Green Fodder: गर्मी में हरा चारा बन सकता है जानलेवा! किसान भाई-बहन पशुओं को खिलाने से पहले जान लें ये जरूरी बातें, वरना हो सकता है नुकसान

Preeti Nahar | Jun 11, 2026, 15:56 IST
Image credit : Gaon Connection Network
क्या आप जानते हैं कि जो हरा चारा गर्मी में किसान अपने पशुओं को खिला रहा है वो जानलेवा हो सकता है? जी हां, गर्मी में पशुओं के लिए हरा चारा बेहद जरूरी होता है, क्योंकि यह पोषण देने के साथ-साथ उन्हें हीट स्ट्रेस से बचाने में मदद करता है। हालांकि, ज्वार और बाजरा जैसे कुछ चारे में पानी की कमी, फसल पर तनाव या गलत समय पर कटाई के कारण जहरीले तत्व बन सकते हैं, जो जानलेवा होते हैं। जानिए कि आखिर हरे चारे को पशुओं के लिए सुरक्षित तरीके से कैसे खिलाएं और जहरीले चारे से कैसे बचें?

Toxic Fodder: देश और दुनिया में बढ़ते तापमान का असर सिर्फ इंसानों पर ही नहीं, बल्कि पशुओं पर भी पड़ रहा है। गर्मी के मौसम में दुधारू पशुओं को ज्यादा पोषण और पानी की जरूरत होती है, ऐसे में हरा चारा उनकी डाइट का अहम हिस्सा बन जाता है। हरा चारा पशुओं को जरूरी पोषक तत्व देने के साथ-साथ शरीर का तापमान नियंत्रित रखने और हीट स्ट्रेस से बचाने में मदद करता है।



लेकिन किसानों के लिए जरूरी बात यह है कि गर्मियों में पशुओं को हरा चारा खिलाते समय सावधानी बरतें। क्योंकि अगर चारे की किस्म, सिंचाई, कटाई का समय और उसे खिलाने के तरीके का ध्यान नहीं रखा गया तो यही पौष्टिक चारा पशुओं के लिए नुकसानदायक और कई बार जानलेवा भी साबित हो सकता है। खासकर ज्वार और बाजरा जैसे हरे चारे में कुछ खास सिचुएशन्स में ध्यान न देने से जहरीले तत्व बनने का खतरा रहता है।



भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान (IGFRI), झांसी के डेयरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. पुरुषोत्तम शर्मा ने गाँव कनेक्शन को बताया, "हरा चारा पशुओं के लिए बहुत फायदेमंद है, लेकिन इसे सही अवस्था में काटना और सही तरीके से खिलाना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि मौसम की स्थिति, फसल की उम्र और खेत में पानी की उपलब्धता का सीधा असर चारे की गुणवत्ता पर पड़ता है।"



सूखे और गर्मी में हरा चारा हो सकता है खतरनाक

गर्मी के मौसम में जब पानी की कमी होती है या फसल किसी कारण से तनाव (Stress) में आ जाती है, तो कुछ चारा फसलों में जहरीले तत्वों की मात्रा बढ़ सकती है। खासकर ज्वार की फसल में हाइड्रोसायनिक एसिड (HCN)Hydrocyanic Acid यानी साइनाइड बनने का खतरा रहता है।



हाइड्रोसायनिक एसिड (HCN) यानी साइनाइड एक जहरीला तत्व है, जो पशु के शरीर में ऑक्सीजन पहुंचने की प्रक्रिया को रोक देता है। अगर पशु ने ज्यादा मात्रा में ऐसा जहरीला चारा खा लिया तो कुछ ही समय में सांस लेने में परेशानी, बेचैनी, मुंह से झाग आना, कमजोरी जैसी समस्या आ सकती है।



इसके अलावा गंभीर स्थिति में अचानक मौत भी हो सकती है। डॉ. पुरुषोत्तम शर्मा के मुताबिक ये परेशानी तब आती है जब हरे चारे का बिना जांचे ही पशुओं को खिला दिया जाता है।



कैसे जांचे हरा चारा सुरक्षित है या नहीं?

डॉ शर्मा ने बताया कि कई बार खेतों में पानी की कमी हो जाती है या सिंचाई में देरी हो जाती है, तब हरे चारे की पत्तियाँ झुलस जाती है या मुरझाने लगती है। उस वक्त हरे चारे की कटाई पशुओं को खिलाने के लिए न करें क्योंकि पानी की कमी वाला चारा जहरीला/Toxic Fodder हो जाता है। अगर खेत में पानी की कमी है तो पशुओं को खिलाने से 2 से 3 दिन पहले खेत की सिंचाई करें, उसके बाद वाला हरा ही चारा ही पशु को खिलाएं।



ज्वार कब बन जाती है जहरीली?

ज्वार (Sorghum) जैसे चारे में जहरीलेपन की समस्या तब होती है, जब पौधे में मौजूद सायनोजेनिक ग्लाइकोसाइड (खासकर ड्यूरिन) और नाइट्रेट की मात्रा बढ़ जाती है। सूखा, पाला, पौधे का कुचलना, रौंदना या किसी तरह का तनाव झेलने के बाद ये तत्व टूटकर हाइड्रोजन साइनाइड (HCN) यानी प्रूसिक एसिड में बदल सकते हैं, जो बेहद जहरीला होता है। इसके लिए खासकर ज्वार को बोने से 50 से 55 दिन या लगभग डेढ़ महिने के बाद ही कटाई करें चारे के लिए। ताकि चारा पूरी तरह से तैयार हो जाए।



कृषि विज्ञान केंद्र, सीतापुर, उत्तर प्रदेश के पशुपालन विभाग के वैज्ञानिक डॉ आनंद सिंह ने गाँव कनेक्शन को हरे चारे से बीमार हुए पशुओं के बचाव के घरेलू तरीके बताएं हैं-"अगर पशु ने जहरीला चारा खा लिया है तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। किंतु आपात स्थिति में इलाज की व्यवस्था होने तक कुछ मामलों में सल्फर देने वाले पदार्थ (Sulfur donors), क्षारीय पदार्थ (Alkalis) या गुड़ (Jaggery) दिए जाते हैं, ताकि रूमेन (पशु के पेट के एक हिस्से) में जहर के घुलने की गति को धीमा किया जा सके। हालांकि, ये केवल शुरुआती मदद के तौर पर हो सकते हैं और सही उपचार के लिए पशु विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।"



किन फसलों पर देना है ध्यान

सबसे अधिक ज्वार और बाजरे/ Sorghum Fodder के हरे चारे में इस तरह की परेशानी आती है। बहुत छोटी फसल या दोबारा उगी हुई फसल को सीधे पशुओं को नहीं खिलाना चाहिए, क्योंकि इस अवस्था में जहरीले तत्वों की मात्रा ज्यादा हो सकती है।



हरे चारे की कटाई कब करें?

पशुपालकों को हरे चारे की कटाई के समय का विशेष ध्यान रखना चाहिए। बहुत कम उम्र की फसल को काटने से बचना चाहिए। चारे को तब काटना बेहतर होता है जब पौधा पर्याप्त विकसित हो जाए और उसमें पोषक तत्वों की मात्रा अच्छी हो।



इसके अलावा बारिश, सूखे या किसी प्राकृतिक कारण से प्रभावित हुई फसल को तुरंत पशुओं को खिलाने से बचना चाहिए। ऐसी स्थिति में विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहता है।



हरा चारा खिलाने का सही तरीका

पशुओं को अचानक ज्यादा मात्रा में हरा चारा नहीं देना चाहिए। अगर पशु लंबे समय से सूखा चारा खा रहे हैं तो धीरे-धीरे उनकी डाइट में हरे चारे की मात्रा बढ़ानी चाहिए।



हरा चारा हमेशा सूखे चारे के साथ मिलाकर देना ज्यादा फायदेमंद रहता है। इससे पशुओं को संतुलित पोषण मिलता है और पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा भी कम होता है।



गर्मी में कौन-कौन से हरे चारे फायदेमंद?

गर्मी के मौसम में किसान ज्वार, मक्का, बाजरा, नेपियर घास और अन्य हरी चारा फसलों का इस्तेमाल करते हैं। इनमें पानी और पोषक तत्वों की मात्रा अधिक होती है, जिससे पशुओं को गर्मी में राहत मिलती है। हालांकि, हर चारे को उसकी गुणवत्ता और अवस्था देखकर ही खिलाना चाहिए।



हरे चारे को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी सावधानियां

  1. सूखे की स्थिति के बाद उगी छोटी ज्वार की फसल पशुओं को न खिलाएं।
  2. कटे हुए हरे चारे को कुछ समय रखने के बाद खिलाएं।
  3. गिरे हुए, सड़े या फफूंद लगे चारे का इस्तेमाल न करें।
  4. हरे चारे के साथ सूखा चारा जरूर मिलाएं।
  5. चारे की गुणवत्ता को लेकर किसी तरह का संदेह हो तो पशु विशेषज्ञ से सलाह लें।

गर्मी में हरा चारा पशुओं की सेहत और दूध उत्पादन के लिए बेहद जरूरी है, लेकिन इसका फायदा तभी मिलेगा जब किसान सही समय पर कटाई, उचित सिंचाई और सुरक्षित तरीके/Cattle Feed Management से चारा खिलाने का ध्यान रखेंगे। थोड़ी सी सावधानी पशुओं को नुकसान से बचा सकती है और उनकी उत्पादकता भी बनाए रख सकती है।

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