पॉलीहाउस में जरबेरा की खेती: एक बार लगाइए, 3–4 साल तक फूल पाइए; जानिए लागत, कमाई, खेती का तरीका और बाज़ार

Lata Mishra | Jul 06, 2026, 12:52 IST
जरबेरा (Gerbera) एक प्रीमियम कट-फ्लॉवर है, जिसकी मांग शादी, सजावट और बुके बनाने में पूरे साल बनी रहती है। पॉलीहाउस में इसकी खेती से किसान 3–4 वर्षों तक नियमित उत्पादन ले सकते हैं। इस लेख में जानिए जरबेरा की खेती का तरीका, लागत, कमाई, पौध रोपण, देखभाल, बाजार और सफल खेती के लिए जरूरी बातें।

अगर आप पारंपरिक खेती के बजाय कम क्षेत्र में ज़्यादा कमाई करना चाहते हैं, तो पॉलीहाउस में जरबेरा (Gerbera) की खेती एक अच्छा विकल्प हो सकती है। शादी-विवाह, होटल, मंदिर, कार्यक्रमों की सजावट और बुके बनाने में सालभर इसकी मांग रहती है। अच्छी गुणवत्ता के फूल मिलने पर किसानों को प्रति फूल कई रुपये तक का दाम मिल जाता है।



केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी अपने फ़ार्म के पॉलीहाउस में जरबेरा के पौधे लगाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर पौधों की देखभाल करते हुए कहा कि फूलों की खेती में रोज़ाना निगरानी बहुत ज़रूरी होती है। उनके अनुसार, "पौधों को बच्चों की तरह पालना पड़ता है, तभी वे स्वस्थ रहते हैं और अच्छी गुणवत्ता के फूल देते हैं।"



भारत में पिछले कुछ वर्षों में फूलों की खेती (फ्लोरीकल्चर) का क्षेत्र तेजी से बढ़ा है। पारंपरिक फसलों की तुलना में कई किसान अब पॉलीहाउस में उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती कर रहे हैं। इन्हीं में से एक है जरबेरा, जिसे दुनिया के सबसे लोकप्रिय कट-फ्लॉवर (Cut Flower) में गिना जाता है। जरबेरा के फूल लंबे समय तक ताज़ा रहते हैं, रंगों की कई किस्में उपलब्ध हैं और इनकी बाजार में लगातार मांग बनी रहती है। यही वजह है कि कई किसान इसे कमाई का अच्छा माध्यम मानते हैं।



क्यों बढ़ रही है जरबेरा की खेती?


जरबेरा की मांग पूरे साल बनी रहती है। इसका उपयोग मुख्य रूप से—



  • शादी और रिसेप्शन की सजावट
  • बुके बनाने
  • होटल और रिसॉर्ट की डेकोरेशन
  • धार्मिक कार्यक्रम
  • कॉरपोरेट इवेंट
  • फूलों की दुकानों में किया जाता है।

त्योहारों और शादी के सीजन में इसकी मांग और कीमत दोनों बढ़ जाती हैं।



जरबेरा के फूल की कीमत कितनी होती है?


जरबेरा के फूल का दाम मौसम, रंग, गुणवत्ता और मांग पर निर्भर करता है। सामान्य दिनों में किसानों को एक फूल का भाव लगभग ₹3 से ₹8 तक मिल सकता है। शादी के सीजन, वेलेंटाइन डे, मदर्स डे, न्यू ईयर और बड़े आयोजनों के दौरान यही कीमत ₹10 से ₹20 प्रति फूल या कई बार इससे भी अधिक हो सकती है। बड़े शहरों की फूल मंडियों में प्रीमियम गुणवत्ता वाले फूलों की कीमत और अधिक मिल सकती है।



जरबेरा की खेती कहाँ करें?


जरबेरा की खेती खुले खेत में भी की जा सकती है, लेकिन व्यावसायिक स्तर पर अच्छी गुणवत्ता और अधिक उत्पादन के लिए पॉलीहाउस सबसे बेहतर माना जाता है। पॉलीहाउस में तापमान, नमी और रोशनी नियंत्रित रहती है, जिससे पौधों की वृद्धि अच्छी होती है और फूलों की गुणवत्ता भी बेहतर रहती है।



खेती के लिए कैसी जलवायु और मिट्टी चाहिए?


जरबेरा को हल्की ठंडी और मध्यम जलवायु पसंद है।



  • तापमान: 18–25 डिग्री सेल्सियस
  • अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी
  • मिट्टी का pH: 5.5 से 6.5
  • जैविक पदार्थो से भरपूर मिट्टी

यदि पॉलीहाउस में खेती की जा रही है, तो मिट्टी को पहले उपचारित (Soil Sterilization) करना जरूरी होता है ताकि फफूंद और कीटों का प्रकोप कम हो।



पौधे कहाँ से खरीदें?


जरबेरा की खेती के लिए हमेशा टिश्यू कल्चर (Tissue Culture) से तैयार स्वस्थ पौधे ही खरीदने चाहिए। मान्यता प्राप्त नर्सरी या कृषि विश्वविद्यालयों से पौधे लेना बेहतर रहता है। एक पौधे की कीमत आमतौर पर ₹20 से ₹50 के बीच हो सकती है।



पौधे कैसे लगाएँ?


पॉलीहाउस में उठी हुई क्यारियाँ (Raised Beds) बनाकर पौधे लगाए जाते हैं। आमतौर पर पौधों के बीच—



  • कतारों के बीच 35 से 40 सेंटीमीटर की दूरी रखी जाती है।
  • सिंचाई के लिए ड्रिप सिस्टम सबसे उपयुक्त माना जाता है।

पौधों की देखभाल क्यों है सबसे ज़रूरी?


जरबेरा की खेती में रोज़ निगरानी करनी पड़ती है। विशेषज्ञों का कहना है कि पौधों में—



  • पीली पत्तियाँ
  • फफूंद
  • कीट
  • पोषक तत्वों की कमी जैसी समस्याओं पर तुरंत ध्यान देना चाहिए।

समय-समय पर सूखी और बीमार पत्तियाँ हटाने से पौधे स्वस्थ रहते हैं और फूलों की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।



एक पौधा कितने साल तक फूल देता है?


जरबेरा का एक स्वस्थ पौधा लगभग 3 से 4 वर्ष तक व्यावसायिक उत्पादन देता है। रोपाई के लगभग 70–90 दिन बाद फूल आना शुरू हो जाते हैं। इसके बाद नियमित रूप से पूरे वर्ष फूल मिलते रहते हैं।



एक पौधे से कितने फूल मिलते हैं?


अच्छे प्रबंधन की स्थिति में एक पौधा सालभर में लगभग 35 से 50 फूल दे सकता है। उन्नत तकनीक अपनाने पर यह संख्या कुछ मामलों में इससे भी अधिक हो सकती है।



लागत कितनी आती है?


जरबेरा की खेती की शुरुआती लागत अधिक होती है क्योंकि इसमें—



  • पॉलीहाउस
  • ड्रिप सिंचाई
  • पौधे
  • बेड तैयार करना
  • उर्वरक
  • श्रम पर निवेश करना पड़ता है।

एक एकड़ पॉलीहाउस स्थापित करने में लाखों रुपये का खर्च आ सकता है। हालांकि केंद्र और राज्य सरकारें मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) जैसी योजनाओं के तहत पॉलीहाउस निर्माण पर सब्सिडी भी देती हैं।



कमाई कितनी हो सकती है?


कमाई पूरी तरह पौधों की संख्या, उत्पादन, बाजार और फूलों के भाव पर निर्भर करती है। यदि किसान अच्छी गुणवत्ता के फूल तैयार कर सीधे फूल मंडी, इवेंट कंपनियों, होटल, फ्लोरिस्ट या


ऑनलाइन खरीदारों को बेचते हैं, तो पारंपरिक फसलों की तुलना में बेहतर आय प्राप्त कर सकते हैं।



हालांकि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि खेती शुरू करने से पहले स्थानीय बाजार और खरीदारों की मांग का अध्ययन जरूर कर लेना चाहिए।



जरबेरा की प्रमुख किस्में


भारत में उगाई जाने वाली कुछ लोकप्रिय किस्में हैं—



  • Stanza
  • Rosalin
  • Balance
  • Dana Ellen
  • Savannah
  • Maron
  • Laura
  • Pink Elegance
  • Natasha

खेती शुरू करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान



  • पॉलीहाउस का तापमान नियंत्रित रखें।
  • केवल प्रमाणित पौधे ही खरीदें।
  • ड्रिप सिंचाई और फर्टिगेशन अपनाएँ।
  • नियमित रोग एवं कीट निगरानी करें।
  • फूलों की तुड़ाई सही समय पर करें।
  • पहले बाजार तय करें, फिर बड़े स्तर पर खेती शुरू करें।
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