शारदा-घाघरा उफान पर,12 जिलों के 166 गाँव प्रभावित; राहत-बचाव के लिए 86 टीमें तैनात
उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के बीच कई इलाक़ों में बाढ़ का ख़तरा बढ़ गया है। शारदा और घाघरा नदी का जलस्तर कुछ जगहों पर खतरे के निशान से ऊपर पहुँच गया है। राहत आयुक्त कार्यालय की रिपोर्ट के मुताबिक़, प्रदेश के 12 ज़िले और 166 गाँव बाढ़ से प्रभावित हैं। करीब 64,402 लोग इसकी चपेट में आए हैं। हालात को देखते हुए प्रशासन ने राहत और बचाव की तैयारियाँ तेज़ कर दी हैं।
प्रभावित इलाक़ों में लोगों को सुरक्षित जगहों तक पहुँचाने से लेकर भोजन, स्वास्थ्य सेवाएँ और ज़रूरी सामान उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए की कुल 86 टीमें मैदान में उतारी गई हैं। साथ ही 1,586 बाढ़ चौकियाँ और 1,263 शरणालय तैयार किए गए हैं।
शारदा और घाघरा नदी का बढ़ा जलस्तर
राहत आयुक्त कार्यालय की 16 अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार, लखीमपुर खीरी के पलियाकलां में शारदा नदी और बाराबंकी के एल्गिनब्रिज के पास घाघरा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। दोनों नदियों के जलस्तर पर लगातार नज़र रखी जा रही है। बारिश की बात करें तो 1 जून से 16 अगस्त के बीच प्रदेश में कुल 381 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई है। इस अवधि में सामान्य बारिश 488.9 मिलीमीटर मानी जाती है। यानी पूरे मानसून सीज़न में अब तक प्रदेश में सामान्य से करीब 22 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इसके बावजूद हाल के दिनों में कुछ इलाक़ों में अचानक तेज़ बारिश ने बाढ़ और जलभराव की स्थिति पैदा कर दी है।
पिछले 24 घंटे में लखीमपुर खीरी में सबसे अधिक 92.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा बहराइच में 62.5, शाहजहाँपुर में 45.1, संभल में 41.8, चित्रकूट में 41.5 और लखनऊ में 40.9 मिलीमीटर बारिश हुई। फर्रुखाबाद, बलरामपुर, हमीरपुर, श्रावस्ती और बिजनौर समेत कई अन्य ज़िलों में भी बारिश दर्ज की गई है। आँकड़ों के मुताबिक़, 20 ज़िलों में सामान्य से 60% से अधिक बारिश हुई, जबकि छह ज़िलों में बारिश सामान्य से 20 से 59% तक अधिक रही।
वहीं, कुछ ज़िलों में बारिश सामान्य से काफ़ी कम रही और 22 ज़िलों में पिछले 24 घंटे के दौरान बारिश दर्ज ही नहीं हुई।
कुछ ज़िलों में पूरे मानसून सीज़न में ज़्यादा बारिश
1 जून से 16 अगस्त तक के आँकड़ों पर नज़र डालें तो संभल में सामान्य से करीब 75 %, मेरठ में 73.81% और मुज़फ़्फ़रनगर में 69.22% अधिक बारिश दर्ज की गई है। एटा और फ़िरोज़ाबाद में भी सामान्य से अधिक बारिश हुई है। इसके उलट लखनऊ, फ़र्रुख़ाबाद और बरेली समेत कई ज़िलों में मानसून के दौरान अब तक सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। यानी प्रदेश में बारिश का वितरण एक जैसा नहीं रहा है।
एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पीएसी की 86 टीमें संभाल रहीं मोर्चा
बाढ़ प्रभावित इलाक़ों में राहत और बचाव के लिए एनडीआरएफ की 18, एसडीआरएफ की 16 और पीएसी की 52 टीमें तैनात की गई हैं। अलग-अलग ज़िलों में इन टीमों को ज़रूरत के हिसाब से लगाया गया है। प्रयागराज में एनडीआरएफ की तीन टीमें तैनात हैं। इसके अलावा लखीमपुर खीरी, बाराबंकी, बहराइच, अयोध्या, बलिया, गोंडा, गोरखपुर, शाहजहाँपुर, वाराणसी और लखनऊ समेत कई ज़िलों में भी बचाव दल काम कर रहे हैं। लखनऊ में डूबने की घटनाओं से निपटने के लिए विशेष टीम भी तैनात की गई है।
1,586 बाढ़ चौकियाँ और 1,263 शरणालय तैयार
प्रशासन ने प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने के लिए 1,586 बाढ़ चौकियाँ और 1,263 शरणालय तैयार किए हैं। इनमें से 40 शरणालय फिलहाल संचालित किए जा रहे हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुँचाने के लिए 308 वितरण केंद्र बनाए गए हैं। नावों और मोटरबोट की मदद से भी लोगों को सुरक्षित निकालने और ज़रूरी सामान पहुँचाने का काम किया जा रहा है। राहत-बचाव अभियान में 5,849 नावें और 1,101 मोटरबोट लगाई गई हैं। इसके अलावा प्रभावित लोगों के इलाज और स्वास्थ्य संबंधी ज़रूरतों के लिए 69 मेडिकल टीमें और 51 एंबुलेंस तैनात हैं। प्रशासन की ओर से अब तक 15,133 खाद्यान्न पैकेट और 24,266 लंच पैकेट बाँटे गए हैं। इसके साथ ही ओआरएस के 22,720 पैकेट और 40,860 क्लोरीन टैबलेट भी वितरित की गई हैं।
पशुओं के लिए भी राहत की व्यवस्था
बाढ़ का असर सिर्फ़ लोगों तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक़ करीब 3,502 पशु प्रभावित हुए हैं। उनके लिए 154 क्विंटल भूसा उपलब्ध कराया गया है। वहीं, बाढ़ के कारण अब तक 69 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना है। राहत आयुक्त कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल बाढ़ से किसी जनहानि या पशुहानि की सूचना नहीं है। फ़िलहाल प्रशासन का सबसे बड़ा फ़ोकस शारदा और घाघरा के जलस्तर पर है। दोनों नदियाँ कुछ स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, ऐसे में आसपास के इलाक़ों में निगरानी बढ़ाई गई है। राहत-बचाव दल, मेडिकल टीमें, नावें और शरणालय तैयार हैं, ताकि अगर किसी इलाक़े में पानी और बढ़ता है तो लोगों को जल्द सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जा सके। फिलहाल सरकार का ज़ोर राहत, बचाव और प्रभावित परिवारों तक ज़रूरी सुविधाएँ पहुँचाने पर है।