दक्षिण कोरिया की तकनीक से गुजरात के इन ज़िलों में बनेंगे दो रबर डैम, 160 करोड़ आएगी लागत; जानिए पारंपरिक बाँध से क्यों हैं अलग
गुजरात सरकार राज्य में पहली बार दक्षिण कोरिया की तकनीक पर आधारित एयर-फिल्ड (हवा से फुलाए जाने वाले) रबर डैम बनाने जा रही है। करीब 160 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले ये दो रबर डैम छोटा उदयपुर ज़िले की हेरन नदी और तापी ज़िले की अंबिका नदी पर बनाए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य सिंचाई के लिए सालभर पानी की उपलब्धता बढ़ाना, भूजल स्तर में सुधार करना और मानसून के दौरान बाढ़ के जोखिम को कम करना है।
राज्य सरकार का मानना है कि जिन क्षेत्रों में नदी का भू-भाग समतल है और किनारे अपेक्षाकृत नीचले हैं, वहाँ पारंपरिक चेक डैम या गेट वाले बाँध उतने प्रभावी नहीं होते। ऐसे में रबर डैम बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं। ये डैम सूखे के दौरान पानी रोककर रखते हैं, जबकि भारी बारिश के समय हवा निकालकर नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखते हैं। इससे बाढ़, कटाव और गाद (सिल्ट) जमने की समस्या भी कम होती है। इन परियोजनाओं में आधुनिक स्वचालित (ऑटोमेशन) प्रणाली भी लगाई जा रही है, जिससे डैम का संचालन बिना मानवीय हस्तक्षेप के किया जा सकेगा।
हेरन नदी पर 82.97 करोड़ रुपये की परियोजना, 25 गाँवों को मिलेगा लाभ
छोटा उदयपुर ज़िले के बोडेली तालुका स्थित राजवसाना में हेरन नदी पर 82.97 करोड़ रुपये की लागत से रबर डैम का निर्माण किया जा रहा है। परियोजना का लगभग 75 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और इसे 30 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह परियोजना शुरू होने के बाद 25 गाँवों की 3,420 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई की सुविधा मिलेगी। डैम में 180 मीटर लंबा और 3.5 मीटर ऊँचा रबर ब्लैडर लगाया जा रहा है, जिससे मौजूदा वीयर (Weir) की जल भंडारण क्षमता बढ़कर 3.5 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) हो जाएगी।
परियोजना के तहत बाढ़ से सुरक्षा के लिए नदी के बाएँ किनारे पर 900 मीटर और दाएँ किनारे पर 500 मीटर लंबी सुरक्षा दीवार भी बनाई जा रही है। इसके अलावा, परियोजना में 10 वर्षों का संचालन एवं रखरखाव (ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस) अनुबंध भी शामिल किया गया है, ताकि इसकी दीर्घकालिक कार्यक्षमता बनी रहे।
अंबिका नदी पर SCADA आधारित रबर डैम
दूसरी परियोजना तापी ज़िले के डोलवन तालुका के पथकवाड़ी गाँव में 79.13 करोड़ रुपये की लागत से विकसित की जा रही है। इसका लगभग 90 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। परियोजना से पथकवाड़ी, धोडियावाड, उनाई और सिंधाई सहित आसपास के गाँवों की करीब 650 हेक्टेयर कृषि भूमि को सुनिश्चित सिंचाई सुविधा मिलेगी। यह रबर डैम जापानी कोड-2000 मानकों के अनुसार तैयार किया जा रहा है। इसमें दक्षिण कोरिया में निर्मित 18 से 32 मिमी मोटाई वाला रबर ब्लैडर लगाया जा रहा है, जिसकी अनुमानित आयु लगभग 30 वर्ष है। डैम की कुल ऊँचाई 4.5 मीटर होगी, जिसमें 2.5 मीटर का रबर ब्लैडर और 2 मीटर का कंक्रीट आधार शामिल होगा। इसकी कुल लंबाई 280 मीटर होगी और इसे चार हिस्सों में बनाया जा रहा है।
इस परियोजना में सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन (SCADA) आधारित ऑटोमेशन सिस्टम लगाया जा रहा है, जिससे डैम में हवा भरने और निकालने की प्रक्रिया पूरी तरह स्वचालित होगी। इससे मानसून के दौरान अतिरिक्त पानी और गाद आसानी से निकल सकेगी, जबकि सामान्य दिनों में पर्याप्त जल भंडारण बना रहेगा। अधिकारियों के अनुसार, दोनों रबर डैम स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किए गए हैं। इनके बनने से भूजल स्तर में सुधार, सिंचाई के लिए स्थायी जल उपलब्धता और आसपास के गाँवों में पेयजल आपूर्ति को भी मज़बूती मिलने की उम्मीद है।