‘हमारा भविष्य एसिड की तरह जल रहा है...’ आज़मगढ़ में केमिस्ट्री टीचर के लिए Gen Alpha का प्रदर्शन
बोर्ड परीक्षा नज़दीक हो और क्लास में पढ़ाने वाला शिक्षक ही न हो, तो छात्र क्या करें? उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में कुछ ऐसा ही देखने को मिला। एक इंटर कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने पढ़ाई से जुड़ी परेशानियों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों का कहना है कि कॉलेज में कई ज़रूरी विषयों के शिक्षक नहीं हैं और इसका सीधा असर उनकी पढ़ाई पर पड़ रहा है। सबसे ज़्यादा चिंता विज्ञान वर्ग के छात्रों को है, क्योंकि उनका कहना है कि केमिस्ट्री पढ़ाने के लिए शिक्षक ही उपलब्ध नहीं है।
बोर्ड परीक्षा में अब कुछ ही महीने बचे हैं, ऐसे में छात्रों की चिंता समझना मुश्किल नहीं है। इसी नाराज़गी को छात्रों ने अपने अंदाज़ में सामने रखा। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने नारा लगाया “बिना केमिस्ट्री टीचर के हमारा भविष्य एसिड की तरह जल रहा है।” उनका कहना है कि परीक्षा की तैयारी के इस अहम समय में अगर नियमित कक्षाएँ ही नहीं होंगी, तो वे अपना पाठ्यक्रम और तैयारी कैसे पूरी करेंगे?
बोर्ड परीक्षा से पहले छात्रों की सबसे बड़ी चिंता क्या है?
12वीं के छात्रों के लिए बोर्ड परीक्षा सिर्फ़ एक परीक्षा नहीं होती। इसी के अंकों के आधार पर आगे कॉलेज, कोर्स और कई बार करियर का रास्ता तय होता है। इसलिए परीक्षा से पहले के कुछ महीने उनके लिए बहुत अहम होते हैं। इसी दौरान वे कठिन अध्याय पूरा करते हैं, शिक्षकों से सवाल पूछते हैं और परीक्षा के हिसाब से तैयारी करते हैं। ऐसे में अगर किसी मुख्य विषय का शिक्षक ही न हो, तो छात्रों के लिए परेशानी बढ़ जाती है। ख़ासकर केमिस्ट्री जैसे विषय में कई टॉपिक ऐसे होते हैं, जिन्हें सिर्फ़ किताब पढ़कर समझना आसान नहीं होता। छात्रों को शिक्षक से सवाल पूछने, उदाहरण समझने और अपनी ग़लतियाँ सुधारने की ज़रूरत होती है। छात्रों का आरोप है कि शिक्षक की कमी के कारण उन्हें यही परेशानी झेलनी पड़ रही है।
‘एसिड की तरह जल रहा भविष्य’ वाला नारा क्यों बना चर्चा का विषय?
प्रदर्शन के दौरान छात्रों का नारा सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आया। “बिना केमिस्ट्री टीचर के हमारा भविष्य एसिड की तरह जल रहा है”-इस एक लाइन में छात्रों ने अपनी शिकायत को ऐसे अंदाज़ में रखा, जिसे लोग आसानी से याद रख सकें। केमिस्ट्री के ‘एसिड’ को अपनी पढ़ाई और भविष्य से जोड़कर छात्रों ने शायद यह बताने की कोशिश की कि शिक्षक की कमी उनके लिए कोई छोटी परेशानी नहीं है। यह उनकी परीक्षा और आगे की पढ़ाई से जुड़ा सवाल है। जेन अल्फ़ा के छात्रों का यह अंदाज़ भले नया हो, लेकिन मुद्दा वही पुराना है, क्लास में शिक्षक हो और समय पर पढ़ाई हो।
शिक्षक ही नहीं, फ़ीस बढ़ोतरी को लेकर भी नाराज़गी
छात्रों की नाराज़गी सिर्फ़ शिक्षकों की कमी तक सीमित नहीं थी। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने फ़ीस बढ़ाने और कॉलेज से जुड़ी कुछ अन्य कथित अनियमितताओं को लेकर भी सवाल उठाए। छात्रों ने अपनी नाराज़गी जताने के लिए कक्षाओं का बहिष्कार भी किया। फ़ीस बढ़ने पर छात्रों और अभिभावकों की उम्मीद भी बढ़ती है कि उन्हें पढ़ाई की बेहतर सुविधा मिले। ऐसे में अगर दूसरी तरफ़ ज़रूरी विषय के शिक्षक ही उपलब्ध न हों, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, फ़ीस में कितनी बढ़ोतरी हुई और कॉलेज में वास्तव में कितने शिक्षकों की कमी है, इसकी पूरी जानकारी और कॉलेज प्रशासन का पक्ष सामने आना अभी ज़रूरी है।
अब कॉलेज प्रबंधन से छात्रों को क्या उम्मीद?
छात्रों ने अपनी परेशानी सामने रख दी है। अब सबसे बड़ा सवाल है कि कॉलेज प्रबंधन उनकी शिकायतों पर क्या कदम उठाता है। बोर्ड परीक्षा में कुछ महीने ही बचे हैं, इसलिए छात्रों के लिए हर दिन महत्वपूर्ण है। अगर किसी विषय में शिक्षक की कमी वास्तव में है, तो जल्द से जल्द पढ़ाई की व्यवस्था करना उनके हित में होगा।