Fruit Horizon 2026: लखनऊ में सजा फलों का महाकुंभ, कृषि मंत्री बोले-रूस तक पहुँची मलिहाबाद के आमों की माँग; जुटे देशभर के वैज्ञानिक और किसान
CISH Fruit Event: लखनऊ के रहमानखेड़ा स्थित केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (CISH) में दो दिवसीय ‘फ्रूट होराइजन-2026’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस बड़े आयोजन में देशभर से वैज्ञानिकों, कृषि विशेषज्ञों, उद्यमियों, स्टार्टअप्स और किसानों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य फल उत्पादन, प्रोसेसिंग, निर्यात और नई तकनीकों को बढ़ावा देना था। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार में कृषि मंत्री श्री कैबिनेट मंत्री (कृषि, कृषि शिक्षा, कृषि अनुसंधान) उत्तर प्रदेश सरकार पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, सूर्य प्रताप शाही और उद्यान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह जी सहित संस्थान के वैज्ञानिकगण एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने किया शुभारंभ
कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया। उन्होंने कहा कि भारत को फल उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ वैश्विक बाजार में मजबूत पहचान दिलाने की जरूरत है।
उन्होंने किसानों से पारंपरिक खेती के साथ बागवानी को अपनाने की अपील की और कहा कि इससे किसानों की आय बढ़ेगी। उन्होंने नई तकनीक, वैल्यू एडिशन और एक्सपोर्ट पर जोर दिया कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत अब केवल अनाज उत्पादन तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि देश को फल उत्पादन, प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और निर्यात पर तेजी से काम करना होगा। उन्होंने कहा कि भारत के किसानों ने रिकॉर्ड उत्पादन कर देश को खाद्यान्न के मामले में मजबूत बनाया है, लेकिन अब समय आ गया है कि भारतीय फल दुनिया के बाजारों तक पहुंचें। उन्होंने कहा कि भारत को “दुनिया की फूड बास्केट” बनाने के लिए वैल्यू एडिशन और एक्सपोर्ट बढ़ाना बेहद जरूरी है।
शिवराज सिंह चौहान ने यह भी कहा कि बागवानी क्षेत्र किसानों की आय बढ़ाने का बड़ा माध्यम बन सकता है। उन्होंने वैज्ञानिकों, स्टार्टअप्स और किसानों से मिलकर नई तकनीकों को अपनाने की अपील की। मंत्री ने कहा कि बेहतर पैकेजिंग, कोल्ड स्टोरेज, सप्लाई चेन और प्रोसेसिंग यूनिट्स के जरिए किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम दिलाया जा सकता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार बागवानी सेक्टर को मजबूत करने और किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए लगातार काम कर रही है।
किन फलों पर रहा खास फोकस
कार्यक्रम में कई फल फसलों पर विशेष चर्चा की गई। इनमें शामिल रहे आम, लीची, अनार, खजूर, केला, अंगूर, साइट्रस फल, सेब, अखरोट। विशेषज्ञों ने इन फलों की बेहतर किस्मों, रोग नियंत्रण, उत्पादन बढ़ाने की तकनीक और बाजार संभावनाओं पर किसानों को जानकारी दी। कार्यक्रम में किसानों को आधुनिक खेती से जुड़ी कई तकनीकों की जानकारी भी दी गई, जैसे-
- ड्रिप सिंचाई
- जैविक खेती
- कीट एवं रोग प्रबंधन
- ग्रेडिंग और पैकेजिंग
- कोल्ड स्टोरेज तकनीक
कृषि मंत्री की बड़ी घोषणाएं
- उत्तर प्रदेश में किसानों को रोगमुक्त पौधे उपलब्ध कराने के लिए नए क्लीन प्लांट सेंटर खोले जाएंगे।
- इन केंद्रों के जरिए किसानों को नर्सरी स्तर पर ही बेहतर गुणवत्ता वाले पौधे मिल सकेंगे।
- सरकार इस योजना में प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी भी बढ़ाएगी और उन्हें सहायता दी जाएगी।
- फलों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए यूपी में एक विशेष एक्सपोर्ट सेंटर स्थापित किया जाएगा।
- राज्य में बागवानी को मजबूत करने के लिए 8 नए क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं।
- आलू किसानों के लिए आगरा में नया आलू अनुसंधान केंद्र खोला जा रहा है।
- कृषि मंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश की जलवायु फल उत्पादन के लिए बेहद अनुकूल है।
- राज्य में अब तक 70 हजार अतिरिक्त बागवानी क्षेत्र की शुरुआत हो चुकी है।
आम, केला और अंगूर के निर्यात पर सरकार का फोकस
- मलिहाबाद के आमों को वैश्विक पहचान दिलाने पर सरकार विशेष फोकस कर रही है।
- मंत्री ने कहा कि रूस समेत कई देशों में मलिहाबाद के आमों की काफी मांग है।
- आम और केले के निर्यात में 5 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है।
- अंगूर के निर्यात में 15 प्रतिशत बढ़ोतरी का लक्ष्य तय किया गया है।
- वैज्ञानिकों ने आम की शेल्फ लाइफ को 25-30 दिनों तक बढ़ाने में सफलता हासिल की है।
- इसे आगे बढ़ाकर 40-50 दिन करने पर काम जारी है।
- ICAR-CISH ने केले की शेल्फ लाइफ बढ़ाने में भी सफलता हासिल की है।
- निर्यात लागत कम करने के लिए समुद्री मार्ग (सी रूट) को बढ़ावा दिया जाएगा।
- Argentina, South Africa और South Korea जैसे नए बाजारों में भारतीय आम भेजने की तैयारी चल रही है।
स्टार्टअप्स और कंपनियों ने लगाए स्टॉल
इवेंट में कृषि स्टार्टअप्स, खाद्य प्रोसेसिंग कंपनियों और एग्री टेक कंपनियों ने अपने स्टॉल लगाए। यहाँ किसानों को नई मशीनें, उन्नत पौधे, प्रोसेसिंग तकनीक और मार्केटिंग मॉडल दिखाए गए।कई कंपनियों ने किसानों को सीधे खरीद और कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के विकल्प भी बताए। कार्यक्रम में इस बात पर चर्चा हुई कि कैसे गुणवत्ता सुधारकर भारतीय फलों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया जा सकता है। क्योंकि भारत दुनिया के बड़े फल उत्पादक देशों में शामिल है, लेकिन निर्यात अभी भी अपेक्षाकृत कम है।