Deep Sea Fishing: मछुआरों को फ्री राष्ट्रीय पास, टूना मछली से बढ़ेगा भारत का सीफूड एक्सपोर्ट

Gaon Connection | Feb 25, 2026, 17:39 IST
Image credit : Gaon Connection Network
भारत सरकार ने समुद्री खाद्य निर्यात को एक लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है। इस उद्देश्य से मछुआरों को विशेष आर्थिक क्षेत्र और गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए निःशुल्क राष्ट्रीय पास, आधुनिक नौकाएं और ठंडा भंडारण जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं।
<p>डीप सी फिशिंग<br></p>

Fishing Export: केंद्र सरकार देश के सीफूड एक्सपोर्ट को मौजूदा 62 हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर एक लाख करोड़ रुपये तक ले जाने की तैयारी में है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार मछुआरों को कई सुविधाएं दे रही है, जिसमें स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) और गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए मुफ्त राष्ट्रीय पास की शुरुआत शामिल है। सरकार का मानना है कि SEZ और डीप सी फिशिंग को बढ़ावा देकर टूना जैसी कीमती मछलियों का उत्पादन और निर्यात बढ़ाया जा सकता है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी मांग में है।



Deep Sea Fishing के लिए मिलेंगे Pass

Image credit : Gaon Connection Network

सरकार मछुआरों को गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसके लिए उन्हें मुफ्त राष्ट्रीय पास दिया जा रहा है। इससे मछुआरे SEZ और गहरे समुद्र में जाकर मछली पकड़ सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे टूना जैसी कीमती मछलियों का उत्पादन और निर्यात बढ़ेगा। अंडमान और लक्षद्वीप जैसे क्षेत्रों में टूना मछली प्रचुर मात्रा में पाई जाती है, लेकिन अब तक इसका पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाया है। टूना मछली की अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी मांग है।



बढ़ेगी सीफूड एक्सपोर्ट

Image credit : Gaon Connection Network

यह सीफूड एक्सपोर्ट बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा सकती है। भारत का समुद्री SEZ करीब 24 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला है और तटरेखा 11 हजार किलोमीटर से अधिक लंबी है। इसके बावजूद, ज्यादातर भारतीय मछुआरे तट से 40-50 समुद्री मील के भीतर ही मछली पकड़ते हैं। भारत के गहरे समुद्र में करीब दो लाख टन टूना मछली होने का अनुमान है। इसमें येलोफिन और स्किपजैक टूना प्रमुख हैं। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी संभावनाओं के बावजूद अभी केवल लगभग 25 हजार टन टूना मछली ही पकड़ी जा रही है। यानी क्षमता का बहुत छोटा हिस्सा ही उपयोग में लाया जा रहा है।



अंडमान-निकोबार द्वीप समूह टूना मछली का ‘बैंक’

Image credit : Gaon Connection Network

अंडमान-निकोबार द्वीप समूह को तो टूना मछली का ‘बैंक’ कहा जाता है। यहां येलोफिन, स्किपजैक, बिग आई और नेरिटिक टूना जैसी कई प्रजातियाँ पाई जाती हैं। इसके बावजूद भारतीय टूना को अंतरराष्ट्रीय बाजार में वह दाम नहीं मिल पाता, जो दूसरे देशों की टूना को मिलता है। इसका एक बड़ा कारण यह है कि गहरे समुद्र से मछली पकड़कर बाजार तक लाने में समय ज्यादा लग जाता है, जिससे उसकी गुणवत्ता प्रभावित होती है।



टूना मछली के सेहत के लिए फायदे

टूना मछली सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद है। इसमें कैल्शियम, विटामिन-डी और मैग्नीशियम अच्छी मात्रा में होते हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड भी भरपूर होता है, जो दिल की सेहत के लिए अच्छा है। यह आंखों की रोशनी बनाए रखने और वजन नियंत्रित करने में भी उपयोगी है।सरकार का ध्यान अब SEZ जैसे विशाल समुद्री क्षेत्रों का बेहतर इस्तेमाल करने और मछुआरों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने पर है। मुफ्त राष्ट्रीय पास जैसी पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अगर गहरे समुद्र में मौजूद संसाधनों का सही तरीके से उपयोग किया गया, तो टूना जैसी कीमती मछलियाँ भारत के सीफूड एक्सपोर्ट को एक लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

Tags:
  • Seafood Export
  • सीफूड एक्सपोर्ट
  • Deep Sea Fishing
  • डीप सी फिशिंग
  • Special Economic Zone (SEZ)