ग्रामीण और ज़मीनी स्तर के क्रिएटर्स को बड़ा मौका! दिखाइए अपने जिले की संस्कृति और विरासत, सरकार देगी 5 लाख तक इनाम
देश के अलग-अलग जिलों में छिपी संस्कृति, विरासत, पर्यटन और स्थानीय पहचान को डिजिटल दुनिया तक पहुँचाने के लिए केंद्र सरकार ने एक नई पहल शुरू की है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 'जेम्स ऑफ इंडिया (Gems of India) चैलेंज' के पायलट चरण की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के उभरते डिजिटल क्रिएटर्स को ऐसा मंच देना है, जहाँ वे अपने जिले की खासियत को वीडियो के माध्यम से देश और दुनिया के सामने पेश कर सकें। बेहतर वीडियो बनाने वाले प्रतिभागियों को जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर 50 हजार रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक के पुरस्कार भी दिए जाएंगे।
यह चैलेंज MyWAVES प्लेटफॉर्म के जरिए आयोजित किया जाएगा। इसमें प्रतिभागियों को 1 से 3 मिनट का वीडियो बनाकर अपलोड करना होगा। बेहतर प्रदर्शन करने वाले क्रिएटर्स को जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर नकद पुरस्कार भी दिए जाएंगे। सरकार का मानना है कि यह पहल न केवल नए कंटेंट क्रिएटर्स को पहचान दिलाएगी, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता और स्थानीय विरासत को भी व्यापक स्तर पर सामने लाएगी।
1 अगस्त से शुरू होगी एंट्री, इन 7 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लोगों को मौका
'जेम्स ऑफ इंडिया' चैलेंज के पायलट चरण के लिए प्रविष्टियाँ 1 अगस्त 2026 से 31 अगस्त 2026 तक स्वीकार की जाएँगी। इच्छुक प्रतिभागी MyWAVES प्लेटफॉर्म पर जाकर 1 से 3 मिनट का वीडियो अपलोड कर सकेंगे। फिलहाल इस पहल की शुरुआत इन क्षेत्रों में की जा रही है।
- अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
- अरुणाचल प्रदेश
- चंडीगढ़
- दादरा और नगर हवेली
- दमन और दीव
- गोवा
- लद्दाख
इस अभियान के संचालन में प्रसार भारती, माय भारत (My Bharat), राज्य सरकारें और जिला प्रशासन मिलकर काम करेंगे। स्थानीय सांस्कृतिक संस्थानों और शैक्षणिक संस्थानों को भी इससे जोड़ा जाएगा, ताकि अधिक से अधिक युवा इसमें भाग ले सकें।
अपने जिले की संस्कृति, विरासत और पर्यटन को दुनिया तक पहुँचाने का मिलेगा मौका
इस चैलेंज के तहत प्रतिभागियों को अपने जिले की उन खास बातों को वीडियो के माध्यम से दिखाना होगा, जो उसे दूसरे जिलों से अलग बनाती हैं। वीडियो में स्थानीय संस्कृति, लोक कला, पर्यटन स्थल, ऐतिहासिक धरोहर, पारंपरिक खान-पान, लोक उत्सव, प्राकृतिक सुंदरता और जिले की उपलब्धियों जैसे विषयों को शामिल किया जा सकता है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव चंचल कुमार ने कहा, "भारत के हर जिले में एक कहानी छिपी है जिसे सुनाए जाने का इंतजार है और 'जेम्स ऑफ इंडिया' हमारे रचनाकारों को इसे सुनाने का मंच प्रदान करता है। यह कार्यक्रम न केवल हमारे युवाओं की रचनात्मकता का जश्न मनाता है, बल्कि हमारे जिलों की असाधारण विविधता का भी जश्न मनाता है।"
इस पहल को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने के लिए यूट्यूब और मेटा भी इसमें भागीदार बने हैं। दोनों डिजिटल प्लेटफॉर्म अपने-अपने क्रिएटर समुदाय के बीच इस चैलेंज का प्रचार करेंगे और नए कंटेंट क्रिएटर्स को इसमें भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।
50 हजार से लेकर 5 लाख रुपये तक के पुरस्कार, देशभर में होगा विस्तार
इस प्रतियोगिता में विजेताओं को तीन स्तरों पर सम्मानित किया जाएगा।
- जिला स्तर पर प्रत्येक जिले में अधिकतम 20 विजेताओं को 50 हजार रुपये तक का पुरस्कार मिलेगा।
- राज्य स्तर पर हर जिले से चुने गए एक सर्वश्रेष्ठ क्रिएटर को 2 लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा।
- राष्ट्रीय स्तर पर राज्यों से चयनित सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टियों को 5 लाख रुपये तक का पुरस्कार मिलेगा।
जिला और राज्य स्तर पर विजेताओं का चयन करने के लिए अलग-अलग निर्णायक समितियाँ बनाई जाएँगी। इनमें संस्कृति, विरासत, पर्यटन, मीडिया और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ शामिल होंगे। पायलट चरण पूरा होने के बाद इसके अनुभवों के आधार पर इस कार्यक्रम का विस्तार देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य ऐसा राष्ट्रीय डिजिटल क्रिएटर नेटवर्क तैयार करना है, जो भारत के हर जिले की अनूठी पहचान और उसकी कहानी को देश और दुनिया तक पहुँचा सके।