पेपर लीक पर सख़्त क़ानून की तैयारी, कैबिनेट ने पेपर लीक संशोधन विधेयक को दी मंज़ूरी; अगले हफ़्ते संसद में होगा पेश
केंद्र सरकार ने परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों पर सख़्त कार्रवाई की दिशा में एक और क़दम बढ़ाते हुए शुक्रवार को 'पेपर लीक विधेयक संसोधन' को केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंज़ूरी दे दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेपर लीक के मामलों में कड़े प्रावधान लाने की घोषणा के कुछ घंटों बाद ही कैबिनेट ने इस मसौदे को हरी झंडी दे दी। सरकार अब इस विधेयक को अगले सप्ताह संसद में पेश करने की तैयारी कर रही है। यह फ़ैसला ऐसे समय आया है, जब नीट-यूजी परीक्षा में कथित पेपर लीक को लेकर देशभर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है।
पेपर लीक का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में है। छात्र संगठनों के प्रदर्शन, जवाबदेही की माँग और विपक्षी दलों के विरोध के बीच सरकार ने सख़्त क़ानूनी व्यवस्था लागू करने की दिशा में यह पहल की है। विपक्ष शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े और इस मुद्दे पर संसद में विस्तृत चर्चा की माँग कर रहा है। इसी बीच प्रधानमंत्री ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों को संबोधित अपने वीडियो संदेश में अगले सप्ताह संसद में नया विधेयक लाने की घोषणा की थी।
2024 में भी बना था क़ानून, अब फिर नया विधेयक लाने की तैयारी
केंद्र सरकार ने इससे पहले भी वर्ष 2024 में पेपर लीक के मामलों से निपटने के लिए क़ानून बनाया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मंज़ूरी मिलने के बाद 'सार्वजनिक परीक्षाएँ (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024' जून 2024 में अधिसूचित किया गया था। उस समय भी नीट और नेट परीक्षाओं में कथित पेपर लीक के आरोपों को लेकर विवाद तेज़ था।
इस क़ानून से पहले केंद्र सरकार और उसकी एजेंसियों द्वारा आयोजित सार्वजनिक परीक्षाओं में गड़बड़ियों और अनुचित साधनों से जुड़े अपराधों से निपटने के लिए कोई अलग व्यापक क़ानून नहीं था। यह अधिनियम संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी), कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी), रेलवे भर्ती परीक्षाओं, बैंकिंग भर्ती परीक्षाओं और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) सहित कई केंद्रीय परीक्षाओं पर लागू होता है।
पहले से मौजूद क़ानून में क्या हैं सज़ा के प्रावधान
2024 के क़ानून में नकल और पेपर लीक जैसे मामलों पर सख़्त सज़ा का प्रावधान किया गया था। इसके तहत दोषी पाए जाने पर कम-से-कम तीन से पाँच वर्ष तक की क़ैद हो सकती है। वहीं, संगठित स्तर पर पेपर लीक या नकल कराने वाले गिरोहों से जुड़े मामलों में पाँच से दस वर्ष तक की क़ैद और न्यूनतम एक करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।
इस क़ानून में परीक्षा संचालन के दौरान अन्य सरकारी एजेंसियों की सेवाएँ लेने, परीक्षा से जुड़े मानक और दिशा-निर्देश तैयार करने तथा अनुचित गतिविधियों की रिपोर्टिंग जैसी व्यवस्थाएँ भी शामिल की गई थीं। इसके अलावा परीक्षा केंद्रों की तैयारी का पूर्व ऑडिट, अभ्यर्थियों की बायोमेट्रिक पंजीकरण प्रक्रिया, सुरक्षा व्यवस्था, सीट आवंटन, प्रश्नपत्र तैयार करने और अपलोड करने की प्रक्रिया, परीक्षा के दौरान निगरानी, परीक्षा के बाद की कार्यवाही और स्क्राइब उपलब्ध कराने संबंधी दिशा-निर्देश भी इसमें शामिल हैं।
15 तरह की ग़ैरक़ानूनी गतिविधियाँ शामिल, संसद में पेश होगा नया विधेयक
2024 के क़ानून में 15 प्रकार की ग़ैरक़ानूनी गतिविधियों को अपराध की श्रेणी में रखा गया है। इनमें प्रश्नपत्र लीक करना, ओएमआर शीट से छेड़छाड़ करना, फ़र्ज़ी वेबसाइट बनाना और फ़र्ज़ी प्रवेश पत्र जारी करना जैसी गतिविधियाँ शामिल हैं।
अब केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पेपर लीक पर और सख़्त कार्रवाई के उद्देश्य से नए विधेयक के मसौदे को मंज़ूरी दे दी है। सरकार इसे अगले सप्ताह संसद में पेश करने की तैयारी कर रही है। इस विधेयक में पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ कड़े प्रावधान होंगे. इसमें स्पेशल फॉस्ट ट्रैक कोर्ट को लीगल बैकिग मिलेगी. साथ ही फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट को तीन महीनों में सुनवाई करने और फैसला देने को कहा जाएगा, जबकि पेपर लीक मामले में 10 साल की सजा और 10 करोड़ के जुर्माना का प्रावधान होगा। यह क़दम ऐसे समय उठाया गया है, जब नीट-यूजी परीक्षा में कथित पेपर लीक के विरोध में छात्रों का आंदोलन देशभर में फैल चुका है और इस मुद्दे पर राजनीतिक तथा संसदीय बहस भी तेज़ हो गई है।