GOBARdhan: E20 पेट्रोल के बाद अब बायो-CNG की बारी! कैसे काम करेगी गोबर्धन योजना? जानिए आसान भाषा में पूरी जानकारी

Umang | Aug 07, 2026, 15:52 IST
केंद्र सरकार स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने के लिए बायो-सीएनजी के उपयोग को बढ़ाएगी। राष्ट्रीय चक्रीय जैव ऊर्जा योजना 'गोबर्धन' के तहत ₹23,731 करोड़ का निवेश किया जाएगा। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक लागू रहेगी और उत्पादन दस गुना बढ़ाएगी। गोबर्धन योजना से किसानों की आय बढ़ेगी और जैविक कचरे का बेहतर उपयोग होगा।

देश में पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने के बाद अब केंद्र सरकार स्वच्छ ईंधन के इस्तेमाल को एक और बड़ा बढ़ावा देने जा रही है। सरकार पहले ही देशभर में E20 पेट्रोल लागू कर चुकी है, जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है। अब सरकार सीएनजी (CNG) वाहनों में भी बायो-सीएनजी (Compressed Biogas-CBG) के इस्तेमाल को बढ़ाने की तैयारी कर रही है। इसी दिशा में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹23,731 करोड़ की राष्ट्रीय चक्रीय जैव ऊर्जा योजना 'गोबर्धन' (GOBARdhan) को मंज़ूरी दी है।



सरकार का कहना है कि यह योजना केवल बायोगैस उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, कृषि अवशेषों और जैविक कचरे का बेहतर उपयोग करने तथा देश में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने का भी बड़ा माध्यम बनेगी। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक लागू रहेगी। इसका लक्ष्य देश में संपीड़ित बायोगैस (CBG) का उत्पादन लगभग दस गुना बढ़ाना और इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निजी निवेश को आकर्षित करना है।



गोबर, फसल अवशेष और जैविक कचरे से बनेगी स्वच्छ ऊर्जा

गोबर्धन योजना के तहत गोबर, खेतों में बचने वाले फसल अवशेष, गन्ना मिलों से निकलने वाला प्रेस मड (मैली), नगर निकायों का जैविक कचरा और अन्य जैविक पदार्थों का उपयोग करके बायो-सीएनजी और जैविक खाद तैयार की जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे एक ओर कचरे का सही उपयोग होगा, वहीं दूसरी ओर किसानों की आय बढ़ेगी और पर्यावरण को भी लाभ मिलेगा। साथ ही देश में स्वच्छ ईंधन का उत्पादन बढ़ने से आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी।



छह आधारों पर तैयार की गई है पूरी योजना

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि गोबर्धन योजना छह प्रमुख आधारों पर तैयार की गई है।



  • 1. पहला प्रावधान यह है कि जो भी कंपनी या इकाई बायो-सीएनजी बनाएगी, उसके उत्पाद की खरीद की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। इससे उत्पादकों को बाज़ार मिलने की चिंता नहीं रहेगी।
  • 2. दूसरा प्रावधान बायो-सीएनजी की क़ीमत को स्थिर रखने का है। अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल और गैस की क़ीमतों में उतार-चढ़ाव का असर बायोगैस उत्पादकों पर कम पड़े, इसके लिए सरकार एक निश्चित मूल्य व्यवस्था लागू करेगी।
  • 3. तीसरे प्रावधान के तहत बायोगैस संयंत्र लगाने के लिए पूँजीगत सहायता (कैपिटल सपोर्ट) दी जाएगी, ताकि अधिक से अधिक लोग इस क्षेत्र में निवेश कर सकें।
  • 4. योजना के चौथे हिस्से में बायोगैस संयंत्रों को गैस वितरण नेटवर्क से जोड़ने के लिए पाइपलाइन व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसके तहत देश के मौजूदा सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) नेटवर्क और पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) नेटवर्क को बायो-सीएनजी उत्पादन केंद्रों से जोड़ा जाएगा।
  • 5. पाँचवें हिस्से में छोटे उद्योगों (MSME) और विशेष रूप से महिला उद्यमियों को ऋण गारंटी की सुविधा दी जाएगी, ताकि वे भी बायोगैस क्षेत्र में निवेश कर सकें।
  • 6. छठा हिस्सा नई तकनीकों और नए विचारों को बढ़ावा देने से जुड़ा है। इसके लिए सरकार चैलेंज फ़ंड के माध्यम से नवाचार करने वाले लोगों और संस्थाओं को प्रोत्साहन देगी।

स्वच्छ ऊर्जा के साथ किसानों को भी होगा सीधा लाभ

सरकार का कहना है कि गोबर्धन योजना से देश में बायो-सीएनजी उत्पादन तेज़ी से बढ़ेगा। इससे किसानों को गोबर और कृषि अवशेषों से अतिरिक्त आय का अवसर मिलेगा। साथ ही जैविक खाद का उत्पादन बढ़ेगा, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है। सरकार का मानना है कि E20 पेट्रोल के बाद बायो-सीएनजी को बढ़ावा देने की यह पहल देश को स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में आगे ले जाएगी और आने वाले वर्षों में ऊर्जा सुरक्षा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण—तीनों क्षेत्रों को मज़बूती मिलेगी।

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