UP: अब गाँवों के क़रीब मिलेगी स्वास्थ्य सुविधा, डिप्टी CM ने मोबाइल हेल्थ यूनिट्स को दिखाई हरी झंडी
ग्रामीण इलाक़ों में रहने वाले लोगों के लिए बीमारी की जाँच या डॉक्टर से सलाह लेने के लिए शहर तक जाना हमेशा आसान नहीं होता। कई बार दूरी, आने-जाने का खर्च और समय की कमी के कारण लोग छोटी स्वास्थ्य समस्याओं को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। ख़ासकर महिलाओं, बच्चों और बुज़ुर्गों के लिए समय पर स्वास्थ्य सुविधा तक पहुँचना चुनौती बन जाता है। ऐसे में अगर शुरुआती जाँच और डॉक्टर की सलाह गाँव के क़रीब ही मिल जाए, तो बीमारी की पहचान समय रहते की जा सकती है।
इसी ज़रूरत को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को ग्रामीण इलाक़ों तक पहुँचाने की नई पहल शुरू की गई है। लखनऊ में हिंदुजा मोबाइल हेल्थ यूनिट्स की शुरुआत की गई है। इन मोबाइल यूनिट्स का उद्देश्य ऐसे गाँवों तक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाना है, जहाँ लोगों को सामान्य जाँच और इलाज के लिए भी दूर जाना पड़ता है। पहल के तहत लोगों को गाँव में ही शुरुआती स्वास्थ्य जाँच, बीमारी की पहचान और डॉक्टर की सलाह देने की कोशिश की जाएगी।
डिप्टी सीएम ने दिखाई मोबाइल यूनिट्स को हरी झंडी
लखनऊ के शहीद पथ स्थित लोहिया संस्थान के मातृ एवं शिशु रेफरल अस्पताल में आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इन मोबाइल हेल्थ यूनिट्स को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश शासन के स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन और पीडी हिंदुजा हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च सेंटर के संयुक्त सहयोग से आयोजित किया गया। इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया। मोबाइल यूनिट्स के ज़रिए कोशिश होगी कि सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं की शुरुआती स्तर पर ही जाँच हो जाए। इससे मरीजों को हर छोटी समस्या के लिए शहर के बड़े अस्पताल जाने की ज़रूरत कम हो सकती है।
महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य पर रहेगा विशेष ध्यान
इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा महिलाओं और बच्चों का स्वास्थ्य है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई महिलाएँ नियमित स्वास्थ्य जाँच नहीं करा पातीं। इसी तरह बच्चों में किसी बीमारी के शुरुआती लक्षणों की समय पर पहचान न होने पर समस्या गंभीर हो सकती है। मोबाइल हेल्थ यूनिट्स के ज़रिए इन वर्गों तक स्वास्थ्य सुविधा पहुँचाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। अगर जाँच के दौरान किसी महिला, बच्चे या दूसरे मरीज में गंभीर या जटिल बीमारी के संकेत मिलते हैं, तो उसे आगे के इलाज के लिए बड़े स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में रेफर किया जाएगा। इससे ग्रामीण स्तर पर बीमारी की पहचान और ज़रूरत पड़ने पर विशेषज्ञ इलाज के बीच एक कड़ी बनाने में मदद मिल सकती है।
मोबाइल हेल्थ यूनिट्स की शुरुआत के साथ उत्तर प्रदेश में ‘मातृ एवं किशोर स्वास्थ्य कल्याण पहल’ भी शुरू की गई है। इसका उद्देश्य महिलाओं और किशोर-किशोरियों की स्वास्थ्य संबंधी ज़रूरतों पर विशेष ध्यान देना है। इस पहल के ज़रिए स्वास्थ्य सेवाओं को केवल बीमारी के इलाज तक सीमित रखने के बजाय समय पर जाँच और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता पर भी ध्यान देने की कोशिश की जा रही है। कार्यक्रम के दौरान ‘सेविंग लाइव्स एंड बिल्डिंग ए हेल्थियर भारत’ नामक राष्ट्रीय अभियान की भी शुरुआत की गई। इसका उद्देश्य लोगों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बढ़ाने और समय रहते बीमारी की पहचान को बढ़ावा देना है।
गाँव में जाँच से लेकर अस्पताल तक इलाज की राह
इस पहल की सबसे अहम बात यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ने के लिए मोबाइल यूनिट्स को माध्यम बनाया जा रहा है। अगर किसी व्यक्ति को सामान्य जाँच की ज़रूरत है, तो उसे इसके लिए दूर जाने की परेशानी कम हो सकती है। वहीं, गंभीर बीमारी मिलने पर उसे उचित स्वास्थ्य केंद्र तक पहुँचाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी।
कुल मिलाकर, मोबाइल हेल्थ यूनिट्स की पहल ग्रामीण परिवारों के लिए स्वास्थ्य सुविधा को उनके दरवाज़े के क़रीब लाने की कोशिश है। ख़ासकर उन लोगों के लिए, जिनके लिए शहर के अस्पताल तक पहुँचना समय और पैसे दोनों के लिहाज़ से मुश्किल होता है। अब इस पहल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि मोबाइल यूनिट्स कितनी नियमितता से गाँवों तक पहुँचती हैं और लोगों को कितनी आसानी से जाँच व चिकित्सकीय सलाह मिल पाती है।