अल नीनो पर पहला विशेष बुलेटिन हुआ जारी, हिंद महासागर में बढ़ेगी गर्मी, मछलियों के पलायन की आशंका
हिंद महासागर में विकसित हो रहे अल नीनो के प्रभाव को देखते हुए भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (आईएनसीओआईएस) ने पहली बार विशेष अल नीनो बुलेटिन जारी किया है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत कार्यरत संस्था का कहना है कि अल नीनो की स्थिति लगातार मज़बूत हो रही है और इसके 2026 के अंत तक चरम पर पहुँचने की संभावना है। समुद्र की सतह के तापमान में बढ़ोतरी के कारण आने वाले महीनों में समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र, मत्स्य क्षेत्र और तटीय इलाकों पर व्यापक प्रभाव पड़ सकते हैं।
आईएनसीओआईएस द्वारा जारी बुलेटिन में कहा गया है कि समुद्री तापमान में वृद्धि का असर समुद्री जैव विविधता के साथ-साथ मछली उत्पादन और समुद्र आधारित आजीविका पर भी पड़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए संस्था ने समुद्री संचालकों, मछुआरों और अन्य हितधारकों को समय-समय पर जारी होने वाली चेतावनियों और सलाहों का पालन करने की सलाह दी है। समुद्री क्षेत्रों पर अल नीनो के संभावित प्रभावों की जानकारी देने के उद्देश्य से आईएनसीओआईएस ने विशेष अल नीनो बुलेटिन श्रृंखला शुरू की है।
सांसद कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी ने जारी किया पहला बुलेटिन
आईएनसीओआईएस द्वारा जारी पहला विशेष अल नीनो बुलेटिन 22 जून 2026 को आयोजित एक कार्यक्रम में चेवेल्ला संसदीय क्षेत्र के सांसद कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी द्वारा जारी किया गया। यह बुलेटिन समुद्री क्षेत्रों पर अल नीनो के संभावित प्रभावों को रेखांकित करता है और समुद्री गतिविधियों से जुड़े लोगों को अग्रिम जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
सर्दियों में चरम पर पहुँच सकता है अल नीनो
बुलेटिन के अनुसार अल नीनो की घटना लगातार विकसित हो रही है और इसके नवंबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच चरम पर पहुँचने की संभावना है। इसके प्रभाव से हिंद महासागर में समुद्र की सतह का तापमान अप्रैल-मई 2027 तक सामान्य से अधिक बना रह सकता है।
आईएनसीओआईएस ने अपने बुलेटिन में कहा है कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी सहित उत्तरी हिंद महासागर के समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर आने वाले महीनों में, विशेषकर मार्च से मई 2027 के दौरान, ऊष्मीय दबाव बढ़ सकता है।
कोरल रीफ़ और मछली उत्पादन पर असर की आशंका
आईएनसीओआईएस के अनुसार बढ़ते समुद्री तापमान के कारण प्रवाल भित्तियों (कोरल रीफ़) के विरंजन की घटनाएँ बढ़ सकती हैं। साथ ही समुद्री तापप्रसव (मरीन हीटवेव) अधिक बार देखने को मिल सकते हैं। बुलेटिन में कहा गया है कि सार्डिन और मैकेरल जैसी मछली प्रजातियों के उत्पादन में कमी आने की आशंका है, क्योंकि बढ़ते तापमान के कारण मछलियाँ अधिक अनुकूल आवासों की ओर पलायन कर सकती हैं या उनके प्रजनन पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा समुद्री पर्यावरणीय परिस्थितियों में बदलाव के कारण मछलियाँ अपेक्षित आकार भी प्राप्त नहीं कर पाएँगी।
बंगाल की खाड़ी में अशांत रह सकता है समुद्र
आईएनसीओआईएस के अनुसार मानसून के दौरान बंगाल की खाड़ी में समुद्र की स्थिति अपेक्षाकृत अधिक अशांत रह सकती है। इसके कारण भारत के पूर्वी तट पर तटीय कटाव और बाढ़ की घटनाएँ बढ़ने की संभावना है। वहीं अरब सागर और पश्चिमी तट पर समुद्र की स्थिति सामान्य से अधिक शांत रहने का अनुमान है। इससे विभिन्न समुद्री क्षेत्रों के संचालन के लिए अपेक्षाकृत अधिक अवसर उपलब्ध हो सकते हैं। साथ ही पश्चिमी तट पर तटीय कटाव और जलभराव की घटनाएँ कम रहने की संभावना जताई गई है।
समुद्री संचालकों को जारी की गई सलाह
आईएनसीओआईएस ने सभी समुद्री संचालकों को समय-समय पर जारी किए जाने वाले अलर्ट, चेतावनियों और परामर्शों पर कड़ी नज़र रखने की सलाह दी है।संस्था ने बताया कि अल नीनो की स्थिति की निरंतर निगरानी की जा रही है और अगला विशेष अल नीनो बुलेटिन जुलाई 2026 के दूसरे सप्ताह में जारी किया जाएगा।