Temperature Alert: उत्तर भारत में होली से पहले बढ़ी गर्मी, रबी फसलों पर ख़तरा, तापमान 34 डिग्री तक पहुँचने की संभावना
उत्तर भारत में होली से पहले ही तापमान में अप्रत्याशित वृद्धि देखी जा रही है, जिससे रबी फसलों पर खतरा मंडराने लगा है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और एनसीआर में फरवरी के अंतिम सप्ताह में ही अप्रैल जैसी गर्मी महसूस की जा रही है, जहां अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, होली तक तापमान 34 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है।
रबी की फसलों के लिए चिंता का विषय
यह बढ़ती गर्मी गेहूं, सरसों और सब्जियों जैसी रबी फसलों के लिए चिंता का विषय है, जो इस समय दाने भरने और पकने की अवस्था में हैं। तेज धूप के कारण मिट्टी की नमी तेजी से कम हो रही है। दिन और रात के तापमान में बढ़ोतरी से फसलों में झुलसा रोग और कीट प्रकोप की आशंका भी बढ़ सकती है। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार में भी पारा 30 डिग्री के पार पहुँच रहा है, जिससे किसानों की चिंताएँ बढ़ गई हैं।
एनसीआर में गर्मी, पहाड़ों में बर्फबारी
दिल्ली और एनसीआर में फरवरी के आखिरी दिनों में ही अप्रैल जैसी गर्मी पड़ रही है। लखनऊ में अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। हालांकि, सुबह और शाम अभी भी थोड़ी ठंडक है, लेकिन दिन की तेज धूप फसलों पर दबाव बढ़ा रही है। वहीं पहाड़ी राज्यों में मौसम थोड़ा अलग है। उत्तराखंड के उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ में बारिश और बर्फबारी की संभावना है। हिमाचल प्रदेश में भी अगले चार दिनों तक बर्फबारी हो सकती है। इससे पहाड़ी इलाकों की खेती और बागवानी को कुछ राहत मिल सकती है।
फसलों में रोगों का खतरा
दिन और रात के तापमान में बढ़ोतरी से फसलों में झुलसा रोग और कीड़े लगने का खतरा भी बढ़ सकता है। यह मौसम खेती के लिए बहुत अहम है। किसानों के लिए यह समय चिंताजनक है क्योंकि रबी की फसलें, जैसे गेहूं, सरसों और सब्जियाँ, इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर हैं। बढ़ती गर्मी सीधे तौर पर इन फसलों के दाने भरने और पकने की प्रक्रिया को बिगाड़ सकती है। इससे न सिर्फ पैदावार कम हो सकती है, बल्कि उपज की क्वालिटी भी खराब हो सकती है।
कृषि वैज्ञानिकों की सलाह
- कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को मौसम के पूर्वानुमान पर लगातार नजर रखने की सलाह दी है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपनी फसलों की जरूरत के हिसाब से हल्की सिंचाई करें ताकि नमी बनी रहे।
- मल्चिंग जैसी तकनीकें भी मिट्टी की नमी को बनाए रखने में मदद कर सकती हैं। क्योंकि बढ़ते तापमान के कारण मिट्टी में नमी तेजी से उड़ती है, जो पौधों के बढ़ने के लिए जरूरी है।
- समय पर और प्रभावी प्रबंधन रणनीतियों को अपनाने से बढ़ती गर्मी के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने में मदद मिल सकती है। यह सुनिश्चित करेगा कि रबी की फसलें इस चुनौतीपूर्ण मौसम का सामना कर सकें और किसानों को बेहतर उपज प्राप्त हो सके।
रात में भी बढ़ रहा है तापमान
तापमान में यह बढ़ोतरी सिर्फ दिन में ही नहीं, बल्कि रात में भी महसूस की जा रही है। तापमान में इस तरह के उतार-चढ़ाव से फसलें झुलसा रोग जैसी बीमारियों के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो सकती हैं। इसके अलावा, कीड़े भी बढ़ सकते हैं, जिससे फसलों को और नुकसान हो सकता है। यह स्थिति खेती के लिए एक अहम मोड़ साबित हो सकती है, जहाँ समय पर और सही प्रबंधन बहुत जरूरी होगा।