बिहार के गाँवों में भी लगेगा टैक्स, कैबिनेट ने नियमावली को दी मंज़ूरी; जानिए मकान, पेट्रोल पंप और होर्डिंग के लिए देना होगा कितना पैसा
बिहार सरकार ने ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में ग्राम पंचायत कर, दर और शुल्क नियमावली-2026 को मंज़ूरी दे दी गई। इसके लागू होने के बाद राज्य की ग्राम पंचायतों को अपने क्षेत्र में होल्डिंग टैक्स सहित विभिन्न प्रकार के कर और शुल्क वसूलने का अधिकार मिल जाएगा। अब पंचायतें मकानों, पेशा, व्यापार, उद्योग, हाट-बाज़ार, सिनेमाघरों, होर्डिंग, विज्ञापनों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों पर निर्धारित नियमों के तहत कर लगा सकेंगी।
कैबिनेट के इस फैसले का उद्देश्य ग्राम पंचायतों की अपनी आय बढ़ाना और उन्हें सरकारी अनुदान पर निर्भरता से बाहर निकालना है। बैठक में पंचायत चुनाव से जुड़ा एक अहम फैसला भी लिया गया। सरकार ने आगामी पंचायत चुनाव वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर नए परिसीमन के अनुसार कराने को मंज़ूरी दी है। इसके तहत ग्राम पंचायत, वार्ड, पंचायत समिति और ज़िला परिषद क्षेत्रों का पुनर्गठन किया जाएगा, ताकि स्थानीय निकायों में संतुलित प्रतिनिधित्व और विकास योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।
मकान, होर्डिंग और पेट्रोल पंप तक पर लगेगा टैक्स, पंचायतें तय करेंगी सेवा शुल्क
मंत्रिमंडल विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने कहा, "बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा-27 में ग्राम पंचायतों को विभिन्न प्रकार के कर और शुल्क लगाने का प्रावधान पहले से था, लेकिन इसके लिए कोई नियमावली नहीं बनाई गई थी। आवश्यक नियमावली और संशोधन नहीं होने के कारण इसे लागू नहीं किया जा सका था। अब नियमावली लागू होने के बाद पंचायतें अपने क्षेत्र में विभिन्न मदों पर कर और शुल्क वसूल सकेंगी।
नई व्यवस्था के तहत पक्के मकानों पर 100 रुपये, अर्द्ध पक्के मकानों पर 50 रुपये और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने मकानों पर 25 रुपये वार्षिक होल्डिंग टैक्स लिया जाएगा। इसके अलावा सफ़ाई शुल्क 30 रुपये और जलापूर्ति शुल्क 30 रुपये निर्धारित किया गया है। वहीं पेट्रोल पंप, रसोई गैस एजेंसी, ईंट भट्ठा (चिमनी) और सिनेमाघरों पर 5,000 रुपये वार्षिक शुल्क लगाया जाएगा। ग्राम पंचायतें होर्डिंग, विज्ञापन, हाट-बाज़ार, पेशा, व्यापार और उद्योगों से भी कर वसूल सकेंगी। साथ ही पंचायत की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाओं के बदले सेवा शुल्क तय करने का अधिकार भी उन्हें होगा।
पंचायतों की आय बढ़ाने पर सरकार का फोकस, 2011 की जनगणना के आधार पर होगा परिसीमन
सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था से ग्राम पंचायतों की आर्थिक स्थिति मज़बूत होगी और स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होंगे। पंचायतें अपनी आय से सड़क, नाली, पेयजल, सफ़ाई और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर अधिक खर्च कर सकेंगी।
कैबिनेट ने पंचायती राज विभाग के एक अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव को भी मंज़ूरी दी है। इसके तहत ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और ज़िला परिषद क्षेत्रों का परिसीमन वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाएगा। इसी आधार पर वार्डों और पंचायत क्षेत्रों का गठन तथा पुनर्गठन होगा। जहाँ आवश्यकता होगी, वहाँ नए क्षेत्र बनाए जाएँगे और पुराने क्षेत्रों का पुनर्गठन किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे भौगोलिक और सामाजिक संतुलन बनाए रखते हुए स्थानीय निकायों में बेहतर प्रतिनिधित्व मिलेगा और विकास योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सकेगा।