गोचर भूमि पर हरित चारा अभियान तेज, 39,721 हेक्टेयर भूमि अतिक्रमण मुक्त कर बढ़ेगी पशुओं के चारे की उपलब्धता
प्रदेश में गोवंश संरक्षण केवल आश्रय स्थलों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब पशुओं के लिए सालभर हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी विशेष ज़ोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार ने गोचर भूमि के विकास और अतिक्रमण हटाने का अभियान तेज कर दिया है, ताकि पशुपालकों को चारे की कमी का सामना न करना पड़े और निराश्रित गोवंश के लिए भी पर्याप्त व्यवस्था बनाई जा सके।
इसी कड़ी में सरकार गोचर भूमि को हरित चारे से आच्छादित करने, चारागाह विकसित करने और पशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर काम कर रही है। सरकार का कहना है कि यह अभियान संभावित सूखे और गर्मी जैसी परिस्थितियों में भी पशुधन की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
58 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों में उपलब्ध है गोचर भूमि
सरकारी आँकड़ों के अनुसार प्रदेश की 58,115 ग्राम पंचायतों में कुल 61,118.85 हेक्टेयर गोचर भूमि उपलब्ध है। इनमें से 5,050 गो-आश्रय स्थलों को 10,421.45 हेक्टेयर गोचर भूमि से जोड़ा जा चुका है, ताकि गोवंश के लिए हरे चारे की नियमित व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।
लगभग 40 हजार हेक्टेयर भूमि कराई गई अतिक्रमण मुक्त
सरकार ने अब तक 39,721 हेक्टेयर गोचर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया है। इस भूमि पर हरित चारा विकसित करने का अभियान चलाया जा रहा है, जिससे पशुओं के लिए स्थायी चारा व्यवस्था तैयार की जा सके।
हरित चारा उत्पादन में ये जिले सबसे आगे
पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम के अनुसार हरदोई जिला 462.76 हेक्टेयर क्षेत्र में हरित चारा विकसित कर प्रदेश में पहले स्थान पर है। इसके बाद फतेहपुर (176.69 हेक्टेयर), रायबरेली (163.33 हेक्टेयर), संभल (152.74 हेक्टेयर), आगरा (151.00 हेक्टेयर), अलीगढ़ (150.00 हेक्टेयर), बहराइच (133.56 हेक्टेयर), बाराबंकी (121.28 हेक्टेयर), फिरोजाबाद (115.00 हेक्टेयर) और हमीरपुर (107.00 हेक्टेयर) प्रमुख जिलों में शामिल हैं।
चारे की कमी वाले जिलों पर विशेष ध्यान
सरकार ने विशेष रूप से चारे की कमी वाले जिलों, खासकर बुंदेलखंड क्षेत्र की पहचान की है। ऐसे क्षेत्रों में अधिक उत्पादन वाले जिलों से चारा और भूसा उपलब्ध कराया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर अधिसूचित वन क्षेत्रों से भी घास और अन्य चारे की व्यवस्था की जाएगी।
पशुओं के स्वास्थ्य और पेयजल पर भी फोकस
पशुओं में असंतुलित चारे से होने वाली नाइट्रेट और नाइट्राइट विषाक्तता से बचाव के लिए सलाह जारी की गई है। जिन क्षेत्रों में पानी की कमी है, वहाँ तालाबों और पोखरों को नहर या नलकूप से भरने तथा आवश्यकतानुसार पानी के टैंकर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
चारागाह विकास योजना को मिलेगी गति
सरकार वीबी-जी-राम-जी योजना के तहत चारागाह और गोचर भूमि के विकास को गति देने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही पशुओं के लिए जीवनरक्षक दवाओं, टीकों, मिनरल मिश्रण और इलेक्ट्रोलाइट की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा संक्रामक रोगों की निगरानी पर भी ज़ोर दिया जा रहा है। प्रदेश में संचालित 520 मोबाइल वेटनरी यूनिट चौबीसों घंटे सक्रिय रहेंगी। पशुपालक 1962 टोल-फ्री नंबर पर संपर्क कर आपात स्थिति में पशुओं के लिए चिकित्सा सहायता प्राप्त कर सकेंगे