Fertilizers: किसानों के लिए बड़ी खबर! सरकार ने बताया राज्यों में कितना है यूरिया का स्टॉक, जानिए ताज़ा अपडेट

Mansi | Jul 31, 2026, 16:52 IST
सरकार ने खरीफ 2026 के लिए आवश्यक उर्वरकों की भरपूर उपलब्धता सुनिश्चित की है। राज्यों की जरूरतों का विश्लेषण करके समय पर आपूर्ति की योजना बनाई गई है। इंटीग्रेटेड फर्टिलाइज़र मैनेजमेंट सिस्टम की मदद से उपलब्धता की निगरानी हो रही है। घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने और आयात की निर्भरता घटाने के कार्य जारी हैं, जिससे किसानों को बुवाई के समय खाद की कमी का सामना न करना पड़े।

खरीफ़ सीज़न के दौरान समय पर खाद मिलना किसानों के लिए सबसे अहम ज़रूरतों में से एक होता है। बुवाई से लेकर फसल की शुरुआती बढ़वार तक उर्वरकों की उपलब्धता सीधे उत्पादन को प्रभावित करती है। ऐसे में कई राज्यों से हर साल खाद की कमी की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। इसी बीच केंद्र सरकार ने संसद में स्पष्ट किया है कि खरीफ़ 2026 के दौरान किसानों को उर्वरकों की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा और देशभर में पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध है।



सरकार के अनुसार, इस बार राज्यों की आवश्यकता का पहले से आकलन कर उसी के अनुरूप उर्वरकों की आपूर्ति की गई है। साथ ही उत्पादन, आयात, परिवहन और वितरण व्यवस्था पर लगातार नज़र रखी जा रही है, ताकि किसी भी क्षेत्र में खाद की कमी जैसी स्थिति उत्पन्न न हो। सरकार का कहना है कि वर्तमान भंडार और आपूर्ति व्यवस्था खरीफ़ सीज़न की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।



खरीफ़ सीज़न के लिए कैसे की गई उर्वरकों की तैयारी?

लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने बताया कि सरकार ने खरीफ़ सीज़न शुरू होने से पहले ही राज्यों की संभावित आवश्यकता का आकलन कर उर्वरकों का आवंटन किया। खाद की उपलब्धता पर नज़र रखने के लिए इंटीग्रेटेड फर्टिलाइज़र मैनेजमेंट सिस्टम (IFMS) का उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा अग्रिम आयात योजना, उर्वरक कंपनियों और आयातकों के साथ समन्वय तथा रेलवे के माध्यम से तेज़ परिवहन जैसी व्यवस्थाएँ भी लागू की गई हैं। सरकार के अनुसार, इन प्रयासों का उद्देश्य किसानों तक समय पर उर्वरक पहुँचाना और आपूर्ति को सुचारु बनाए रखना है।



मांग के मुकाबले कितनी रही खाद की उपलब्धता?

सरकार द्वारा संसद में साझा किए गए आँकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल से 27 जुलाई 2026 के बीच प्रमुख उर्वरकों की उपलब्धता अनुमानित मांग से अधिक रही। इस अवधि में यूरिया, डीएपी, एमओपी और एनपीकेएस सभी श्रेणियों में पर्याप्त मात्रा राज्यों तक पहुँचाई गई। सरकार का कहना है कि अतिरिक्त उपलब्धता इसलिए सुनिश्चित की गई ताकि बुवाई और फसल की देखभाल के दौरान किसानों को खाद के लिए इंतज़ार न करना पड़े और किसी भी राज्य में आपूर्ति बाधित न हो। सरकार के मुताबिक पर्याप्त स्टॉक होने से विभिन्न राज्यों में वितरण प्रक्रिया भी सुचारू बनी रही। इससे किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने में मदद मिली और खरीफ़ सीज़न के दौरान आपूर्ति पर दबाव कम रहा।



राज्यों में कितना सुरक्षित भंडार मौजूद है?

सरकार ने यह भी बताया कि 27 जुलाई 2026 तक देश में उर्वरकों का क्लोज़िंग स्टॉक संतोषजनक स्तर पर बना हुआ है। यूरिया, डीओपी (DAP), एमओपी (MOP) और एनपीकेएस (NPKS) का पर्याप्त शेष भंडार उपलब्ध है, जिससे आने वाले दिनों में भी आपूर्ति प्रभावित होने की संभावना कम है। इसके अलावा डीएपी के विकल्प के रूप में उपयोग होने वाले सिंगल सुपर फॉस्फेट का भी पर्याप्त भंडार उपलब्ध कराया गया है। सरकार का मानना है कि यह अतिरिक्त उपलब्धता किसानों की आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करेगी। सरकार ने यह भी संकेत दिया कि उपलब्ध भंडार के आधार पर आगामी अवधि में भी उर्वरकों को आपूर्ति सामान्य बनाए रखने का प्रयास जारी रहेगा। इससे राज्यों को आवश्यकता के अनुसार समय पर खाद उपलब्ध कराई जा सकेगी।



घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर क्यों है ज़ोर?

सरकार ने संसद में कहा कि उर्वरकों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए घरेलू उत्पादन क्षमता का लगातार विस्तार किया जा रहा है। नई निवेश नीति के तहत स्थापित नए यूरिया संयंत्रों से उत्पादन बढ़ा है, जबकि कुछ अन्य परियोजनियाँ अभी निर्माणाधीन हैं। वहीं, न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी (NBS) योजना के माध्यम से फॉस्फेटिक और पोटाश उर्वरकों के स्वदेशी उत्पादन को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। सरकार का कहना है कि इन प्रयासों से भविष्य में आयात पर निर्भरता कम होगी और किसानों को हर कृषि सीज़न में समय पर उर्वरक उपलब्ध कराना आसान होगा। सरकार का मानना है कि घरेलु उत्पादन क्षमता बढ़ने से देश को उर्वरक आपूर्ति व्यवस्था और मज़बूत होगी। साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में उतार-चढ़ाव का असर भी किसानों तक कम पहुँचेगा, जिससे कृषि क्षेत्र को दर्घकाल में लाभ मिलेगा।

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