गिर से बाहर भी दिखने लगे शेर, पाँच साल में आबादी 674 से बढ़कर हुई 891
गिर और आसपास के क्षेत्रों में एशियाई शेरों की संख्या 2020 के 674 से बढ़कर 2025 में 891 हो गई है। बढ़ती आबादी के साथ अब शेर नए इलाकों में फैल रहे हैं, जिससे संरक्षण के साथ सह-अस्तित्व की चुनौती भी बढ़ी है।
गुजरात के गिर और उसके आसपास के जंगलों से देश के लिए एक अच्छी खबर आई है। एशियाई शेरों की आबादी पिछले पाँच वर्षों में बढ़ी है। वर्ष 2020 में जहाँ इनकी संख्या 674 दर्ज की गई थी, वहीं 2025 में यह बढ़कर 891 तक पहुँच गई है।
वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में ये जानकारी दी। अब शेर अधिसूचित वन क्षेत्रों के साथ-साथ नदी किनारों और राजस्व बंजर जमीनों में भी दिखने लगे हैं। यह प्राकृतिक विस्तार उनकी बढ़ती आबादी का संकेत है, लेकिन इसके साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष की चुनौतियाँ भी बढ़ रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार और वन विभाग ने कई वैज्ञानिक और सामुदायिक उपाय लागू किए हैं।
शेरों की गतिविधियों को समझने के लिए व्यापक उपग्रह आधारित अध्ययन किया गया है। इसमें उनकी पारिस्थितिकी, आवागमन के रास्ते, मौसमी व्यवहार, भोजन के स्रोत और आवास की प्राथमिकताओं पर डेटा जुटाया गया। इस वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर संरक्षण रणनीतियाँ तैयार की जा रही हैं, ताकि शेरों के प्राकृतिक विस्तार को सुरक्षित बनाया जा सके।
गिर और वृहद गिर क्षेत्र में घास के मैदानों को सुधारने, शिकार प्रजातियों की संख्या बढ़ाने और आवास की गुणवत्ता बेहतर करने के लिए भी काम किया गया है। इससे शेरों को पर्याप्त भोजन और सुरक्षित रहने की जगह मिल सके।
शेर संरक्षण में स्थानीय लोगों की भूमिका को भी मजबूत किया गया है। वन्य प्राणी मित्र और ट्रैकर्स ग्रामीणों को जंगली जानवरों की गतिविधियों के बारे में जागरूक करते हैं। किसानों को रात में फसलों की सुरक्षा के लिए मचान उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि वे सुरक्षित रह सकें और शेरों से दूरी बनाए रख सकें।
मानव-प्रधान इलाकों में शेरों की आवाजाही कम करने के लिए जल स्रोतों का विकास किया गया है, जिससे शेर जंगलों के भीतर ही पानी पा सकें और बस्तियों की ओर न जाएँ। इसके साथ पर्यावरण शिक्षा शिविर, सामुदायिक कार्यक्रम और जागरूकता अभियानों के माध्यम से संरक्षण की भावना को मजबूत किया गया है।
गिर क्षेत्र से गुजरने वाले रेलवे ट्रैक के आसपास शेरों की सुरक्षा के लिए विशेष मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू की गई है। संवेदनशील इलाकों में ट्रेनों की गति सीमित की गई है और नियमित निगरानी व गश्त की व्यवस्था की गई है।
शेरों के सुरक्षित आवागमन के लिए प्रमुख गलियारों की पहचान की गई है और उनमें आवास सुधार कार्य किए गए हैं। इससे अलग-अलग उप-आबादियों के बीच संपर्क बना रहे और शेर नए क्षेत्रों में सुरक्षित रूप से फैल सकें।
गिर पर बढ़ते दबाव को देखते हुए शेरों के लिए दूसरा सुरक्षित आवास विकसित करने की दिशा में भी काम हुआ है। बरदा वन्यजीव अभयारण्य को संभावित दूसरे घर के रूप में तैयार किया जा रहा है, ताकि भविष्य में शेरों की आबादी को अलग-अलग स्थानों पर बसाया जा सके और किसी एक क्षेत्र पर अत्यधिक दबाव न पड़े।
इसके अलावा सासण-गिर में 2019 से एक उच्च-तकनीकी निगरानी केंद्र स्थापित किया गया है, जहाँ रेडियो-टेलीमेट्री के माध्यम से शेरों की वास्तविक समय में निगरानी की जाती है। इससे बीमारियों, संघर्ष या दुर्घटनाओं की स्थिति में तुरंत कार्रवाई संभव हो पाती है।
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