Fish Stocks: ट्रॉलिंग को लेकर सरकार ने दूर की चिंता, सामने आई राहत भरी तस्वीर, भारत के 91.1% मत्स्य भंडार सुरक्षित
भारत के समुद्री मत्स्य संसाधनों को लेकर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (सीएमएफआरआई) की ताज़ा समीक्षा में राहत देने वाली तस्वीर सामने आई है। संस्थान के अनुसार, देश के अधिकांश समुद्री मत्स्य भंडार अभी भी टिकाऊ स्थिति में हैं और वर्ष 2021 से 2025 के दौरान ट्रॉलिंग के ज़रिए होने वाली मछली की लैंडिंग (उतार) में कोई उल्लेखनीय गिरावट दर्ज नहीं की गई है।
यह जानकारी केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी। उनसे तटीय समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर मशीनीकृत ट्रॉलरों की बढ़ती संख्या और अनियंत्रित विस्तार के प्रभाव को लेकर सवाल पूछा गया था। मंत्री ने बताया कि सीएमएफआरआई के आकलन के अनुसार इस अवधि में ट्रॉलिंग आधारित मछली लैंडिंग में किसी स्पष्ट गिरावट के संकेत नहीं मिले हैं।
91.1% समुद्री मत्स्य भंडार टिकाऊ पाए गए
सीएमएफआरआई की रिपोर्ट ‘मरीन फिश स्टॉक स्टेटस ऑफ इंडिया (2022)’ के अनुसार, भारत के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईज़ेड) के विभिन्न हिस्सों में आंके गए 135 समुद्री मत्स्य भंडारों में से 91.1 प्रतिशत टिकाऊ पाए गए हैं।
मंत्री ने बताया कि सीएमएफआरआई समुद्री मत्स्य संसाधनों और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की लंबे समय से निगरानी कर रहा है। इसके लिए खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) द्वारा अनुशंसित सांख्यिकीय रूप से प्रमाणित बहु-स्तरीय नमूना पद्धति का उपयोग किया जाता है। संस्थान देश की लगभग 11,000 किलोमीटर लंबी तटरेखा पर स्थित 1,300 से अधिक मछली लैंडिंग केंद्रों से मछली उत्पादन और मत्स्य गतिविधियों से जुड़े आँकड़े एकत्र कर मत्स्य भंडार की स्थिति और पारिस्थितिकी तंत्र में हो रहे बदलावों का आकलन करता है।
समुद्री जैव विविधता और ट्रॉलिंग के प्रभाव पर चल रहे अध्ययन
राजीव रंजन सिंह ने बताया कि सीएमएफआरआई समुद्री जैव विविधता, समुद्र तल के पारिस्थितिकी तंत्र (बेंथिक इकोसिस्टम), खाद्य श्रृंखला संबंधों (ट्रॉफिक इंटरैक्शन) और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर बॉटम ट्रॉलिंग के प्रभाव से जुड़े राष्ट्रीय कार्यक्रमों का संचालन कर रहा है।
मंत्री ने यह भी कहा कि तटीय क्षेत्रों में पारंपरिक मछुआरों की सुरक्षा के लिए मशीनीकृत ट्रॉलरों के पाँच समुद्री मील प्रतिबंधित क्षेत्र के पालन का विषय राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आता है। मत्स्य पालन राज्य का विषय है और सभी तटीय राज्यों ने अपने-अपने समुद्री मत्स्य विनियमन अधिनियम (एमएफआरए) लागू किए हैं। ये कानून आधार रेखा से 12 समुद्री मील तक के क्षेत्र में पारंपरिक और मशीनीकृत नौकाओं के संचालन, मछली पकड़ने के क्षेत्रों के निर्धारण, जाल के आकार, मछली पकड़ने के उपकरणों, मौसमी प्रतिबंध, मछलियों के न्यूनतम आकार और विनाशकारी मत्स्य गतिविधियों पर रोक जैसे प्रावधानों को नियंत्रित करते हैं।
पीएमएमएसवाई के तहत समुद्री मत्स्य संरक्षण पर ज़ोर
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत पारंपरिक मछुआरों की आजीविका सुरक्षित करने और समुद्री मत्स्य संसाधनों को बढ़ाने के लिए कई पहल की जा रही हैं।
इनमें ट्रॉल जालों में टर्टल एक्सक्लूडर डिवाइस (टीईडी) लगाकर समुद्री कछुओं की सुरक्षा, समुद्री मत्स्य संवर्धन (सी रैंचिंग) कार्यक्रम और तटीय समुद्री क्षेत्रों में कृत्रिम रीफ़ स्थापित करना शामिल है। इसके अलावा योजना के तहत गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाले जहाज़ों को बढ़ावा देने, खुले समुद्र में केज कल्चर, मैरीकल्चर और समुद्री शैवाल की खेती को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि तटीय जल क्षेत्रों में मछली पकड़ने का दबाव कम किया जा सके।