1 जून से शुरू होगा ‘खेत बचाओ अभियान’, सरकार ने किसानों को दिया खाद की पर्याप्त उपलब्धता का भरोसा
देशभर में खरीफ सीजन की तैयारियों के बीच केंद्र सरकार अब खेती और मिट्टी की सेहत को लेकर बड़ा अभियान शुरू करने जा रही है। 1 जून से “खेत बचाओ अभियान” की शुरुआत होगी, जिसका मकसद किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी की उर्वरता और टिकाऊ खेती के प्रति जागरूक करना है। सरकार ने साथ ही यह भरोसा भी दिया है कि आगामी खरीफ सीजन में किसानों को खाद की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।
संतुलित खाद उपयोग पर रहेगा अभियान का फोकस
सरकार और कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि कई क्षेत्रों में रासायनिक उर्वरकों का जरूरत से ज्यादा उपयोग मिट्टी की गुणवत्ता को नुकसान पहुंचा रहा है। इसी को देखते हुए इस अभियान के जरिए किसानों को यह समझाया जाएगा कि फसल और मिट्टी की जरूरत के अनुसार ही खाद का इस्तेमाल करें। अभियान में जैविक खाद, बायो-फर्टिलाइजर, हरी खाद और इंटीग्रेटेड न्यूट्रिएंट मैनेजमेंट जैसे तरीकों को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
किसानों तक गाँव-गाँव पहुंचेगी जागरूकता मुहिम
अभियान के तहत देशभर में कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), कृषि विश्वविद्यालय और कृषि विभाग मिलकर गांव स्तर पर कार्यक्रम आयोजित करेंगे। किसान गोष्ठियां, प्रशिक्षण शिविर, खेत प्रदर्शन और डिजिटल जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए किसानों को मिट्टी बचाने और उर्वरक संतुलन की जानकारी दी जाएगी। ICAR से जुड़े संस्थानों ने पहले भी इस तरह के अभियानों के जरिए लाखों किसानों तक पहुंच बनाई है।
खरीफ सीजन के लिए खाद की उपलब्धता पर सरकार का भरोसा
केंद्र सरकार ने कहा है कि खरीफ 2026 सीजन के लिए खाद की पर्याप्त व्यवस्था की जा चुकी है। राज्यों के साथ लगातार बैठकें कर सप्लाई चेन की निगरानी की जा रही है ताकि किसानों को समय पर यूरिया, डीएपी और अन्य उर्वरक उपलब्ध हो सकें। सरकार ने यह भी कहा कि जमाखोरी और नकली खाद बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
नकली खाद और बीज पर भी सख्ती
केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने हाल ही में कहा था कि नकली खाद, कीटनाशक और खराब गुणवत्ता वाले बीज किसानों की आय और उत्पादन दोनों को प्रभावित करते हैं। इसलिए राज्यों को विशेष अभियान चलाकर ऐसे मामलों पर सख्ती करने के निर्देश दिए गए हैं।
मिट्टी की सेहत बचाने पर जोर
लगातार रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग से मिट्टी की जैविक गुणवत्ता घट रही है और उत्पादन लागत बढ़ रही है। ऐसे में “खेत बचाओ अभियान” किसानों को लंबे समय तक टिकाऊ खेती अपनाने की दिशा में मदद कर सकता है। सरकार का लक्ष्य उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता और किसानों की आय दोनों को सुरक्षित रखना है।