जून में 30% घटा खाद्य तेल आयात, पाम और सोयाबीन तेल की खरीद में बड़ी गिरावट, जानिये कारण
भारत में खाद्य तेल आयात में जून 2026 के दौरान उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। पाम ऑयल और सोयाबीन तेल की कम खरीद के कारण देश का कुल खाद्य तेल आयात एक साल पहले की तुलना में 30 प्रतिशत घट गया। उद्योग का मानना है कि वैश्विक स्तर पर जैव ईंधन (बायोफ्यूल) नीतियों, अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी और पाम ऑयल की घटती मूल्य प्रतिस्पर्धा का सीधा असर भारतीय आयात पर पड़ा है।
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के अनुसार, जून 2026 में भारत ने 11.11 लाख टन खाद्य तेल का आयात किया, जबकि जून 2025 में यह 15.97 लाख टन था। हालांकि, तेल वर्ष 2025-26 (नवंबर से जून) के पहले आठ महीनों में कुल खाद्य तेल आयात 103.88 लाख टन रहा, जो पिछले तेल वर्ष की समान अवधि के 97.29 लाख टन की तुलना में 7 प्रतिशत अधिक है।
पाम और सोयाबीन तेल की मांग घटी, बायोफ्यूल नीतियों से बढ़ीं वैश्विक कीमतें
एसईए के कार्यकारी निदेशक बी. वी. मेहता ने बताया कि जून में पाम ऑयल आयात घटकर 4.87 लाख टन रह गया, जबकि मई 2026 में यह 5.46 लाख टन और जून 2025 में 9.52 लाख टन था। वहीं सोयाबीन तेल का आयात भी मई के 4.93 लाख टन से घटकर जून में 3.80 लाख टन रह गया। उन्होंने कहा कि पाम ऑयल और सॉफ्ट ऑयल (जैसे सोयाबीन तेल) के बीच कीमत का अंतर घटकर 50 डॉलर प्रति टन से भी कम रह गया, जिससे पाम ऑयल की मांग प्रभावित हुई। इसके अलावा इंडोनेशिया, मलेशिया और अमेरिका में लागू बायोफ्यूल अनिवार्यता के कारण बड़ी मात्रा में वनस्पति तेल खाद्य क्षेत्र के बजाय ईंधन उत्पादन में इस्तेमाल हो रहा है। इससे वैश्विक स्पॉट कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी हुई और भारतीय आयातकों की खरीद प्रभावित हुई।
नेपाल से रिफाइंड खाद्य तेल का आयात भी जारी रहा। नवंबर से अप्रैल 2025-26 के दौरान नेपाल ने भारत को लगभग 3.38 लाख टन रिफाइंड तेल निर्यात किया, जिसमें 2.97 लाख टन रिफाइंड सोयाबीन तेल, 19,911 टन रिफाइंड सूरजमुखी तेल, 18,295 टन आरबीडी पामोलीन और 3,081 टन रेपसीड तेल शामिल था। मई 2026 में नेपाल से लगभग 54,000 टन और जून में करीब 32,000 टन रिफाइंड तेल भारत आया। दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार समझौते (SAFTA) के तहत नेपाल को भारत को निर्यात पर आयात शुल्क में छूट मिलती है।
कच्चे खाद्य तेल का आयात बढ़ा, मलेशिया और इंडोनेशिया रहे सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता
तेल वर्ष 2025-26 के पहले आठ महीनों में भारत ने केवल 3.68 लाख टन रिफाइंड खाद्य तेल आयात किया, जबकि कच्चे खाद्य तेल का आयात 100.18 लाख टन रहा। पिछले वर्ष की समान अवधि में यह क्रमशः 14.99 लाख टन और 82.29 लाख टन था। इस दौरान कुल आयात में रिफाइंड तेल की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत से घटकर 4 प्रतिशत रह गई, जबकि कच्चे तेल की हिस्सेदारी 85 प्रतिशत से बढ़कर 96 प्रतिशत हो गई। इसका प्रमुख कारण कच्चे पाम ऑयल के आयात में वृद्धि रहा। पहले आठ महीनों में कच्चा पाम ऑयल 49.42 लाख टन के साथ सबसे अधिक आयातित खाद्य तेल रहा। इसके बाद कच्चा और रिफाइंड सोयाबीन तेल 32.73 लाख टन तथा कच्चा और रिफाइंड सूरजमुखी तेल 20.94 लाख टन आयात किया गया।
मलेशिया ने भारत को 19.81 लाख टन पाम ऑयल निर्यात किया, जिसमें 19.58 लाख टन कच्चा पाम ऑयल और 8,000 टन आरबीडी पामोलीन शामिल था। वहीं इंडोनेशिया से 19.04 लाख टन पाम ऑयल आयात हुआ, जिसमें 18.79 लाख टन कच्चा पाम ऑयल और 24,983 टन आरबीडी पामोलीन शामिल रहा। अर्जेंटीना से भारत ने 18.54 लाख टन कच्चा सोयाबीन तेल और 4.85 लाख टन सूरजमुखी तेल आयात किया। रूस से 48,650 टन कच्चा सोयाबीन तेल और 9.88 लाख टन सूरजमुखी तेल खरीदा गया। इसके अलावा थाईलैंड, ब्राज़ील, यूक्रेन, चीन, नेपाल, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और अन्य देशों से भी विभिन्न खाद्य तेलों का आयात किया गया।
एसईए के अनुसार, जून 2025 की तुलना में कच्चे पाम ऑयल (CPO) की कीमत 17 प्रतिशत, आरबीडी पामोलीन 18 प्रतिशत, सोयाबीन तेल 14 प्रतिशत और सूरजमुखी तेल 19 प्रतिशत महँगा हुआ है। वहीं पिछले एक वर्ष में रुपये में 11 प्रतिशत से अधिक की गिरावट भी भारतीय आयातकों और रिफाइनरों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।